- दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत कइयों के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज की
- AJL की संपत्तियों का 50 लाख रुपए में Young Indian को ट्रांसफर कर लगभग 2000 करोड़ की संपत्ति हड़पने का आरोप
- 752 करोड़ की AJL की संपत्तियों को अटैच किया है और 2017 में ₹414 करोड़ की टैक्स चोरी का खुलासा
नेशनल हेराल्ड मामले ने एक बार फिर राजनीतिक हलचल मचा दी है. दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज कर ली है. इसमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और विश्वासघात जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं. ED ने 9 अप्रैल,2025 को सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और डोटेक्स के प्रमोटर के खिलाफ नेशनल हेराल्ड/एसोसिएटेड जर्नल्स प्राइवेट लिमिटेड (AJL) से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक चार्जशीट दायर की थी.
चार्जशीट में आरोपी
- सोनिया गांधी (आरोपी संख्या 1)
- राहुल गांधी (आरोपी संख्या 2)
- सुमन दुबे (आरोपी संख्या 3)
- सैम पित्रोदा (आरोपी संख्या 4)
- मेसर्स यंग इंडियन (आरोपी संख्या 5)
- मेसर्स डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड (आरोपी संख्या 6)
- सुनील भंडारी (आरोपी संख्या 7)
कोर्ट के आदेश से शुरू हुआ विवाद, ED ने दायर की चार्जशीट
ये मामला 26 जून 2014 को पटियाला हाउस कोर्ट के मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट द्वारा लिए गए आदेश से शुरू हुआ था. दरअसल, 2013 में सुब्रमण्यम स्वामी ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडिस, सैम पित्रोदा, सुमन दुबे और मेसर्स यंग इंडियन के खिलाफ एक शिकायत दर्ज कराई थी. ED ने 9 अप्रैल 2025 को PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में चार्जशीट दायर की. इसमें कथित तौर पर ₹5000 करोड़ से अधिक के बाजार मूल्य की अपराध की आय शामिल है, जबकि कुल अपराध की आय ₹2000 करोड़ बताई गई है.
₹2000 करोड़ की संपत्ति हड़पने का आरोप
2010 में, AJL (एक गैर-सूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनी), यंग इंडियन (YI) के प्रमुख अधिकारियों और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के प्रमुख पदाधिकारियों पर ₹2000 करोड़ (लगभग) की AJL की संपत्तियों को हड़पने की आपराधिक साजिश रचने का आरोप है. यह साजिश AJL के 99% शेयर केवल ₹50 लाख में यंग इंडियन (एक निजी कंपनी) को ट्रांसफर करके पूरी की गई. यंग इंडियन में श्रीमती सोनिया गांधी और श्री राहुल गांधी की हिस्सेदारी मिलाकर 76% थी.
आरोप है कि आरोपियों ने आपराधिक साजिश रचकर AICC द्वारा AJL को दिए गए ₹90.21 करोड़ के बकाया लोन को ₹9.02 करोड़ के इक्विटी शेयरों में बदल दिया और ये सारे शेयर यंग इंडियन को केवल ₹50 लाख में ट्रांसफर कर दिए.
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गांधी परिवार की हिस्सेदारी 76%
AJL की ज्यादा हिस्सेदारी YI को ट्रांसफर करने से, AJL की हजारों करोड़ की सभी संपत्तियों सोनिया गांधी और राहुल गांधी का कब्जा हो गया. जांच से पता चला है कि यंग इंडियन को प्रभावी रूप से राहुल गांधी और सोनिया गांधी नियंत्रित करते थे, क्योंकि उनके पास इसके 76% शेयर थे. बाकी 24% शेयर स्वर्गीय मोतीलाल वोरा और स्वर्गीय ऑस्कर फर्नांडिस के पास थे, जो सोनिया गांधी और राहुल गांधी के करीबी सहयोगी थे. यंग इंडियन को धारा 25 कंपनी एक्ट के तहत चैरिटी लिए रजिस्टर्ड कराया गया था, लेकिन जांच से पता चला कि कंपनी में चैरिटी का कोई काम नहीं किया गया.
गांधी परिवार को नहीं मिली राहत, 752 करोड़ की संपत्ति अटैच की
गांधी परिवार ने पटियाला हाउस कोर्ट के आदेश को दिल्ली उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट दोनों में चुनौती दी, लेकिन अदालतों ने कोई राहत नहीं दी. चूंकि यह मामला हजारों करोड़ की AJL की संपत्तियों और शेयरों के रूप में अपराध की आय बनाने, कब्जे और उपयोग से संबंधित है, इसलिए ₹752 करोड़ (लगभग) मूल्य की AJL की संपत्तियों को सुरक्षित करने के लिए ED ने 20 नवंबर 2023 को अटैच करने का आदेश जारी किया था, जिसकी निर्णायक प्राधिकारी (Adjudicating Authority) ने पुष्टि कर दी है.
