महाराष्ट्र में बीते दो महीनों में 3100 से अधिक होटल, रेस्टोरेंट, कैंटीन पर फुड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की छापेमारी हो चुकी है. छापेमारी की जद में कई बड़े और नामी होटल भी शामिल हैं. जहां-जहां नियमों का घोर उल्लंघन दिखा, वैसे होटल और रेस्टोरेंट के लाइसेंस भी हाथों-हाथ रद्द किए गए. महाराष्ट्र में मिलावटखोरी के खिलाफ शुरू हुए इस विशेष अभियान से होटल वालों में हड़कंप मचा है. और इस ताबड़तोड़ एक्शन के पीछे एक नाम है- तुकाराम मुढे. महाराष्ट्र के फुड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कमिश्नर तुकाराम मुंढे के FDA कमिश्नर बनने के बाद होटलों पर एक्शन की शुरुआत हुई.
लेकिन महाराष्ट्र के होटलों के खिलाफ जारी इस अभियान की शुरुआत एक बेहद मामूली घटना से हुई थी. इस घटना के बारे में शुक्रवार को महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने NDTV Profit को दिए इंटरव्यू में खुद बताया है.
FDA कमिश्नर बनते दोस्त ने दिया था डिनर का न्योता
तुकाराम मुंढे ने बताया कि FDA कमिश्नर का पद संभालने के कुछ ही समय बाद उनके एक दोस्त ने उन्हें रेस्टोरेंट में डिनर के लिए बुलाया. मुंढे ने पहले तो हिचकिचाहट दिखाई लेकिन बाद में दोस्त के बार-बार कहने पर वो मान गए. NDTV Profit को दिए इंटरव्यू में तुकाराम मुंढे ने बताया, "मेरी आदत है कि मैं जहां भी जाता हूं, वहां आस-पास की चीजों पर नजर रखता हूं."
रेस्टोरेंट में पनीर को देखते ही मुंढे ने उठाए थे सवाल
रेस्टोरेंट में मुंढे ने देखा कि वहां जरूरी फूड लाइसेंस साफ तौर पर नहीं लगाया गया था. उन्होंने रेस्टोरेंट से पीने के पानी के इंतजाम के बारे में भी सवाल किया. मामला तब और गंभीर हो गया जब उनके जैन दोस्त ने पनीर ऑर्डर किया. मुंढे ने याद करते हुए कहा, "मैंने कहा कि पनीर ऑर्डर मत करो. वह मेरी नजर में खरा नहीं उतरेगा."
डिश आते मुंढे ने पूछा- क्या यह असली पनीर है?
जब डिश आई, तो उन्होंने उसे देखा और वेटर से सवाल किया कि क्या यह असली पनीर है या कोई नकली प्रोडक्ट. मुंढे ने उस दिन की घटना का जिक्र करते हुए बताया, "मैंने फिर पूछा, क्या यह सच में असली पनीर है? जैसे ही यह आया, उन्होंने कहा, 'मुझे दो. मैंने बस इसे चेक किया. यह पक्का असली पनीर नहीं था."
रेस्टोरेंट मैनेजर से की शिकायत, 24 घंटे बाद भेजे अधिकारी
उन्होंने अपने दोस्त से इसे न खाने को कहा और रेस्टोरेंट मैनेजमेंट को कई नियमों के उल्लंघन के बारे में बताया. मुंढे ने कहा कि उन्होंने तुरंत सजा देने का आदेश नहीं दिया, बल्कि रेस्टोरेंट को नियमों का पालन न करने वाली कमियों को ठीक करने के लिए 24 घंटे का समय दिया.
इसी रेस्टोरेंट से हुई छापेमारी की शुरुआत
उन्होंने कहा, "24 घंटे बाद मैंने अपने अधिकारियों को जाकर जांच करने के लिए कहा. तो उनके पास नियमों का पालन करने के लिए पूरे 24 घंटे थे. और जाहिर है, जांच हुई और बाकी सब इतिहास है." इसके बाद तो महाराष्ट्र में होटल और रेस्टोरेंट के खिलाफ छापेमारी की अभियान की शुरुआत ही हो गई.
लाइसेंस सस्पेंड करने का फूड सेफ्टी की धारा 32 में प्रावधान
रेस्टोरेंट के खिलाफ FDA की सख्त कार्रवाई को लेकर मुंढे की आलोचना हुई है, जिसमें यह सवाल भी शामिल है कि क्या तुरंत लाइसेंस सस्पेंड करना सही है. इस सवार पर मुंढे ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 की धारा 32 का जिक्र किया, जो एक तय अधिकारी को तुरंत लाइसेंस सस्पेंड करने की इजाजत देती है, अगर खाना सेहत के लिए खतरा पैदा कर सकता है.
3100 जांच में 165 लाइसेंस सस्पेंड किए गए
उन्होंने कहा कि पिछले दो महीनों में 3,100 से ज्यादा जांच की गईं, जिनमें लगभग 165 लाइसेंस सस्पेंड किए गए और 750 से ज़्यादा रेस्टोरेंट को सुधार के लिए नोटिस दिए गए. फिर इस आंकड़े पर मुंढे ने कहा, "अगर यह सही अनुपात में नहीं लगता, तो मुझे नहीं पता कि अनुपात की परिभाषा क्या होगी."
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