अखिलेश यादव पर फायर क्यों हैं ओमप्रकाश राजभर, 2027 के चुनाव से पहले किसके वोट बैंक पर है खतरा

अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश के नेताओं की जुबानी जंग तेज हो गई है. नेता आरोप प्रत्यारोप का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं. आज सुभासपा के प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर जमकर हमला बोला है.

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नई दिल्ली:

उत्तर प्रदेश में चुनाव नजदीक आता देख राजनीतिक बयानों में तीखापन बढ़ता जा रहा है.इसका नमूना शुक्रवार को नजर आया, जब कभी अखिलेश यादव के साथी रहे ओमप्रकाश राजभर ने उनकी जाति पर ही हमला बोल दिया. राजभर ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अखिलेश यादव को संबोधित एक पोस्ट में लिखा कि इतिहास में तुम्हारा कहीं कोई नाम नहीं मिलता. किसी विदेशी से संघर्ष नहीं किया. पहले मुगलों की सेना में सिपाही बनकर हमें मारते थे. अंग्रेजों की सेना में उनका सिपाही बनकर मारते थे. अब हमें एक दूसरे से लड़ाकर मूर्ख बनाकर राजनीतिक रूप से मारते हो. उन्होंने अखिलेश से पूछा है कि गैर-यादव ओबीसी समाज को उसका हक आखिर कब मिलेगा? दरअसल यह कवायद 2027 के विधानसभा चुनाव में गैर यादव ओबीसी वोटों को अपनी ओर खिंचने की है. 

ओमप्रकाश राजभर ने कहा क्या है

योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने एक्स पर लिखा,''अखिलेश जी गैर-यादव ओबीसी समाज को उनका हक आखिर कब मिलेगा? वोट हमारा, राज तुम्हारा! तुम हमसे दंगे करवाओ, हमें लोगों से लड़वाओ और ओबीसी समाज का नारा दो. इतिहास में तुम्हारा कहीं कोई नाम नहीं मिलता. किसी विदेशी से संघर्ष नहीं किया. पहले मुगलों की सेना में सिपाही बनकर हमें मारते थे. अंग्रेजों की सेना में उनका सिपाही बनकर मारते थे. अब हमें एक दूसरे से लड़ाकर मूर्ख बनाकर राजनीतिक रूप से मारते हो. हमारा इतिहास महाराजा सुहेलदेव राजभर, रानी अवंती बाई लोधी का इतिहास है. हम अपना राजनीतिक अधिकार लेते रहेंगे. गरीब-गुरबा की पीठ पर यादवों की लाठी के निशान हैं. अखिलेश की सत्ता के लिए हम दरी नहीं बिछाएंगे. जय महाराजा सुहेलदेव राजभर, जय सुभासपा, जय ओबीसी.''

यह पहली बार नहीं है, जब ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा हो. इससे पहले गाजीपुर में विश्वकर्मा समाज की लड़की की मौत पर भी जमकर राजनीति हुई थी. वहां 22 अप्रैल को ग्रामीणों और सपा नेताओं के बीच पथराव हुआ था. सपा नेता प्रतिनिधिमंडल के रूप में लड़की के परिजनों से मिलने गए थे. लेकिन पुलिस ने उन्हें गांव के बाहर ही रोक दिया. इससे दोनों झड़प हुई थी. पुलिस का कहना था कि सपा नेताओं ने पुलिस पर पथराव किया है. 

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यादवों पर हमला क्यों बोल रहे हैं ओमप्रकाश राजभर

इस घटना के बाद भी ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर हमला बोला था. उन्होंने कहा था कि अखिलेश यादव से मैं पूछना चाहता हूं कि जब बाराबंकी में यादव समाज के लोग राजभर की मूड़ी (सिर) काटते हैं तब वहां क्यों नहीं जाते. देवरिया में दिन में गोली मार दी जाती है तब क्यों नहीं जाते. कौशांबी में चार लोग पाल की बेटी से रेप कर देते हैं. लेकिन उनको केवल गाजीपुर दिख रहा. वह जाति संघर्ष कराने के मूड में हैं.

यह हाल तब है जब ओमप्रकाश राजभर ने 2022 का चुनाव सपा के साथ मिलकर लड़ा था. उन्होंने इस चुनाव में छह सीटें जीती थीं. लेकिन बाद उन्होंने बीजेपी के साथ जाना बेहतर समझा था. इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा का पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) फार्मला हिट हो गया. सपा ने यूपी 80 में से 37 सीटें अपनी झोली में डाल ली थीं. वहीं उसकी सहयोगी कांग्रेस ने छह सीटें जीत ली थीं. इससे बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा था. 

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कितना मजबूत होगा अखिलेश का पीडीए

अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव अपने पीडीए फार्मूले को और मजबूत कर रहे हैं. महिला आरक्षण पर जारी लड़ाई के बीच वो अपनी पार्टी में महिलाओं को बड़ी भूमिका दे रहे हैं. इसी क्रम में सपा में कई महिलाओं की नियुक्ति हुई है. सपा ने सीमा राजभर को अपनी महिला सभा का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है. इसी तरह से चंबल के बीहड़ से राजनीति में आई फूलन देवी की बहन रुक्मणी निषाद को महिला सभा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है. सपा अपनी इन दो नियुक्तियों से बीजेपी को मात देने की कोशिश में है.

दरअसल सीमा राजभर इससे पहले ओमप्रकाश राजभर की पार्टी में ही थीं. लेकिन उनसे मनमुटाव होने के बाद वो पार्टी छोड़कर सपा में शामिल हो गई हैं. अखिलेश यादव इसके बहाने राजभर वोटों में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं. राजभर वोट पर अभी ओमप्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी का जनाधार माना जा रहा है. अगर अखिलेश अपनी कोशिश में कामयाब हो जाते हैं तो इसका नुकसान ओमप्रकाश राजभर को ही उठाना पड़ेगा. इसी तरह से सपा की एक और पूर्व सहयोगी निषाद पार्टी भी इन दिनों योगी आदित्यनाथ सरकार में शामिल है. माना जा रहा है कि निषाद वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए ही सपा ने रुक्मणी निषाद को महिला सभा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है.निषाद समाज से आने वाले उसके दो सासंद भी लोकसभा में हैं, जबकि निषाद पार्टी का लोकसभा में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है. इन दोनों जातियों का पूर्वांचल के जिलों में खासा प्रभाव है. इन दोनों का पूर्वी उत्तर प्रदेश में करीब 10 फीसदी वोट माना जाता है. आने वाले दिनों में इस तरह वोटों के ध्रुवीकरण की लड़ाई के और तेज होते जाने का अनुमान है. 

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