फर्जी आईडी पर भारतीय सिम विदेश भेजने वाले गिरोह के सदस्य को नोएडा STF ने किया गिरफ्तार

एसटीएफ नोएडा यूनिट के अपर पुलिस अधीक्षक राजकुमार मिश्रा ने बताया कि 4 मार्च 2024 को गौतमबुद्धनगर पुलिस द्वारा नेपाल के अनिल थापा एवं चीनी नागरिक शू योमिंग तथा गौतमबुद्ध नगर के गांव कटहैरा के विनोद उर्फ अगस्तया भाटी को गिरफ्तार किया गया था.

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इस सिम की मदद से विदेश में बैठे ठग ठगी की वारदातों को अंजाम देते हैं.
नोएडा:

एसटीएफ नोएडा की टीम ने फर्जी आईडी पर सिम एक्टिवेट कर थाईलैंड, नेपाल और कंबोडिया में सप्लाई करने वाले गिरोह के एक नेपाली नगरिक सुनील खडका को नोएडा के क्राउन प्लाजा होटल से गिरफ्तार किया है. इसके पास से फर्जी आईडी पर एक्टिवेट किए गए 33 सिम, दो नेपाली पासपोर्ट, दो मोबाइल फोन, एक मैकबुक, आधार कार्ड, पेन कार्ड, चेकबुक आदि बरामद हुआ है. इस सिम की मदद से विदेश में बैठे ठग ठगी की वारदातों को अंजाम देते हैं.

एसटीएफ नोएडा यूनिट के अपर पुलिस अधीक्षक राजकुमार मिश्रा ने बताया कि 4 मार्च 2024 को गौतमबुद्धनगर पुलिस द्वारा नेपाल के अनिल थापा एवं चीनी नागरिक शू योमिंग तथा गौतमबुद्ध नगर के गांव कटहैरा के विनोद उर्फ अगस्तया भाटी को गिरफ्तार किया गया था. जिनके कब्जे से काफी संख्या में एक्टिवेट सिम बरामद हुए थे. इस संबंध में कोतवाली बिसरख में भी मुकदमा दर्ज है. इसी गिरोह का एक सदस्य सुनील खडका, जो कोतवाली बिसरख की एक घटना में आरोपितों के पकड़े जाने के बाद कोलकाता होते हुए थाईलैंड भाग गया था. 19 अप्रैल को दोबारा भारत आया है.

राजकुमार मिश्रा ने बताया कि सुनील खडका ने नेपाल से ही एमए एवं पीएचडी की पढ़ाई की है. वह वर्ष 2007 में व्यापार करने के लिए बैंकाक थाईलैंड चला गया था और वहीं पर रहने लगा. थाईलैंड में रहकर ही उसने क्रिप्टो करेंसी खरीदने, बेचने का काम करना शुरू कर दिया. फिर अपने नेपाली दोस्त के माध्यम से नेपाल के श्याम उर्फ घनश्याम अधिकारी के संपर्क में आया और साइबर अपराध में शामिल हो गया. 

सुनील खडका ने थाईलैंड में होटल बुकिंग करने के लिए वेबसाइट भी बनाई हुई थी जिसमें इसने टूडी गेटवे लगा रखा था. इसके साथी डार्कवेब से विभिन्न क्रेडिट कार्डों का डेटा चोरी करके इनकी वेबसाइट पर बुकिंग करते थे जिसमें कार्ड धारक के पास कोई ओटीपी भी नहीं जाता था, लेकिन उनके क्रेडिट कार्ड से पैसा थाईलैंड में ट्रांसफर हो जाता था. जिसे ये लोग आपस में बांट लेते थे. इसके अलावा अन्य प्रकार के साइबर फ्रॉड भी चीनी नागरिकों के साथ मिलकर कॉल सेंटर बनाकर करते थे. इस पैसे को यूएसडीटी एवं अन्य क्रिप्टो करेंसी में हवाला के माध्यम से सुनील विभिन्न सदस्यों को भेजता था.

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