- इज़रायल और ईरान के युद्ध के कारण मोरबी सिरेमिक इंडस्ट्री में प्रोपेन और नैचुरल गैस की कमी हो गई है
- गैस की कमी से मोरबी सिरेमिक इंडस्ट्री बंद होने को है, जिससे दस लाख से अधिक मजदूर प्रभावित हुए हैं
- इंडस्ट्री बंद होने से मजदूर अपने परिवार के साथ अपने गृह नगर लौटने को मजबूर हो गए हैं
"किराये पर रह रहे हैं. यहां पर 4-5 साल हो गए. अचानक इंडस्ट्री बंद हो रही है तो हमारा उद्योग खत्म हो रहा है. क्या सोचें और क्या करें, कुछ समझ नहीं आ रहा है. आगे क्या करना है ये भी मालूम नहीं..." ये दर्द है मोरबी सिरेमिक इंडस्ट्री में काम करने वाले उन मजदूरों का, जिन पर बेरोजगारी की तलवार लटक रही है. इज़रायल और ईरान के बीच चल रही जंग की वजह से मोरबी सिरेमिक इंडस्ट्री पर सीधा असर पड़ रहा है. मोरबी सिरेमिक इंडस्ट्री ज़रूरी गैस पर आधारित है और अभी मोरबी सिरेमिक इंडस्ट्री में प्रोपेन गैस और नैचुरल गैस की कमी है. प्रोपेन गैस खत्म हो गई है और नैचुरल गैस अब बहुत कम मात्रा में दिख रही है, जिसके खत्म होने पर ऐसी स्थिति बन जाती है कि सभी इंडस्ट्रीज़ को बंद करना पड़ता है.
मोरबी सिरेमिक इंडस्ट्रीज़ के बंद होने से दस लाख से ज़्यादा मज़दूरों की रोज़ी-रोटी छिन जाएगी, जिनमें से 4 लाख मज़दूर सीधे तौर पर इंडस्ट्रीज़ से जुड़े हैं और 6 लाख मज़दूर इनडायरेक्टली सिरेमिक इंडस्ट्री से जुड़े हैं. अब पता नहीं कि जंग कब तक चलेगी, जिसकी वजह से अभी जो हालात दिख रहे हैं, उनमें मज़दूरों को अपने घर लौटना पड़ेगा.
सिरेमिक एक्सपोर्ट पर भी सीधा असर
जंग की वजह से सिरेमिक एक्सपोर्ट पर भी सीधा असर पड़ेगा. अभी मोरबी सिरेमिक में 30% टाइल्स का एक्सपोर्ट मार्केट है, जिसमें बाइडो कोई नहीं खरीदेगा, जिसकी वजह से वेट एंड वॉच की सिचुएशन बनेगी. अभी कंटेनर किराए में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है. अभी कंटेनर किराए में $2000 की बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिसकी वजह से पोर्ट पर लोड होने वाले कंटेनर और पोर्ट पर पहुंचने वाले कंटेनर पर सीधा असर पड़ेगा. जंग की वजह से जैसे केंद्र सरकार ने तय किया है कि रूस से कच्चा तेल इंपोर्ट किया जाएगा, वैसे ही अगर जोगास भी रूस से इंपोर्ट हो जाए, तो आने वाले समय में इंडस्ट्रीज़ को राहत मिल सकती है.
मजदूर घर लौटने को मजबूर
गैस की कमी के बीच मोरबी सिरेमिक इंडस्ट्री बंद हो रही है, जिसका सीधा असर मज़दूर वर्ग पर पड़ रहा है. मोरबी सिरेमिक इंडस्ट्री में सालों से काम कर रहे वर्कर अब अपने परिवार के साथ अपने होमटाउन जाने को मजबूर हैं. जो वर्कर सालों से सिरेमिक इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं और अपना गुज़ारा कर रहे हैं, वे भी परेशान हैं. अपने परिवार का पेट कैसे पालेंगे, यह सबसे बड़ा सवाल है.
मोरबी सिरेमिक इंडस्ट्री हुई बंद
असल में, मोरबी सिरेमिक इंडस्ट्री में गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, झारखंड, यूपी, बिहार समेत कई राज्यों के वर्कर सालों से सिरेमिक फैक्ट्रियों में काम करके अपना गुज़ारा कर रहे हैं. लेकिन जिस तरह से इज़रायल और ईरान के बीच युद्ध हुआ है, उससे मोरबी सिरेमिक इंडस्ट्री बंद हो गई है, जिसका मज़दूर वर्ग पर बड़ा असर पड़ रहा है. अब इंडस्ट्री बंद होने से वर्कर भी अपने होमटाउन जाने को मजबूर हो गए हैं. मोरबी सिरेमिक इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं और अपने परिवार का पेट कैसे पालेंगे, यह सबसे बड़ा सवाल है.
5 से 10 दिनों में और यूनिट भी हो सकती हैं बंद
अगर यह जंग लंबे समय तक चली तो इसका असर मोरबी समेत पूरे भारत में देखने को मिल सकता है. यह देखा जा रहा है कि कई लोग बेरोजगार हो सकते हैं. अभी मोरबी में 100 से ज़्यादा सिरेमिक इंडस्ट्री बंद हो चुकी हैं, लेकिन अगले पांच से दस दिनों में और भी यूनिट बंद हो सकती हैं. अब देखना यह है कि केंद्र सरकार आने वाले दिनों में गैस शॉर्ट-सर्किट दूर करती है या मोरबी समेत कई इलाकों में गैस से चलने वाली इंडस्ट्री बंद होने को मजबूर होंगी, यह तो वक्त ही बताएगा.














