मौनी अमावस्या पर प्रयागराज त्रिवेणी संगम का अलग ही है नजारा, जानिए स्नान मुहूर्त और महत्व

माघ मेला क्षेत्र में 10,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात हैं. भीड़ प्रबंधन एवं सुगम यातायात के मद्देनजर इस बार 42 अस्थायी पार्किंग हैं.

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  • माघ मास की मौनी अमावस्या पर श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और मौन व्रत करते हैं, यह पावन तिथि है
  • मौनी अमावस्या 18 जनवरी रात से शुरू होकर 19 जनवरी तक रहेगी और इस बार रविवार को पड़ने से महत्व बढ़ गया है
  • इस दिन त्रिवेणी संगम में स्नान को सर्वोत्तम माना जाता है, जहां लाखों श्रद्धालु आत्मिक शुद्धि के लिए आते हैं
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माघ मास की अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या भी कहते हैं. इस दिन श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और मौन व्रत धारण करते हैं. यह दिन ईश्वर के साथ-साथ पूर्वजों की आराधना के लिए भी बेहद खास माना जाता है. पंचांग के अनुसार आज मौनी अमावस्या है.

मौनी अमावस्या मुहूर्त

दृक पंचांग के अनुसार,अमावस्या 18 जनवरी को रात 1 बजकर 21 मिनट से शुरू होकर 19 जनवरी तक रहेगी. इस दिन रविवार होने से इसका महत्व और बढ़ जाता है. सूर्योदय 7 बजकर 15 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 49 मिनट पर होगा. पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र सुबह 10 बजकर 14 मिनट तक रहेगा, उसके बाद उत्तराषाढ़ा शुरू होगा. वहीं, हर्षण योग शाम 9 बजकर 11 मिनट तक और करण चतुष्पाद दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा. राहुकाल दोपहर 4 बजकर 29 मिनट से 5 बजकर 49 मिनट तक रहेगा. इस दौरान कोई शुभ या नया कार्य न करें.

मौनी अमावस्या महत्व

  1. धार्मिक मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन मौन रहकर साधना, पूजा और ध्यान करना विशेष फलदायी होता है. इस पावन तिथि पर देवता और पूर्वज धरती पर आते हैं. मौन व्रत रखकर किया गया स्नान, दान और पूजा पितरों को अत्यंत प्रसन्न करती है. इससे पितृदोष दूर होता है, पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-शांति, समृद्धि बनी रहती है. माघ मास की यह अमावस्या प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में स्नान के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है, जहां लाखों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं. यह दिन आत्मिक शुद्धि, पाप मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति का भी अवसर है.
  2. मौनी अमावस्या पर दान-पुण्य और पूजा-पाठ का विशेष महत्व है.इस दिन संभव हो सके तो नदी में स्नान करना चाहिए, यदि आपके घर के पास नदी नहीं है तो त्रिवेणी का ध्यान कर घर में स्नान करने से नदी में स्नान करने का फल मिलता है. मौन रहकर ध्यान और ईश्वर की आराधना करें. पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध करें और उन्हें काले तिल, कुश और जल से दक्षिण दिशा मुख करके अर्घ्य दें. पीपल के वृक्ष की पूजा और परिक्रमा का भी विशेष विधान है.

1.5 करोड़ लोगों ने डुबकी लगाई

  1. प्रयागराज में जारी माघ मेले में मौनी अमावस्या से एक दिन पूर्व शनिवार को शाम छह बजे तक करीब 1.5 करोड़ लोगों ने गंगा और संगम में डुबकी लगाई.
  2. इससे पूर्व, मकर संक्रांति स्नान पर्व पर 1.03 करोड़ स्नानार्थियों ने जबकि एकादशी पर लगभग 85 लाख लोगों ने गंगा और संगम में स्नान किया था.
  3. मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने बताया कि माघ मेला 800 हेक्टेयर क्षेत्र में सात सेक्टर में बसाया गया है. मेला क्षेत्र में 25,000 से अधिक शौचालय स्थापित किए गए हैं और 3500 से अधिक सफाईकर्मी तैनात हैं.
  4. सौम्या अग्रवाल ने बताया कि छोटी अवधि का कल्पवास करने के इच्छुक पर्यटकों के लिए माघ मेला में टेंट सिटी बसाई गई है, जहां ध्यान और योग आदि की सुविधाएं मौजूद हैं. श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए बाइक टैक्सी और गोल्फ कार्ट की सुविधा उपलब्ध कराई गई है.
  5. पुलिस अधीक्षक (माघ मेला) नीरज पांडेय ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम आवागमन के लिए पूरे मेला क्षेत्र में 10,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात हैं. भीड़ प्रबंधन एवं सुगम यातायात के मद्देनजर इस बार 42 अस्थायी पार्किंग हैं, जिनमें लगभग एक लाख से अधिक वाहन पार्क हो सकेंगे.
  6. माघ मेला 2025-26 में कुल 12,100 फुट लंबे घाटों का निर्माण किया गया है जिनमें सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं.

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