2017 में आयकर विभाग ने उजागर की ₹414 करोड़ की टैक्स चोरी
ED की जांच रिपोर्ट आयकर विभाग के यंग इंडियन के मामले में 27 नवंबर 2017 के आदेश को और आगे बढ़ाती है. 2017 में, आईटी विभाग ने यंग इंडियन के हाथों AJL की संपत्तियों के अवैध अधिग्रहण पर ₹414 करोड़ से अधिक की बड़ी टैक्स चोरी पाई थी. आयकर विभाग की इस रिपोर्ट में कहा गया कि AICC (सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडिस) और AJL (मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडिस) के महत्वपूर्ण पदाधिकारियों ने AJL पर कब्जा करने के लिए सुनियोजित साजिश की.
इसका उद्देश्य AJL की व्यावसायिक संपत्तियों से पैसा कमाना और ऐसी आय पर कोई टैक्स नहीं देना था. यंग इंडियन द्वारा इस असेसमेंट आदेश को चुनौती दी गई, जिसके बाद दुबारा जांच में यंग इंडियन के हाथ में ₹398 करोड़ की आय दिखाई गई.
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'फर्जी' दान और विज्ञापन का खुलासा
विस्तृत जांच, दस्तावेजी साक्ष्य, बयान और मनी ट्रेल के आधार पर ED ने कई और खुलासे किए हैं. जांच में खुलासा हुआ कि डी.के. शिवकुमार और रेवंत रेड्डी दोनों ने यंग इंडियन को फर्जी दान दिलाने में सहयोग किया. डी.के. शिवकुमार ने निजी रूप से ₹25 लाख और अपने ट्रस्ट के जरिए से ₹2 करोड़ का दान दिया. रेवंत रेड्डी ने कई लोगों को यंग इंडियन को दान देने के लिए कहा. रेवंत रेड्डी के कहने पर ₹80 लाख मूल्य के दान किए गए. डी.के. शिवकुमार ने स्वीकार किया कि उन्हें यंग इंडियन की गतिविधियों के बारे में जानकारी नहीं थी, और उन्होंने तत्कालीन AICC कोषाध्यक्ष पवन बंसल के कहने पर दान किया था.
18.12 करोड़ के फर्जी दान हासिल किए गए
जांच में यह भी पता चला कि ₹18.12 करोड़ के फर्जी दान हासिल किए गए, जिसका उद्देश्य YI को टैक्स भरना था. अगर टैक्स नहीं भर पाते, तो इसका बोझ बहुमत शेयरधारकों सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर आता. पूछताछ में पता चला कि कांग्रेस के सीनियर नेताओं के कहने पर बिना किसी वास्तविक व्यावसायिक लेनदेन के AJL को पैसा ट्रांसफर किया गया था. AJL ने 2017-18 से 2020-21 के दौरान अपने अखवार के विज्ञापन से ₹29.45 करोड़ की कमाई का दावा किया गया. इसमें से ₹15.86 करोड़ कई कांग्रेस से जुड़े हुए लोगों और संस्थाओं से आए और ₹13.59 करोड़ अन्य संस्थाओं से. विज्ञापनदाताओं ने गवाही दी कि उन्होंने कांग्रेस नेताओं के कहने पर पैसे दिए, और कुछ कारोबारियों ने ये भी कहा कि उन्होंने पैसा कांग्रेस पार्टी को प्रोटेक्शन मनी के तौर कर दिया.
कांग्रेस नेताओं को बधाई वाले विज्ञापनों पर ED का सवाल
ये विज्ञापन ज्यादातर कांग्रेस के बड़े नेताओं को बधाई और जन्मदिन की शुभकामनाओं के थे, जो डोनर्स के व्यावसायिक उद्देश्यों से मेल नहीं खाते थे. ED की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि यंग इंडियन और AJL की संपत्तियों का इस्तेमाल ₹18 करोड़ के फर्जी दान, ₹38 करोड़ के फर्जी एडवांस किराए, और ₹29 करोड़ के फर्जी विज्ञापनों के रूप में अपराध की आय बनाने के लिए किया गया. ED ने 11.04.2025 को PMLA, 2002 की धारा 8 और PMLA (कब्जा लेना) नियम, 2013 के नियम 5(1) के तहत AJL की कुर्क की गई संपत्तियों का कब्जा लेने की कार्यवाही शुरू कर दी है. दिल्ली, मुंबई और लखनऊ में AJL की संपत्तियों के क्षेत्राधिकार वाले संपत्ति रजिस्ट्रारों को नोटिस दिए गए हैं.
