कर्नाटक सरकार ने शराब पर टैक्स व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए नई ड्राफ्ट आबकारी नीति (Draft Liquor Policy) को अधिसूचित किया है. इस नई नीति के तहत शराब पर टैक्स अब अल्कोहल की मात्रा (Strength), उत्पाद की श्रेणी और घोषित बाजार मूल्य के आधार पर तय होगा. साफ शब्दों में सरकार का संदेश है. शराब जितनी ज्यादा स्ट्रॉन्ग और महंगी होगी, टैक्स उतना ही ज्यादा देना होगा.
नई नीति में सबसे ज्यादा खपत वाली श्रेणियों इंडियन मेड लिकर (IML) और बीयर पर टैक्स का बोझ बढ़ाया गया है. वहीं, डिफेंस सप्लाई और निर्यात (Export) के लिए बनी शराब को तुलनात्मक रूप से राहत दी गई है.
IML और बीयर पर नया टैक्स ढांचा
अधिसूचित ढांचे के मुताबिक, 42.8 प्रतिशत अल्कोहल वाली इंडियन मेड लिकर (IML) पर सिविल और डिफेंस, दोनों सेगमेंट में ₹50 प्रति बल्क लीटर एक्साइज ड्यूटी लगेगी. वहीं बीयर पर अब टैक्स सीधे अल्कोहल कंटेंट से जुड़ा होगा.
- 5% तक अल्कोहल वाली बीयर: ₹12 प्रति बल्क लीटर
- 5% से अधिक और 8% तक अल्कोहल वाली बीयर: ₹20 प्रति बल्क लीटर
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कीमत के हिसाब से अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी
नई नीति में शेड्यूल‑D के तहत Additional Excise Duty (AED) और Additional Countervailing Duty (ACD) को भी शराब की कीमत से जोड़ा गया है. सिविल और इंपोर्टेड IML पर यह ड्यूटी ₹297 प्रति बल्क लीटर से शुरू होकर ₹20,001 से अधिक कीमत वाली शराब पर ₹3,000 प्रति बल्क लीटर तक जा सकती है.
महंगी बीयर पर भारी टैक्स
बीयर के मामले में कीमत के आधार पर टैक्स बेहद सख्त किया गया है. ₹300 या उससे अधिक कीमत वाली बोतलबंद बीयर पर सिविल कैटेगरी में 200% तक AED/ACD लगेगा. ड्राफ्ट या बल्क बीयर, यदि ₹40 या उससे ऊपर की है, तो उस पर घोषित कीमत का 185% या ₹120 प्रति बल्क लीटर (जो ज्यादा हो) टैक्स लगेगा.
कुछ श्रेणियों को राहत
नई नीति में फल‑वाइन, फोर्टिफाइड वाइन और कम‑अल्कोहल पेय को रियायती दरों पर रखा गया है. वहीं, इंपोर्टेड फॉरेन लिकर को सामान्य एक्साइज ड्यूटी से छूट दी गई है, लेकिन उस पर Additional Countervailing Duty (ACVD) लगेगी, जो घरेलू शराब पर लागू AED दरों के अनुरूप होगी.
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लाइसेंस और फीस में भी सख्ती
टैक्स व्यवस्था के साथ‑साथ सरकार ने लाइसेंसिंग नियमों में भी बदलाव किया है. इसमें लाइसेंस ट्रांसफर चार्ज, 15% अतिरिक्त लाइसेंस फीस, स्थायी लेबल अप्रूवल फीस शामिल हैं. इन शुल्कों की दरें इस बात पर निर्भर करेंगी कि उत्पाद कर्नाटक के भीतर, राज्य से बाहर, या अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए बेचा जा रहा है.
सरकार का तर्क
सरकार का कहना है कि इस नई नीति से राज्य का राजस्व बढ़ेगा, शराब की अधिक खपत पर नियंत्रण लगेगा और टैक्स सिस्टम ज्यादा तर्कसंगत और पारदर्शी बनेगा. हालांकि, शराब उद्योग के लिए साफ संकेत है कि अब प्रीमियम और हाई‑स्ट्रेंथ शराब महंगी होगी, जबकि हल्की और कम कीमत वाली शराब को बढ़त मिलेगी.














