- दिल्ली के मुकरबा चौक पर बन रहे अंडरपास का लगभग नब्बे प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और जल्द खोला जाएगा
- इस अंडरपास में दोपहिया, चार पहिया वाहन और पैदल यात्रियों के लिए तीन अलग सुरंगें बनाई गई हैं
- अंडरपास निर्माण में आधुनिक जैक पुशिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है
राजधानी दिल्ली के मुकरबा चौक पर बन रहा अंडरपास जल्द ही आम जनता के लिए खुल जाएगा. अंडरपास का 98 फीसदी काम पूरा हो गया है. इसी महीने के आखिर तक अंडरपास खोला जा सकता है. अंडरपास में दोपहिया वाहनों, चार पहिया वाहनों और पैदल यात्रियों के लिए अलग-अलग तीन सुरंगें बनाई गई हैं. यह अंडरपास प्रोजेक्ट इंजीनियरिंग का एक बेहतरीन उदाहरण है. इसे बनाने के लिए ट्रैफिक को रोका नहीं गया, न ही बहुत ज्यादा खुदाई हुई. आइए बताते हैं उस तकनीक के बारे में जिससे यह खास अंडरपास तैयार किया गया है.
क्या है वो खास जैक पुशिंग तकनीक?
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत ही इसकी निर्माण तकनीक है. इसमें लिए जैक पुशिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. यह आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक है जिसमें सड़क की ऊपरी सतह को खोदे बिना या ट्रैफिक रोके बिना जमीन के नीचे रास्ता बनाया जाता है. इसके लिए पहले कंक्रीट के बड़े बॉक्स यानी आरसीसी बॉक्स पहले ही बाहर तैयार किए जाते हैं. इसके बाद पावरफुल हाइड्रोलिक जैक की मदद से उन्हें धीरे-धीरे जमीन के अंदर धकेला जाता है. इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह रहा कि ऊपर आउटर रिंग रोड पर ट्रैफिक की आवाजाही को रोके बिना या सड़क खोदे बिना जमीन के नीचे टनल तैयार कर ली गई.
तीन अलग-अलग सुरंगें बनीं
मुकरबा चौक अंडरपास में वाहनों की सुरक्षित आवाजाही के लिए तीन अलग-अलग टनल बनाई गई हैं. चार पहिया वाहनों के लिए 9.6 मीटर चौड़ी और 6 मीटर ऊंची सुरंग बनाई गई है. इसके अलावा दोपहिया वाहनों और पैदल यात्रियों के लिए दो अलग सुरंग बनाई गई हैं.
किन-किन लोगों को होगा फायदा?
इस अंडरपास के शुरू होने के बाद उत्तरी दिल्ली आने-जाने वाले लोगों को बड़ा फायदा होगा. इससे बादली, रोहिणी, आजादपुर और जहांगीरपुरी के बीच सीधी कनेक्टिविटी होगी. जिससे वाहनों को मुकरबा चौक के भारी भीड़भाड़ वाले इंटरचेंज से होकर गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी. फिलहाल इन इलाकों के बीच जाने के लिए मुकरबा चौक फ्लाईओवर का 1.5 किलोमीटर लंबा चक्कर लगाना पड़ता है, जो अब खत्म हो जाएगा. रोजाना करीब 15,800 वाहनों को इसका लाभ मिलेगा, जिससे यात्रा का समय 10 मिनट तक कम होगा और सालाना 58,000 लीटर ईंधन की बचत होगी.
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