गणतंत्र दिवस से पहले जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. इसकी सबसे बड़ी वजह पाकिस्तान के नापाक इरादे बताए जा रहे हैं. आशंका है कि इस बार गणतंत्र दिवस पर प्रदेश में कोई बड़ी साजिश की जा सकती है.
सूत्रों के मुताबिक हाल के दिनों में एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तानी ड्रोन देखे गए हैं. इसके अलावा श्रीनगर में विदेशी आतंकियों की मौजूदगी की खबरों के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं. सुरक्षा बलों के अनुसार पूरे केंद्र शासित प्रदेश में बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है. सभी 20 जिलों में सुरक्षा बढ़ाई गई है । खासकर पाकिस्तान से लगे सीमावर्ती इलाकों में ज्यादा सतर्कता बरती जा रही है. जम्मू और कश्मीर दोनों क्षेत्रों में नाकेबंदी, वाहनों और लोगों की सघन जांच की जा रही है.
किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं. श्रीनगर और जम्मू जैसे बड़े शहरों में अहम जगहों पर तलाशी और चेकिंग और तेज कर दी गई है. सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए ड्रोन और हाई-रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरों की मदद से निगरानी की जा रही है। संवेदनशील इलाकों में एरिया सैनिटाइजेशन और सर्च ऑपरेशन भी चलाए जा रहे हैं. इस बीच, सीआरपीएफ के महानिदेशक जी पी सिंह ने जम्मू में एक उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की। बैठक में आतंकवाद विरोधी अभियानों को और मजबूत करने पर चर्चा हुई और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया गया.
वहीं सीमा सुरक्षा बल ने उत्तरी कश्मीर के बांडीपोरा सेक्टर में घुसपैठ रोकने के लिए सुरक्षा और कड़ी कर दी है, क्योंकि खुफिया जानकारी के मुताबिक सीमा पार से घुसपैठ की कोशिशें बढ़ी हैं. इधर सेना ने भी अपनी चौकसी बढ़ा दी है. हाल ही में सेना प्रमुख ने कहा कि ऑपेरशन सिंदूर के बाद भी सरहद पार आठ आतंकी कैम्प सक्रिय हैं. इनमें से दो कैम्प आईबी और छह एलओसी पर है. जाहिर सी बात है कि पाक सुधरने से तो रहा इसलिए भारत अपनी सुरक्षा को चाक चौबंद कर रहा है और सीमा पार यह भी सख्त संदेश दे दिया है कि अगर इसे भेदने की फिर कोशिश हुई तो नतीजा के लिये तैयार रहें.














