5 जिलों में सिमट गए मुट्ठी भर नक्सली! आखिरी प्रहार की बारी, क्या अमित शाह की डेडलाइन के पहले ही द एंड?

गृह मंत्री अमित शाह 31 मार्च 2026 तक देश में नक्सलवाद के अंत करने का ऐलान कर चुके हैं. पिछले कुछ महीनों में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी नक्सलियों के खिलाफ हाथ लगी है.

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Naxal Operation: नक्सलियों का बड़ा अभियान
नई दिल्ली:

गृह मंत्री अमित शाह कई मौकों पर ऐलान कर चुके हैं कि सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक देशभर से नक्सलवाद के खात्मे का है.पिछले एक साल में इस दिशा में सुरक्षा बलों को कई सफलताएं भी मिली हैं जब नक्सलियों के कई बड़े कमांडरों को मार गिराया गया है. इस लक्ष्य की ओर सरकार तेज़ी से आगे बढ़ रही है, जिसकी गवाही आंकड़े भी दे रहे हैं. लोकसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में सरकार ने उन जिलों और पुलिस थानों का आंकड़ा दिया है, जहां नक्सली हिंसा की वारदातें सामने आती हैं. ऐसे ज़िलों और थानों की संख्या इस साल जनवरी में सिमटकर क्रमशः 5 और 11 रह गई हैं.ये ज़िले और थाने केवल दो राज्यों में हैं. इसमें छत्तीसगढ़ के 3 जिलों के 9 थाने और झारखंड के 2 जिलों के 2 थाने शामिल हैं. 

2019 में अमित शाह ने गृह मंत्री का कार्यभार संभाला , तबसे लगातार नक्सलियों का भौगोलिक दायरा सिमट रहा है.2019 में जहां देश के 61 जिलों के 245 थानों से नक्सली वारदातों की घटना सामने आई थी , वहीं 2020 में 53 जिलों के 229 थानों से ऐसी घटनाएं सामने आई थीं. 2024 में 42 ज़िलों के 151 थानों में जबकि 2025 में 32 जिलों के 119 थानों में नक्सली घटनाएं घटित हुई थीं.

सबसे ज़्यादा नक्सल प्रभावित झारखंड , बिहार और छत्तीसगढ़ के इलाके रहे हैं.2019 में जिन 245 थानों से ऐसी घटनाएं सामने आई थीं उनमें 195 इन्हीं तीन राज्यों से थे.लेकिन जहां बिहार में इस साल अबतक एक भी नक्सली हिंसा की घटना नहीं हुई है वहीं छत्तीसगढ़ और झारखंड के भी महज 11 थानों तक ये सिमट गया है.

मोदी सरकार ने 2014 में सत्ता संभालते ही इस समस्या के निराकरण के लिए काम करना शुरू कर दिया था.2015 में गृह मंत्रालय ने ' वामपंथी उग्रवाद के खात्मे के लिए राष्ट्रीय एक्शन प्लान ' तैयार किया.इसके तहत कई मोर्चों पर काम शुरू किया गया है जिसमें सुरक्षा संबंधी क़दम उठाने के साथ साथ विकास सुनिश्चित करना और स्थानीय लोगों के अधिकार सुरक्षित रखना शामिल है.

इसके अलावा नक्सलियों के सरेंडर को लेकर जो नीति बनाई गई उसका भी फायदा देखने को मिला है.नीति के मुताबिक़ ऊंचे रैंक के किसी नक्सली को सरेंडर करने पर 5 लाख रुपया जबकि छोटे रैंक के नक्सली के सरेंडर करने पर 2.5 लाख रुपया दिए जाते हैं.हथियारों के सरेंडर पर भी इनाम का इंतज़ाम किया गया है.इसके अलावा सरेंडर किए नक्सली को किसी पेशे के लिए ट्रेनिंग देने की भी नीति बनाई गई है.इसके तहत 3 साल तक प्रति महीने 10000 रुपए स्टाइपेंड देने का भी प्रावधान रखा गया है.नतीजा ये हुआ है कि 2019 से जनवरी 2026 तक 5880 नक्सलियों ने सरेंडर किया है.इसी दौरान 7409 नक्सली गिरफ़्तार भी हुए हैं.
 

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