कुत्तों के कथित रूप से मारे जाने के बाद देशभर में शांति मार्च; लोगों ने न्यायालय से स्पष्टीकरण मांगा

पशु कल्याण समूहों ने कहा कि कुत्ते न तो बीमार थे और न ही आक्रामक थे और उनमें से कई को पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) कार्यक्रम के तहत नसबंदी और टीकाकरण किया गया था.

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कई राज्यों में कथित तौर पर कुत्तों को मार डालने और अवैध रूप से हटाए जाने की खबरों के बाद देशभर में नागरिक एवं पशु कल्याण समूहों ने मोमबत्ती जलाकर मौन शांति मार्च आयोजित किए. गैर सरकारी संगठन ‘पीपुल फॉर एनिमल्स' (पीएफए) ने एक बयान में सोमवार को कहा कि इन घटनाओं से न्यायिक टिप्पणियों के दुरुपयोग को लेकर चिंता बढ़ गई हैं.

पशु कल्याण समूहों ने उच्चतम न्यायालय से आग्रह किया है कि वह अपनी टिप्पणियों के कथित दुरुपयोग को रोकने और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए तत्काल स्पष्टीकरण जारी करे.

तेलंगाना में 14 जनवरी को हुई एक कथित घटना में लगभग 500 कुत्तों को कथित तौर पर घातक इंजेक्शन देकर मार दिया गया.

पशु कल्याण समूहों ने कहा कि कुत्ते न तो बीमार थे और न ही आक्रामक थे और उनमें से कई को पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) कार्यक्रम के तहत नसबंदी और टीकाकरण किया गया था.

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नवंबर 2025 से कई राज्यों में इसी तरह की घटनाएं सामने आई हैं

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