Opposition's Modi Retirement Narrative: नरेंद्र मोदी के गुजरात जाने के बाद बीजेपी कभी हारी नहीं. लगातार वहां सरकार बना रही है. केंद्र में मोदी 2014 में आए तो उसके बाद लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बने. तीसरी बार बहुमत नहीं मिला तो विपक्ष को लगा कि अब मोदी मैजिक ढलान पर है, मगर पहले हरियाणा, फिर महाराष्ट्र और दिल्ली में बीजेपी सत्ता में आ गई तो विपक्ष हैरान-परेशान हो गया. अब नया नैरेटिव पीएम मोदी के रिटायरमेंट को लेकर गढ़ा जा रहा है.
कैसे हुई शुरूआत
इसकी शुरूआत तो 2024 लोकसभा चुनावों के दौरान ही हो गई थी. जब अरविंद केजरीवाल ने पीएम मोदी की रिटायरमेंट को लेकर एक रैली में बयान दे दिया. तब खुद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इसका खंडन किया था. अब पीएम मोदी नागपुर में आरएसएस मुख्यालय गए तो उद्धव ठाकरे की पार्टी के संजय राउत ने कह दिया कि पीएम मोदी अपने रिटायरमेंट पर चर्चा करने आरएसएस मुख्यालय गए थे. आखिर इस नैरेटिव का मतलब क्या है? बीजेपी की ओर से तो कभी इस बात को नहीं कहा गया. तो फिर विपक्ष क्यों नरेंद्र मोदी को रिटायर करना चाहता है? क्या ये पीएम मोदी से मिलती लगातार हार का डर है?
पढ़ें अमित शाह का दिया बयान
वरिष्ठ पत्रकार समीर चौगांवकर ने क्या कहा?
वरिष्ठ पत्रकार समीर चौगांवकर ने इस मसले पर एनडीटीवी से कहा कि जो कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी 75 साल के बाद रिटायर हो जाएंगे, तो कोई भी राजनीतिक पार्टी अपने संविधान के हिसाब से चलती है. बीजेपी का अपना संविधान है, क्या बीजेपी के संविधान में कहीं लिखा है कि 75 साल के बाद शीर्ष पद पर कोई व्यक्ति नहीं रह सकता, ये प्रधानमंत्री मोदी का एक ओपिनियन था, जिसके आधार पर मार्गदर्शक मंडल बनाया गया था, लेकिन बीजेपी के संविधान में ऐसी कोई बात नहीं है.