"गधों की गिनती तो फिर जातियों की क्यों नहीं?"- जातिगत जनगणना के विवाद में जीतन राम मांझी की एंट्री

मांझी ने कहा, " 'कुछ' लोगों को डर है कि अगर जातियों की गिनती हो गई तो दुनिया को पता लग जाएगा कि हमारे यहां किन लोगों ने किनकी हकमारी कर देश का विकास रोक रखा है."

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बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांंझी (फाइल फोटो)
पटना:

बिहार में जातीय जनगणना (Caste Based Census) कराने को लेकर जारी विवाद में राज्य के पूर्व सीएम जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) भी कूद पड़े हैं. उन्होंने मंगलवार को ट्वीट कर पूरे मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी है. हम नेता ने विपक्ष की सुर से सुर मिलाते हुए सरकार से सवाल किए हैं. साथ उनपर पिछड़ी जातियों की हकमारी का आरोप लगाया है. उन्होंने एक अखबार में छपी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि जाति आधारित मुल्क में गधों की गिनती हो सकती है पर जातियों की गिनती नहीं हो सकती?

मांझी ने अपने ट्वीट में लिखा कि “कुछ” लोगों को डर है कि अगर जातियों की गिनती हो गई तो दुनिया को पता लग जाएगा कि हमारे यहां किन लोगों ने किनकी हकमारी कर देश का विकास रोक रखा है. “सब बढ़ेगें तो देश बढ़ेगा”.

गौरतलब है कि बिहार की सियासी गलियारों में लंबे समय से जातीय जनगणना कराने के मुद्दे पर विवाद जारी है. केंद्र की ओर से प्रस्ताव नामंजूर होने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने राज्य में अपने खर्च से कास्ट बेस्ड सेंसस कराने की घोषणा की थी. उन्होंने कहा था कि इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें उक्त कार्य को कराने की रणनीति तय की जाएगी. कई बार उन्हें ऐसा कहते हुए सुना गया है.

हालांकि, कई महीने बीत जाने के बावजूद अब तक मुख्यमंत्री ने बैठक नहीं बुलाई है, जिसको लेकर विपक्ष हमलावर है. इसी क्रम में मंगलवार नेता प्रतिपक्ष और राघोपुर विधायक तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने जातीय जनगणना के मुद्दे पर राज्यभर में पदयत्रा करने की घोषणा की है. साथ ही सीएम नीतीश को अल्टीमेटम दिया है कि वे अपना इरादा स्पष्ट करें कि वे जातीय जनगणना कराने के संबंध में क्या विचार रखते हैं. 

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