- मुंबई और पुणे के बीच मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट 1 मई से खुलकर यात्रा समय में 25 मिनट की बचत करेगा
- जुड़वा सुरंगों की चौड़ाई 23.75 मीटर है जो दुनियाभर में सबसे चौड़ी सुरंग बनाती है
- सह्याद्रि की पहाड़ियों में बना केबल-स्टेड पुल 132 मीटर ऊंचा है और एशिया का सबसे ऊंचा वायाडक्ट है
मुंबई और पुणे के बीच का सफर अब हमेशा के लिए बदलने जा रहा है. खंडाला घाट की उन खतरनाक ढलानों और जानलेवा मोड़ों को पीछे छोड़ते हुए, भारत ने सह्याद्रि की पहाड़ियों के बीच इंजीनियरिंग का एक ऐसा चमत्कार खड़ा किया है जिसे 'मिसिंग लिंक' कहा जा रहा है. दुनिया की सबसे चौड़ी सुरंगों और बादलों को छूते केबल-स्टेड ब्रिज के साथ, यह प्रोजेक्ट न केवल आपके सफर से 25 मिनट कम करेगा, बल्कि प्रकृति और तकनीक के बेजोड़ मिलन की एक नई कहानी लिखेगा.
1 मई से मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर 'मिसिंग लिंक' खुल जाएगा, जिससे इन दो बड़े शहरों के बीच यात्रा पहले से ज्यादा तेज और ज्यादा आसान हो जाएगी. इसमें मौजूदा एक्सप्रेसवे को 6 लेन से बढ़ाकर 10 लेन का किया गया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा गाड़ियां इससे गुजर सकें.
'मिसिंग लिंक' में क्या है खास? 10 बातें
1. दुनिया की सबसे चौड़ी ट्विन टनल
इस प्रोजेक्ट में बनी जुड़वा सुरंगों की चौड़ाई 23.75 मीटर है, जो इसे दुनिया की सबसे चौड़ी सुरंग बनाती है. इसमें एक साथ 10 लेन का ट्रैफिक (दोनों तरफ 5-5 लेन) गुजर सकता है, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों को भी पीछे छोड़ देता है.
2. एशिया का सबसे ऊंचा केबल-स्टेड वायाडक्ट
घाटी के बीच बना केबल-स्टेड पुल जमीन से 132 मीटर (लगभग 40 मंजिला इमारत के बराबर) की ऊंचाई पर स्थित है. यह सह्याद्रि की पहाड़ियों में बना अब तक का सबसे ऊंचा और चुनौतीपूर्ण पुल है.
3. एरोडायनामिक विंड टेस्टिंग
मानसून के दौरान खंडाला घाट में 150 किमी/घंटा की रफ्तार से चलने वाली हवाओं का सामना करने के लिए, इस पुल का 'विंड टनल टेस्ट' किया गया है. इसका विशेष एरोडायनामिक प्रोफाइल यह सुनिश्चित करता है कि भीषण तूफान में भी पुल पूरी तरह स्थिर रहे.
4. जीरो-ग्रेडिएंट का चमत्कार
पुराने घाट सेक्शन में ट्रकों को खड़ी चढ़ाई की वजह से पहले गियर में रेंगना पड़ता था, लेकिन 'मिसिंग लिंक' को लगभग सपाट (Flat Gradient) बनाया गया है. इससे भारी वाहनों के ईंधन की खपत में 15% से 20% की कमी आएगी.
5. एडवांस्ड SCADA सिस्टम
सुरंग के भीतर की रोशनी, वेंटिलेशन और सुरक्षा को एक सेंट्रलाइज्ड SCADA (Supervisory Control and Data Acquisition) सिस्टम से नियंत्रित किया जाता है. यह सिस्टम सुरंग के बाहर की रोशनी के अनुसार अंदर की ब्राइटनेस को एडजस्ट करता है ताकि ड्राइवर की आंखों पर दबाव न पड़े.
6. AI-आधारित ऑटोमैटिक इंसिडेंट डिटेक्शन (AID)
पूरी सुरंग में AI-कैमरे लगे हैं जो किसी भी हादसे, रुकी हुई गाड़ी या सड़क पर गिरी हुई वस्तु को चंद सेकंड में पहचान लेते हैं. यह सिस्टम तुरंत कंट्रोल रूम को अलर्ट भेजता है, जिससे बड़ी दुर्घटनाओं को टाला जा सकेगा.
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7. 'पॉइंट एक्सट्रैक्शन' फायर सेफ्टी
आग लगने की स्थिति में यहाँ दुनिया की सबसे आधुनिक वेंटिलेशन प्रणाली का इस्तेमाल किया गया है. यह सिस्टम धुएं को उसी जगह से सोखकर बाहर फेंक देता है जहाँ आग लगी हो, जिससे बाकी सुरंग में फंसे यात्रियों को सुरक्षित निकाला जा सके.
8. लैंडस्लाइड से पूरी तरह सुरक्षित
पुराना रास्ता भूस्खलन के लिए कुख्यात था. 'मिसिंग लिंक' का रास्ता पहाड़ों के अंदर और गहरी घाटियों के ऊपर से गुजरता है, जिससे मानसून के दौरान पत्थरों के गिरने का खतरा 90% तक खत्म हो गया है.
9. प्रिसिजन ब्लास्टिंग तकनीक
कठोर बेसाल्ट चट्टानों को काटने के लिए इलेक्ट्रॉनिक डेटोनेटर और कंट्रोल्ड ब्लास्टिंग का उपयोग किया गया है. इससे पुराने एक्सप्रेसवे के ट्रैफिक को रोके बिना और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना लाखों क्यूबिक मीटर खुदाई की गई.
10. 100 किमी/घंटा की निरंतर रफ्तार
आमतौर पर पहाड़ी रास्तों पर गति सीमा 40-50 किमी/घंटा होती है, लेकिन इस प्रोजेक्ट की ज्यामिति को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यात्री सुरंगों और पुलों के ऊपर से 100 किमी/घंटा की एक समान गति से बिना रुके गुजर सकेंगे.
कोई नया टोल नहीं लगेगा?
'मिसिंग लिंक' पर कोई नया टोल भी नहीं लगेगा. महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने बताया कि इसका इस्तेमाल करने के लिए कोई नया टोल नहीं लिया जाएगा और खलापुर टोल प्लाजा पर मौजूदा टोल रेट में कोई बदलाव नहीं होगा. उन्होंने कहा कि यह फैसला इसलिए लिया गया ताकि यात्रियों को बिना किसी अतिरिक्त बोझ के तेज कनेक्टिविटी का फायदा मिल सके. उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट का मकसद यात्रा के तनाव को कम करना और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है.
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