सोशल मीडिया के इस दौर में वीडियो बनाने की कलाकारी एक शगल जैसा बन गया है. वीडियो बनाओ, सोशल मीडिया पर पोस्ट करो, उसके वायरल होने का इंतजार करो, वायरल हो गई तो इंसान रातों-रात स्टार बन जाता है. यदि वीडियो वायरल नहीं हुआ तो कुछ और सोचो, फिर उसपर वीडियो बनाओ. लेकिन रीलबाजों की ये सनक कितनी खतरनाक है, इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि एक वायरल वीडियो ने किसी को इतना मजबूर किया उसने सुसाइड कर लिया. सोशल मीडिया पर केरल का एक वीडियो वायरल हो रहा है. यात्रियों से भरी बस के इस वीडियो में एक महिला सेल्फी वीडियो रिकॉर्ड कर रही है.
महिला ने गलत तरीके से छूने का लगाया आरोप
महिला के बगल में एक शख्स खड़ा है. महज 26 सेकेंड के इस वीडियो में एक जगह पर पुरुष का हाथ महिला के शरीर से टच कर जाता है. जिसके बाद यह मामला महिला को गलत तरीके से छूने से बन गया. फिर यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, वीडियो में दिख रहे शख्स को लोगों ने जमकर गालियां दी. अंत में वो शख्स इस कदर टूटा कि उनसे खुदकुशी कर ली.
केरल के कोझीकोड का मामला
दिल दहलाने वाला यह मामला केरल के कोझीकोड से सामने आया है. जहां 16 जनवरी को मनोवैज्ञानिक शिमजिथा मुस्तफा ने एक खचाखच भरी बस से 26 सेकंड का एक सेल्फी वीडियो पोस्ट किया. वीडियो में उन्होंने 41 वर्षीय दीपक यू पर आरोप लगाया कि बस के झटकों के बीच उसने जानबूझकर उन्हें गलत तरीके से छुआ.
सोशल मीडिया ट्रायल पर बहस छेड़ गया यह मामला
दीपक की खुदकुशी के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर बहस का कारण बन चुकी है. यह घटना सोशल मीडिया ट्रायल, डिजिटल जिम्मेदारी और बिना जांच आरोप लगाने के खतरों पर नई बहस छेड़ रही है. कई लोग कह रहे हैं – "एक वीडियो ने जिंदगी छीन ली!" वीडियो बनाने वाली महिला इंफ्लुएंसर बताई जा रही है.
परिजनों ने कहा- आरोप झूठे, सोशल मीडिया ट्रायल से टूट गया था दीपक
वीडियो में उसके लगाए आरोपों से दीपक ने इनकार किया. लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो के बाद दीपक को इस कदर ट्रोल किया गया कि उसने 18 जनवरी को घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि आरोप झूठे थे, और सोशल मीडिया ट्रायल ने उन्हें तोड़ दिया. पुलिस ने अनैसर्गिक मौत का केस दर्ज किया है, जांच जारी है.














