- कटनी सिंगरौली के बीच बनने वाला एक्सप्रेसवे यूपी, छत्तीसगढ़ राज्यों को एमपी से कनेक्ट करेगा.
- यह एक्सप्रेसवे एमपी की प्रयागराज, बनारस, सोनभद्र, मिर्जापुर जैसे शहरों से दूरी घटाएगा.
- इसके अलावा कटनी सिंगरौली की कनेक्टिविटी छत्तीसगढ़ से भी और मजबूत हो जाएगी.
कटनी-सिंगरौली एक्सप्रेसवे मध्य प्रदेश का अहम रोड प्रोजेक्ट है. जिसे उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ आयोजन को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है. इस हाईवे के निर्माण से प्रयागराज, वाराणसी जैसे शहरों की कनेक्टिविटी मध्य प्रदेश से और ज्यादा हो जाएगी. जबकि छत्तीसगढ़ से भी दूरी और पास हो जाएगी. 232 किलोमीटर के इस हाईस्पीड एक्सप्रेसवे की DPR मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) की तरफ से तैयार की जा रही है. इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद सिंगरौली की दूरी सीधी, रीवा, कटनी, भोपाल और उज्जैन से काफी ज्यादा घट जाएगी. जबकि कटनी से सिंगरौली के बीच की दूरी भी घटकर 3.30 घंटे के बीच सिमट जाएगी.
MP की उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ से बढ़ेगी कनेक्टिविटी
- कटनी-सिंगरौली एक्सप्रेसवे महाकौशल के प्रवेश द्वार कटनी और सिंगरौली जो उत्तर प्रदेश की सीमा से सटा है, दोनों शहरों को जोड़ेगा. साथ ही यह रीवा, सीधी, दमोह और राजधानी भोपाल को भी हाई-स्पीड लिंक देगा.
- सिंगरौली की सीमा उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले से लगती है. यह एक्सप्रेसवे मध्य प्रदेश से उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर सोनभद्र, मिर्जापुर, प्रयागराज और वाराणसी के लिए व्यापारिक ट्रैफिक को बेहद आसान बना देगा.
- सिंगरौली और सीधी के रास्ते यह कॉरिडोर छत्तीसगढ़ के उत्तरी जिलों और झारखंड के कोयला बेल्ट जिसमें धनबाद, रांची रूट को जोड़ने वाले भारी माल वाहनों के लिए एक सुगम इंडस्ट्रियल लॉजिस्टिक्स हब का काम करेगा.
कटनी-सिंगरौली की दूरी होगी कम
कटनी और सिंगरौली के बीच की दूरी फिलहाल 299 किलोमीटर की है, दोनों शहरों के सफर में फिलहाल 6.15 घंटे का समय लगता है, लेकिन इस एक्सप्रेसवे के निर्माण के बाद दोनों शहरों के बीच की दूरी घटकर 232 किलोमीटर के बीच आ जाएगी, यानी कटनी और सिंगरौली के बीच 67 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी. यात्रा का समय भी 3.30 घंटे तक का जाएगा. दोनों शहरों के बीच यात्रा में करीब 2.45 घंटे की बचत हो जाएगी.
वाराणसी-शक्तिनगर हाईवे से कनेक्टिविटी
कटनी-सिंगरौली एक्सप्रेसवे सीधे वाराणसी-शक्तिनगर हाईवे से कनेक्ट करेगा. बता दें कि सिंगरौली से उत्तर प्रदेश के वाराणसी को जोड़ने वाला वाराणसी-शक्तिनगर फोरलेन हाईवे पहले से ही चालू है. कटनी-सिंगरौली एक्सप्रेसवे सीधे इस रूट को फीड करेगा. इसका मतलब है कि कटनी या भोपाल से चलने वाला कोई भी वाहन इस एक्सप्रेसवे से होते हुए बिना किसी ट्रैफिक जाम के सीधे वाराणसी बनारस और मिर्जापुर के हाईवे नेटवर्क पर पहुंच जाएगा. ऐसे में दोनों राज्यों के बीच न केवल कनेक्टिविटी मजबूत होगी बल्कि समय की भी बचत होगी. इसके अलावा मध्य प्रदेश के धार्मिक स्थल मैहर शारदा देवी मंदिर और जबलपुर के भेड़ाघाट की दूरी भी यूपी के प्रमुख धार्मिक केंद्रों बनारस और प्रयागराज से जुड़ जाएंगे.
छत्तीसगढ़ से कनेक्टिविटी
कटनी सिंगरौली एक्सप्रेसवे छत्तीसगढ़ तक भी कनेक्टिविटी को बढ़ाएगा. दरअसल, यह हाईवे अंबिकापुर और मनेंद्रगढ़ तक कनेक्ट करेगा. छत्तीसगढ़ के ये प्रमुख उत्तरी शहर सिंगरौली और सीधी के रास्ते इस एक्सप्रेसवे से सीधे लिंक हो जाएंगे. इसके अलावा रायपुर और बिलासपुर से कटनी, जबलपुर और भोपाल आने-जाने वाले वाहनों को विंध्य क्षेत्र में एक हाई-स्पीड बाईपास रूट मिल जाएगा.
हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल पर बन रहा एक्सप्रेसवे
यह एक्सप्रेसवे हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल पर तैयार किया जा रहा है. यानि इसमें सरकार और निजी कंपनी के बीच अनुबंध रहता है. जिसमें 40 प्रतिशत हिस्सा सरकार की तरफ से खर्च किया जाता है, जबकि 60 प्रतिशत हिस्सा निजी कंपनी की तरफ से निवेश होता है. का भुगतान सरकार पांच किस्तों में बाद में निजी कंपनी कर देती है. सरकार निजी कंपनी की तरफ से लगाए पैसे को ब्याज समेत 15 से 20 साल के अंदर देती है. वहीं जब सड़क तैयार हो जाती है तो इसका टोल सरकार की तरफ से ही वसूला जाता है.
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