पारसनाथ विवाद : JMM विधायक ने अपनी ही सरकार को घेरा, मधुबन में आदिवासियों ने की सभा

वक्ताओं ने कहा कि पारसनाथ हमारे लिए मरांग बुरु है. सदियों से यहां पर जुग जाहेरथान है जिसपर देश विदेश सभी आदिवासियों की आस्था है.

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रांची:

झारखंड में पारसनाथ को लेकर विवाद लगातार बढ़ता ही जा रहा है. जैन समाज के आंदोलन के बाद सरकार द्वारा वापस लिए गए फैसले के बाद अब क्षेत्र के आदिवासियों और मूलवासियो की तरफ से एक बड़ी रैली का आयोजन किया गया. पारसनाथ के मधुबन मेला मैदान में आयोजित सभा में पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव, झामुमो विधायक लोबिन हेम्ब्रम, सालखन मुर्मू, जयराम महतो सहित कई नेताओं ने संबोधित किया.  जेएमएम विधायक लोबिन हेम्ब्रम ने अपनी पार्टी की सरकार पर ही हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें पार्टी से टिकट नहीं देने की बात कही जा रही है. उन्हें पार्टी टिकट नहीं देगी तो क्या वे माटी से चले जाएंगे. विधायक ने कहा कि हेमंत सरकार अपने वादों पर खरी नहीं उतर रही है. 

वक्ताओं ने कहा कि पारसनाथ हमारे लिए मरांग बुरु है. सदियों से यहां पर जुग जाहेरथान है जिसपर देश विदेश सभी आदिवासियों की आस्था है. आदिवासी समाज ने हमेशा दूसरों का सम्मान किया है. जिस तरह से हमारी विरासत पर अतिक्रमण हो रहा है उसका विरोध करने के लिए यह जुटान हुआ है. किसी भी तरह का प्रपंच आदिवासी समाज बर्दाश्त नहीं करेगा.  कहा कि आगामी 24 फरवरी को झारखंड बंद रहेगा. इस कार्यक्रम को स्थानीय नेता सिकंदर हेम्ब्रम, अमर तुरी, अर्जुन मरांडी ने भी संबोधित किया. 

गौरतलब है कि देशभर में जैन समाज द्वारा किए गए  आंदोलन के आगे आखिरकार केंद्र सरकार को झुकना पड़ा था. सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर बताया था कि झारखंड में जैन समाज के सबसे पवित्र स्थल श्री सम्मेद शिखरजी पर अब कोई न तो पर्यटन होगा ना ही ईको टूरिज्म चलेगा. सम्मेद शिखर मामले में केंद्र सरकार ने समिति बनाई है. साथ ही कहा है कि राज्य सरकार समिति में जैन समुदाय से दो सदस्य शामिल करें और स्थानीय जनजातीय समुदाय से एक सदस्य शामिल करे. केंद्र की ओर से 2019 की अधिसूचना के खंड 3 के प्रावधानों पर रोक लगा दी गई है. साथ ही कहा है कि 2019 की अधिसूचना पर राज्य कार्रवाई करे. पर्यटन, इको टूरिज्म गतिविधियों पर तत्काल रोक लगा दी गई है. 

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