अल फलाह विश्वविद्यालय का अल्पसंख्यक दर्जा क्यों नहीं वापस ले लिया जाए? NCMEI ने भेजा नोटिस

अभी तक की जांच में पता चला है कि यूनिवर्सिटी को सात साल में 415 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी. यूनिवर्सिटी से जुड़ी तमाम शेल कंपनियां भी मिली हैं. एक ही पैन नंबर से सारे लेनदेन का खेल हो रहा था.

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  • NCMEI ने अल फलाह विश्वविद्यालय को आतंकवादी हमलों से जुड़े संबंधों पर कारण बताओ नोटिस जारी किया.
  • लाल किले पर हुए ब्लास्ट के सुसाइड बॉम्बर और अन्य संदिग्धों का संबंध अल फलाह विश्वविद्यालय से पाया गया है.
  • अहमदाबाद के सीरियल ब्लास्ट में शामिल आतंकी मिर्जा शादाब बेग भी इसी विश्वविद्यालय का पूर्व छात्र था.
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राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (NCMEI) ने अल फलाह विश्वविद्यालय को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. इसमें पूछा गया है कि लाल किले पर हुए आतंकवादी हमले से जुड़े संबंधों के मद्देनज़र उसका अल्पसंख्यक दर्जा क्यों नहीं वापस ले लिया जाए. एनसीएमईआई सूत्रों ने बताया कि कल हमने नोटिस जारी किया और मामले की सुनवाई 4 दिसंबर को तय की गई. विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार और हरियाणा सरकार के शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किया गया है.

पहले भी धमाकों से जुड़ा नाम

दिल्ली के लाल किला ब्लास्‍ट का सुसाइड बॉम्‍बर डॉक्‍टर उमर नबी इसी अल-फलाह यूनिवर्सिटी में काम करता था. इस यूनिवर्सिटी से जुड़े कई और डॉक्‍टर भी दिल्‍ली ब्‍लास्‍ट मामले से जुड़े पाए गए हैं. ऐसा भी नहीं है कि बम धमाकों से पहली बार अल फलाह विश्वविद्यालय का नाम जुड़ा है. 2008 में अहमदाबाद में सीरियल बम धमाके हुए थे, इसमें शामिल आतंकी मिर्जा शादाब बेग भी अल-फलाह यूनिवर्सिटी का ही छात्र है. उसने 2007 में फरीदाबाद के अल-फलाह इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन में बीटेक पूरा किया था और 2008 में अहमदाबाद में होने वाले सीरियल ब्लास्ट में शामिल रहा. यानी पढ़ाई के दौरान ही हमले की तैयारी में था. सालों से यह फरार है. अभी इसके अफगानिस्तान में होने की खबर है.

20 से 78 एकड़ में फैल गया  

अभी तक की जांच में पता चला है कि यूनिवर्सिटी को सात साल में 415 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी. यूनिवर्सिटी से जुड़ी तमाम शेल कंपनियां भी मिली हैं. एक ही पैन नंबर से सारे लेनदेन का खेल हो रहा था. अल फलाह ट्रस्ट के संस्थापक जावेद अहमद सिद्दीकी से पूछताछ में और नए खुलासे हो सकते हैं. यूनिवर्सिटी की शुरुआत 20 एकड़ से हुई थी और 78 एकड़ तक इसका विस्तार हुआ. ग्रामसभा से संबंधित लोगों ने पहले ग्रामसभा की सड़क की जमीन पर अतिक्रमण की कई शिकायतें की थीं. ईडी और अन्य जांच एजेंसियों का कहना है कि ट्रस्ट मुख्य रूप से कॉलेज और यूनिवर्सिटी चलाता है. ऐसे में छात्रों मिली फीस ही इसकी मुख्य आय का स्रोत है. हालांकि कई सालों तक संस्थान बिना मान्यता के चलते रहा. फिर छात्रों से पूरी फीस वसूली गई, जिसे एजेंसियां धोखाधड़ी और जालसाजी मान रही हैं.

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