झारखंड के मुख्य सचिव और DGP को तलब करेगा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, जानें- पूरा मामला

मुसहर समुदाय के सदस्यों को 29 अगस्त को एक दूसरे समुदाय के लोगों ने गांव से बाहर निकाल दिया था और उन्हें प्रशासन ने एक इमारत में अस्थायी शरण दी थी.

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उन्हें प्रशासन ने एक इमारत में अस्थायी शरण दी थी.
मेदिनीनगर (झारखंड):

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग पलामू जिले में एक जमीन विवाद में करीब 50 दलित परिवारों को दूसरे समुदाय के सदस्यों द्वारा जबरन निकाले जाने के मामले में झारखंड के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को तलब करेगा. आयोग के उपाध्यक्ष अरुण हैदर ने शनिवार को पांडू थाना क्षेत्र के मुरुमातू गांव में टोंगरी पर्वतीय क्षेत्र में घटनास्थल का दौरा किया और आरोप लगाया कि साजिश के तहत इस घटना को अंजाम दिया गया. पूरे मामले में स्थानीय प्रशासन की भूमिका संदिग्ध नजर आती है. 

हैदर ने कहा कि प्रशासन की कार्रवाई से इतर आयोग अपने अधिकारों के तहत कार्रवाई करेगा. उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘अभी तक आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे संकेत मिलता है कि उनके और पुलिस के बीच सांठगांठ है. महिलाओं समेत पीड़ितों ने कानून के रखवालों से सुरक्षा की गुहार लगाई थी. लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की. अगर पुलिस समय पर मौके पर पहुंच जाती तो घर नहीं गिराए जाते.''

बता दें कि मुसहर समुदाय के सदस्यों को 29 अगस्त को एक दूसरे समुदाय के लोगों ने गांव से बाहर निकाल दिया था और उन्हें प्रशासन ने एक इमारत में अस्थायी शरण दी थी. उन्होंने कहा कि आयोग ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि निकाले गए लोगों को उसी स्थान पर पुन: बसाया जाए जहां वे पहले रह रहे थे. सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के मुख्य प्रवक्ता सुप्रिय भट्टाचार्य ने शुक्रवार को कहा था कि परिवारों के पुनर्वास के लिए जमीन मुहैया कराई जाएगी.

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