पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालियाचक में सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने की घटना को लेकर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ममता बनर्जी सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने इसे ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के शासन में सिस्टम के पूरी तरह टूटने का संकेत बताया है. धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि मालदा कोई अलग घटना नहीं है. सात न्यायिक अधिकारियों को नौ घंटे से ज्यादा समय तक बंधक बनाकर रखा गया. उन्हें खाना और पानी तक नहीं दिया गया, यह राज्य की सत्ता की पूरी विफलता को दर्शाता है.
मुर्शिदाबाद हिंसा समेत कई घटनाओं का किया जिक्र
उन्होंने आगे कहा, "मालदा-मुर्शिदाबाद में हिंसा, हिंदू परिवारों का पलायन और हरगोबिंदो व चंदन दास की बेरहमी से हत्या जैसी घटनाएं राज्य के नियंत्रण में काम करने वाली प्रशासनिक मशीनरी के तहत हुई हैं. जवाबदेही अनिवार्य है."
धर्मेंद्र प्रधान ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के सामने इसे राजनीतिक नहीं कहकर कमतर दिखाया गया, लेकिन कुछ घंटे बाद इसमें राजनीति से जोड़ा गया. यह साफ विरोधाभास है. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल अब टीएमसी के गुंडों द्वारा फैलाए जा रहे डर की राजनीति के अंत को देख रहा है.
सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग की कार्रवाई
घटना बुधवार (3 मार्च) को मालदा जिले के कालियाचक ब्लॉक कार्यालय में हुई थी. सात न्यायिक अधिकारियों (जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं) को बंधक बनाया गया. आरोप है कि जिन लोगों के नाम चुनावी सूची से 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' के तहत हटाए गए थे, उन्हीं लोगों ने यह घटना को अंजाम दिया. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई की और चुनाव आयोग को स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने का निर्देश दिया. चुनाव आयोग ने अब जांच के लिए एनआईए को पत्र लिख दिया है. उम्मीद है कि एनआईए की टीम शुक्रवार को मालदा पहुंचकर जांच शुरू करेगी.














