- मेरठ में महाराजा सूरजमल की मूर्ति के अनावरण के मौके पर जाट समाज के कई प्रमुख नेता शामिल होंगे.
- भाजपा के संजीव बालियान और RLP के हनुमान बेनीवाल जैसे विभिन्न पार्टियों के जाट नेता मौजूद रहेंगे.
- पंजाब CM भगवंत मान के शामिल होने की संभावना है, जबकि जयंत चौधरी के आने की उम्मीद कम बताई जा रही है.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाटों का राजनीतिक दबदबा माना जाता है, लेकिन हाल के वर्षों में उनके राजनीतिक रुतबे में थोड़ी कमी जरूर आई है. ऐसे में जाटों के सबसे बड़े शासक की याद में मेरठ में एक बड़ा जमावड़ा लगने वाला है, जिसमें पार्टी की दीवार भी टूटती हुई दिखाई देगी. अगले साल मार्च में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले इसे जाटों का शक्ति प्रदर्शन भी कहा जा सकता है.
महाराजा सूरजमल की मूर्ति के अनावरण के बहाने जाट अपनी राजनीतिक ताकत दिखाएंगे. आज उत्तर प्रदेश के मेरठ में जाटों के सबसे प्रसिद्ध शासक की मूर्ति के अनावरण में जाट समाज से ताल्लुक रखने वाले कई जाने माने नेता शामिल होंगे. समारोह में पार्टियों की कोई बंदिश भी नहीं होगी और अलग-अलग पार्टियों के जाट नेताओं के शरीक होने की संभावना है. इनमें बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान और राजस्थान के नागौर से लोकसभा सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल जैसे नेता शामिल हैं.
भगवंत मान इन, लेकिन जयंत चौधरी आउट
पंजाब के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी नेता भगवंत मान के भी इस समारोह में मौजूद रहने की संभावना है. भगवंत मान सिख धर्म को मानने वाले हैं, लेकिन उनका नाता जट सिख समुदाय से है. पंजाब में इस समुदाय के लोगों की अच्छी खासी संख्या है. हालांकि एक चौंकाने वाली बात ये है कि इस समारोह में देश के सबसे बड़े जाट और किसान नेताओं में शामिल और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के पोते और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी के शामिल होने की संभावना कम बताई जा रही है.
समारोह के एक आयोजक ने बताया कि आयोजन के लिए तैयार किए गए आमंत्रण पोस्टर में जयंत चौधरी का भी नाम है, लेकिन उनके आने की संभावना नहीं है. अब तक ये साफ नहीं है कि अगर जयंत चौधरी इस आयोजन में शामिल नहीं होते हैं तो उसकी वजह क्या है?
रहा है दबदबा, लेकिन रसूख में आई है कमी
राजस्थान, हरियाणा, पश्चिम उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब में जाट समुदाय से आने वाले लोगों की अच्छी खासी संख्या है. खासकर हरियाणा, राजस्थान और पश्चिम उत्तर प्रदेश में तो राजनीतिक तौर पर जाटों का काफी दबदबा रहा है. अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसमें पश्चिम उत्तर प्रदेश की सीटों की भूमिका भी अहम रहने वाली है. अभी हाल तक उत्तर प्रदेश में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रहे भूपेंद्र चौधरी जाट समुदाय से ही आते हैं. हालांकि हाल के सालों में जाटों के सियासी रसूख में कमी आई है. पश्चिम उत्तर प्रदेश में पिछले कई सालों से जाटों का बीजेपी को समर्थन बड़ी तादाद में मिलता रहा है.
कौन थे महाराजा सूरजमल
महाराजा सूरजमल को जाटों का सबसे बड़ा शासक माना जाता है. बेहद कुशल रणनीतिकार होने के चलते उन्हें जाटों का प्लूटो भी कहा जाता है. 1707 में राजस्थान के भरतपुर में जन्मे सूरजमल अपने जीवन में 80 युद्ध लड़े और सभी जीते. 1763 में मुगलों से लड़ते हुए अपने प्राणों का आहूति देने से पहले उन्होंने दो बार दिल्ली को मुगलों से छीना और आगरा के किले पर कब्जा किया. अहमद शाह अब्दाली के आक्रमण के दौरान उन्होंने मथुरा और वृंदावन की रक्षा की और हिंदुओं के पवित्र स्थानों को बचाया.














