- जनवरी 2026 में हुई NET-JRF परीक्षा के इतिहास के पेपर में NTA द्वारा जारी आंसर-की में कई गलतियां पाई गई हैं
- DU के असिस्टेंट प्रोफेसर और छात्रों ने कुल नौ विवादित प्रश्नों की पहचान कर उन्हें सुधारने की मांग की है
- NTA ने चैलेंज के बावजूद पांच गलत उत्तरों को ठीक किए बिना फाइनल आंसर-की जारी कर परिणाम घोषित किए हैं
NTA की तरफ से जनवरी 2026 में आयोजित NET-JRF परीक्षा के परिणाम विवादों के घेरे में हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसरों और छात्रों ने इतिहास के पेपर में गंभीर खामियां उजागर की हैं. उनका आरोप है कि NTA की तरफ से जारी गलत आंसर-की वजह से हजारों छात्रों का JRF और NET क्वालीफाई होने से रुक गया है. इतिहास की इस परीक्षा में लगभग 84,000 छात्र शामिल हुए थे. कई छात्रों का भविष्य इन 9 विवादित सवालों पर टिका है.
DU के छात्रों‑प्रोफेसरों के बयान
विकास कुमार मिश्रा (असिस्टेंट प्रोफेसर, दयाल सिंह कॉलेज, DU) जो खुद 2023 में JRF क्वालीफाई कर चुके हैं. वो बताते हैं कि 14 जनवरी को जारी प्रोविजनल आंसर-की में 5 प्रश्नों के जवाब गलत थे. जिसके बाद नियम के मुताबिक हमने 300 रुपये देकर इन पर चैलेंज भी किया गया, लेकिन NTA ने बिना किसी सुधार के प्रोविजनल आंसर-की को ही 'फाइनल' बनाकर रिजल्ट जारी कर दिया. उन्होंने स्क्रीन पर सबूत दिखाते हुए कहा:
सवाल नंबर 81: इसमें विकल्प (Options) ही एक जैसे दे दिए गए हैं. गुप्ता साम्राज्य का सवाल: NTA ने 'मंडल' को सही जवाब माना है, जबकि के.सी. श्रीवास्तव जैसी मानक पुस्तकों के अनुसार सही उत्तर 'भुक्ति' है.
तकनीकी गलती: एक अन्य प्रश्न का उत्तर NTA ने B माना है, जबकि सही जवाब D होना चाहिए.
चंद्रजीत (असिस्टेंट प्रोफेसर, PGDAV कॉलेज, DU) ने खुद यह परीक्षा दी और बताया कि भील रिवॉल्यूशन जैसे विषयों से जुड़े सवालों सहित कुल 9 ऐसे प्रश्न हैं जिनके जवाब बदले जाने चाहिए या उन्हें ड्रॉप (हटाया) किया जाना चाहिए.
चितविक शर्मा ने कहा कि मेरे अनरिजर्व्ड कैटेगरी में 212 नंबर आए हैं, जबकि कटऑफ 216 गई है. यानी सिर्फ दो सवालों की गलती की वजह से मेरा JRF रह गया
गौतम ने कहा कि प्रश्न पत्र में ही गंभीर गलतियां हैं, जैसे एक सवाल में न्यायमूर्ति का नाम 'SK DHAR' होना चाहिए था, लेकिन 'SK DAS' लिखा गया है. मेरे 98 नंबर आए जबकि JRF के लिए 103 चाहिए थे.
लोकेश ने कहा कि मेरा NET क्वालीफाई होने से सिर्फ तीन सवालों की वजह से रुक गया है. हम न्याय की मांग कर रहे हैं.
छात्र‑शिक्षकों की मांगें
इन विवादित 9 सवालों की समीक्षा के लिए एक विशेषज्ञ कमेटी का गठन हो; कई बार कोर्ट के दखल के बाद भी जवाब बदले गए हैं. मानक पुस्तकों जैसे इग्नू और के.सी. श्रीवास्तव की किताब के आधार पर रिवाइज्ड आंसर‑की जारी हो. संशोधित अंकों के आधार पर दोबारा मेरिट लिस्ट तैयार हो.













