- पहलगाम नरसंहार को एक साल हो गया है, लेकिन कश्मीर में पर्यटन स्थल पूरी तरह नहीं खुले हैं
- बैसरन वैली, डोनवान घाटी और चंदनवाड़ी का रास्ता अभी भी बंद है
- स्थानीय लोग पर्यटन गतिविधियों की पुनः शुरूआत चाहते हैं क्योंकि उनकी आजीविका पर्यटकों पर निर्भर है
पहलगाम नरसंहार को एक साल हो गया है. लेकिन कश्मीर में हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं. बैसरन वैली अभी भी बंद है. डोनवान घाटी भी नहीं खुली है. चंदनवाड़ी का रास्ता भी पूरी तरह चालू नहीं है. हालांकि कई बड़े दावे किए जा रहे हैं पर सच्चाई अलग है. कई पर्यटन स्थल अब भी बंद हैं, कुछ जगहें खोली गई हैं. लेकिन वहां कई पाबंदियां अभी भी हैं. लोकल लोग इन जगहों को खोलने की मांग कर रहे हैं. वे चाहते हैं कि पर्यटकों की आवाजाही पूरी तरह शुरू हो, ताकि टूरिज्म फिर से पटरी पर आए.
टूरिस्ट ज्यादा दिन नहीं रुकते, घूमने की जगहें कम हैं
स्थानीय लोगों के लिए यह बहुत जरूरी है क्योंकि उनकी रोजी-रोटी इसी पर निर्भर है. एक होटल मालिक के मुताबिक, हमने एक साल इंतजार किया, इस साल काम थोड़ा बेहतर है लेकिन टूरिस्ट ज्यादा दिन नहीं रुकते. वजह हैं यहां घूमने की जगहें कम हैं. घोड़ों से पर्यटकों को सवारी कराने वाले लोग भी परेशान हैं. उनकी कमाई टूरिस्टों पर ही निर्भर है. घोड़े वाले कहते है आतंकी हमले ने हमें तोड़ दिया था. हमें लगा था सब खत्म हो गया. अब हालात थोड़ा सुधरे हैं, लेकिन अभी भी सब सामान्य नहीं हैं. ये लोग कहते है कि टूरिस्ट निराश हो जाते हैं. उन्हें कई जगह जाने की अनुमति नहीं मिलती, वे प्रकृति को करीब से देखना चाहते हैं. चंदनवाड़ी का रास्ता भी अहम है. इसे खोलने से भरोसा बढ़ेगा और टूरिस्टों की संख्या भी बढ़ेगी.
पर्यटकटों की मांग-सभी जगहें खुलनी चाहिए
वैसे कश्मीर घूमने आये टूरिस्ट कहते हैं कि सुरक्षा अच्छी है. उन्हें यहां सुरक्षित महसूस होता है, लेकिन पाबंदियों से मजा कम हो जाता है. वैसे पिछले एक साल में हालात कुछ बेहतर हुए हैं. पिछले साल अमरनाथ यात्रा भी सफल रही फिर भी कई जगहें बंद हैं.पर्यटक कहते है कि पहलगाम बहुत खूबसूरत है, लोग भी मददगार हैं.इसीलिए भी सभी जगहें खुलनी चाहिए. दूसरे पर्यटक का कहना है कि यहां माहौल अच्छा है,लेकिन कई जगह बंद होने से मजा अधूरा लगता है.
पर्यटकों की सुरक्षा सबसे जरूरी
सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा सबसे जरूरी है, कोई भी फैसला जांच के बाद ही लिया जाएगा.एक साल पहले पहलगाम में हुए आतंकी हमले में जिस तरह सैलानियों की जान गई थी उससे सुरक्षा बल सतर्क है. अब वो कोई रिस्क लेना नहीं चाहते. वही स्थानीय लोगों की पूरी कमाई पर्यटकों पर निर्भर है लिहाजा उनकी भी चिंता जायज हैं.
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