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मुंबई के हेराल्ड हाउस में 7वीं, 8वीं और 9वीं मंजिल पर कब्जा करने वाली मेसर्स जिंदल साउथ वेस्ट प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को भी नोटिस दिया गया है कि वे हर महीने किराए का पैसा ED डायरेक्टर को ट्रांसफर करें. ED ने जांच के बाद दिल्ली, मुंबई और लखनऊ में ₹661 करोड़ मूल्य की अचल संपत्तियों और ₹90.2 करोड़ मूल्य के AJL के शेयरों को कुर्क किया था, जिसे निर्णायक प्राधिकारी ने पुष्टि कर दी है. आरोप है कि 23.11.2010 को सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची और यंग इंडियन का गठन किया. 50 लाख के लोन का ट्रांसफर इस झूठे दावे के साथ किया गया कि AJL की कोई नेट वर्थ नहीं है और वह कांग्रेस पार्टी का लोन को चुकाने में असमर्थ है, जबकि वास्तव में AJL के पास हजारों करोड़ की अचल संपत्ति थी और देनदारियां बहुत कम थीं.
₹661 करोड़ की संपत्ति और ₹90.2 करोड़ के शेयर कुर्क
इस प्रकार, केवल ₹50 लाख का भुगतान करके, यंग इंडियन ने AJL से ₹90.2 करोड़ वसूलने का अधिकार हासिल कर लिया. इस तरह, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, स्वर्गीय मोतीलाल वोहरा और स्वर्गीय ऑस्कर फर्नांडिस ने कांग्रेस पार्टी के फंड का ₹89.75 करोड़ (₹90.25 करोड़ माइनस ₹50 लाख) का गबन किया. आरोप है कि आरोपियों ने कांग्रेस पार्टी के साथ-साथ AJL और उसके शेयरधारकों के खिलाफ विश्वासघात किया. कांग्रेस पार्टी के फंड इन आरोपियों की निजी संपत्ति नहीं थी। ये फंड पार्टी के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए उपयोग किए जाने थे. इसके बजाय, उन्होंने इन फंडों को AJL जैसी कमर्शियल गतिविधियों में लगी एक सार्वजनिक लिमिटेड कंपनी को बिना ब्याज के लोन के रूप में दिया, जो कांग्रेस पार्टी के संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन है.
₹50 लाख में ₹90 करोड़ का अधिकार, कांग्रेस फंड के गबन का आरोप
राहुल गांधी (14.06.2022 को दर्ज बयान): "जैसा कि मैं पहले ही बता चुका हूं, मैं किसी भी तरह से AJL से कभी जुड़ा नहीं था. मैं न तो शेयरधारक था और न ही निदेशक, इसलिए मैं इनमें से किसी भी विवरण से अवगत नहीं हूं. मेरा मानना है कि AJL अब एक कार्यशील इकाई है और अखवार छापती है और इसकी एक अच्छी डिजिटल उपस्थिति भी है. यह श्री वोहरा द्वारा एक राष्ट्रीय महत्व की संस्था को पुनर्जीवित करने के अपने संवैधानिक कर्तव्य को पूरा करने के अच्छे काम का प्रमाण है."
राहुल, सोनिया के बयान सामने आए, ED ने दस्तावेजी सबूतों की कमी बताई
सोनिया गांधी (26.07.2022 को दर्ज बयान): "AJL के प्रकाशन, विशेष रूप से नेशनल हेराल्ड, कौमी आवाज और नवजीवन, जिन्हें 1930 के दशक में प्रतिष्ठित स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा शुरू किया गया था, स्वतंत्रता आंदोलन की आवाज रहे हैं... बहुत बाद में जब AJL के प्रकाशन अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहे थे, तो वोहरा जी, एमडी और अध्यक्ष ने AJL को कैसे पुनर्जीवित किया जाए, इस पर कानूनी सलाह ली, और तभी कानूनी दिग्गजों के समर्थन से, यंग इंडियन की स्थापना की गई. कांग्रेस पार्टी ने AJL के पुनरुद्धार का समर्थन इन्हीं कारणों से किया." ED का कहना है कि AJL के पुनरुद्धार का समर्थन करने वाला कोई दस्तावेज पेश नहीं किया गया.














