लद्दाख हिंसा: न्यायिक जांच और हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई तक केंद्र से वार्ता नहीं होगी, जानें किसने कहा

लेह हिंसा के बाद प्रशासन ने इस घटना की जांच का आदेश दिया है. उधर लेह की सर्वोच्च संस्था ने कहा कि इस जांच को ही ठुकरा दिया है.

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लद्दाख हिंसा
लेह:

लेह में 24 सितंबर को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई फायरिंग में चार नागरिकों की मौत के मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश लद्दाख प्रशासन ने दिए हैं. इसके लिए एसडीएम नुबरा मुकुल बेनीवाल को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। उन्हें चार हफ्तों में रिपोर्ट सौंपनी होगी.

हालांकि, लेह की सर्वोच्च बॉडी (LAB) ने मजिस्ट्रेट जांच को ठुकरा दिया है और जवाबदेही तय करने के लिए न्यायिक जांच की मांग की है। LAB ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक न्यायिक जांच का आदेश नहीं दिया जाता और हिरासत में लिए गए लोगों, जिनमें सोनम वांगचुक भी शामिल हैं, को रिहा नहीं किया जाता, तब तक केंद्र से कोई वार्ता नहीं होगी.

इस बीच, लेह की अदालत ने हिंसा के मामले में गिरफ्तार 26 लोगों को अंतरिम जमानत दे दी है। अगली सुनवाई 4 अक्टूबर को होगी. अदालत ने कहा है कि मुकदमे की कार्यवाही अभी जारी रहेगी. वहीं, कई अन्य लोग अब भी जेल में हैं और पुलिस कई आरोपियों की तलाश कर रही है.

लेह में नौवें दिन भी मोबाइल इंटरनेट बंद है. इससे स्थानीय लोगों और व्यापारियों की दिक्कतें बढ़ गई हैं. पुलिस सूत्रों के अनुसार, हिंसा में शामिल कई नाम सामने आए हैं और सुरक्षा एजेंसियां आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही हैं.

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