ब्रिटिश संसद में पहली बार बजा मुंबई के बच्चों की प्रतिभा का डंका, 100 ग्लोबल चाइल्ड प्रॉडिजी सम्मानित

इस आयोजन के एक अन्य मुख्य अतिथि नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर जॉर्ज स्मूट ने कहा कि ये बच्चे न सिर्फ होनहार हैं, बल्कि समाज के लिए उम्मीद की नई रोशनी भी हैं. इन्हें देखकर भविष्य वाकई उज्ज्वल नज़र आता है.

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ब्रिटिश संसद के इतिहास में पहली बार वह नज़ारा देखने को मिला जब सांसदों की गूंज की जगह बच्चों की काबिलियत का जश्न गूंज रहा था. लंदन स्थित हाउस ऑफ कॉमन्स में बुधवार को ग्लोबल चाइल्ड प्रॉडिजी अवॉर्ड्स 2025 का आयोजन हुआ, जिसमें दुनियाभर से चुने गए 100 असाधारण बच्चों को उनके अद्वितीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया. ये सभी बच्चे 15 साल से कम उम्र के हैं और विज्ञान, कला, संगीत, खेल, साहित्य, सामाजिक कार्य और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर चुके हैं. इन बच्चों का चयन 130 देशों से आए हजारों नामांकनों में से किया गया.

कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि ब्रिटिश सांसद गैरेथ बेकन ने कहा कि इन बच्चों की प्रतिभा इस बात की मिसाल है कि अगर युवा प्रतिभाओं को मंच और मार्गदर्शन मिले तो वे असंभव को संभव बना सकते हैं. यह आयोजन ब्रिटेन की लोकतांत्रिक परंपरा के लिए भी ऐतिहासिक पल है. इस समारोह के जरिए न सिर्फ बाल प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया, बल्कि ग्लोबल चाइल्ड प्रॉडिजी बुक 2025 का भी विमोचन किया गया, जिसमें इन 100 बच्चों की प्रेरणादायक कहानियों को संकलित किया गया है. यह किताब अब दुनियाभर के स्कूलों, पुस्तकालयों और शिक्षण संस्थानों तक पहुंचेगी ताकि यह अगली पीढ़ी को प्रेरित कर सके.

इस साल के अवॉर्ड सेरेमनी में जो नाम खासतौर पर चर्चा में रहे, उनमें शामिल हैं:

रवि अडेलकन (UK): म्यूज़िक के ज़रिए कैंसर के खिलाफ जागरूकता फैलाने वाले ‘रवि' को ‘चाइल्ड ऑफ करेज' भी कहा जाता है.

ज़ैन अली सलमान (UAE): अपनी शानदार फुटबॉल प्रतिभा से दुनियाभर को प्रभावित कर चुके हैं.

ओरियन मोनाको जीन (USA): 'रेस टू काइंडनेस' के ज़रिए लाखों लोगों को जोड़ने वाले सेवा योद्धा.

जॉन क्रिश्चियन कैल्डेरा (स्पेन): महज 5 महीने की उम्र से पेंटिंग करने वाले गिनीज रिकॉर्डधारी.

कार्यक्रम की एक खास पेशकश थी “The Water Project”, जिसे पेश किया थ्रेलक्ष्या ने — यह जल संरक्षण को लेकर एक वैश्विक मुहिम की शुरुआत है, जिसमें बच्चों की पर्यावरण के प्रति जागरूकता को केंद्र में रखा गया.

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इस आयोजन के एक अन्य मुख्य अतिथि नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर जॉर्ज स्मूट ने कहा कि ये बच्चे न सिर्फ होनहार हैं, बल्कि समाज के लिए उम्मीद की नई रोशनी भी हैं. इन्हें देखकर भविष्य वाकई उज्ज्वल नज़र आता है.

ग्लोबल चाइल्ड प्रॉडिजी अवॉर्ड्स की शुरुआत 2020 में भारतीय उद्यमी प्रशांत पांडे ने की थी. अब यह मंच दुनिया का एकमात्र ऐसा मंच बन गया है, जो विशेष रूप से 15 साल से कम उम्र की असाधारण प्रतिभाओं को पहचान और प्रोत्साहन देने के लिए समर्पित है. इससे पहले ये अवॉर्ड्स दिल्ली और दुबई में आयोजित किए जा चुके हैं. इस वर्ष के आयोजन को चार्ल्स ग्रुप, हिंदुस्तान ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स, सुपरटैल और पाशम फोटोग्राफी ने प्रायोजित किया. अंत में ग्लोबल चाइल्ड प्रॉडिजी अवॉर्ड्स के संस्थापक प्रशांत पांडे ने कहा कि हर बच्चा अपने आप में एक क्रांति है, बस उन्हें सही मंच और समर्थन की ज़रूरत है। यह अवॉर्ड सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है – दुनिया को बेहतर बनाने की. हाउस ऑफ कॉमन्स की ऐतिहासिक दीवारों के बीच जब ये 100 बच्चे एक साथ फोटो के लिए इकट्ठा हुए, तो वह पल एक बात साफ कर गया। भविष्य अब सिर्फ आने वाला नहीं है, वह यहां है, और इन बच्चों के हाथों में है.

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