Odisha Skeleton Bank Case: ओडिशा के केंझर जिले से सामने आई यह घटना न सिर्फ चौंकाने वाली है, बल्कि सरकारी तंत्र और बैंकिंग सिस्टम की संवेदनहीनता को भी उजागर करती है. अपनी मृत बहन के खाते से पैसा निकालने के लिए एक आदिवासी युवक को उसकी कब्र से कंकाल निकालकर बैंक लाना पड़ा. अब इस मामले में उत्तरी रेंज के RDC संग्राम केशरी महापात्र की प्रारंभिक जांच सामने आई है, जिसमें बैंक स्टाफ को इस शर्मनाक स्थिति का जिम्मेदार ठहराया गया है.
क्या है पूरा मामला?
यह घटना केंझर जिले के पटना थाना क्षेत्र स्थित दियानाली गांव की है. यहां रहने वाले 42 वर्षीय जीतू मुंडा 27 अप्रैल को ओडिशा ग्रामीण बैंक की मल्लिपाशी शाखा पहुंचे थे. वे अपनी बहन कलारा मुंडा के बैंक खाते से पैसे निकालना चाहते थे. कलारा की फरवरी महीने में मौत हो चुकी थी और उनका कोई कानूनी वारिस नहीं था.
बैंक अधिकारियों ने जीतू मुंडा से डेथ सर्टिफिकेट और लीगल हेयर सर्टिफिकेट की मांग की. दस्तावेज न होने के कारण बैंक ने पैसे देने से इनकार कर दिया. जीतू का कहना है कि वह इस बारे में पहले भी कई बार बैंक आ चुका था, लेकिन हर बार उसे टाल दिया गया.
CCTV जांच में क्या सामने आया?
RDC संग्राम केशरी महापात्र की जांच में बैंक का CCTV फुटेज भी खंगाला गया. फुटेज के अनुसार, जीतू मुंडा सुबह 11:26 बजे बैंक में दाखिल हुआ और 11:58 बजे बाहर निकला. इस दौरान उसने बैंक कर्मचारियों से चार बार बात की. RDC ने बताया कि आखिर में बैंक मैनेजर ने उसे बाहर जाने के लिए कह दिया. हालांकि CCTV में ऑडियो नहीं है, इसलिए बातचीत की पूरी जानकारी सामने नहीं आ पाई. लेकिन जांच में यह भी सामने आया कि बैंक स्टाफ जीतू और उसकी बहन कलारा को पहले से जानता था.
8 बार बैंक गया, फिर भी नहीं मिला पैसा
RDC ने कहा कि जीतू मुंडा और उसकी बहन इससे पहले भी कम से कम आठ बार बैंक से लेनदेन कर चुके थे. यानी बैंकिंग प्रक्रिया से जीतू पूरी तरह अनजान नहीं था. इसके बावजूद उसे लगातार बैंक से लौटाया जाता रहा.
गुस्से और बेबसी में उठाया खौफनाक कदम
बार‑बार बैंक से निराश होकर लौटने के बाद जीतू मुंडा ने ऐसा कदम उठा लिया, जिसने सभी को झकझोर दिया. अपनी बहन की मौत साबित करने के लिए उसने कब्र खोदकर उनके कंकाल के अवशेष निकाले और उन्हें लेकर बैंक परिसर पहुंच गया. उसका मकसद सिर्फ यह दिखाना था कि उसकी बहन अब इस दुनिया में नहीं है.
RDC ने बताया घटना को ‘अत्यंत शर्मनाक'
RDC संग्राम केशरी महापात्र ने इस पूरे घटनाक्रम को ‘अत्यंत शर्मनाक' करार दिया. उन्होंने सवाल उठाया कि फरवरी में मौत के बावजूद कलारा मुंडा का डेथ सर्टिफिकेट आखिर क्यों नहीं बनाया गया. साथ ही उन्होंने माना कि बैंक अधिकारियों की लापरवाही ने जीतू को इस हद तक मजबूर कर दिया.
RDC ने साफ कहा है कि जांच में जिन भी अधिकारियों या कर्मचारियों की लापरवाही सामने आएगी, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. यह मामला अब सिर्फ एक व्यक्ति की बेबसी नहीं, बल्कि बैंकिंग सिस्टम और ग्रामीण इलाकों में प्रशासनिक प्रक्रियाओं की गंभीर खामियों को दिखाता है.














