जम्मू-कश्मीर सरकार ने जल शक्ति विभाग के तीन अलग-अलग मामलों में अपने तीन कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी है. इन पर देश विरोधी और विध्वंसक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है. विभाग की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक ये आतंकियों को खुफिया जानकारी, पैसे और सुरक्षित ठिकाने मुहैया करवाते थे.
पहला अनंतनाग का मामला
पहला मामला अनंतनाग जिले के बिजबेहड़ा का है. यहां इकबाल मोहल्ले के रहने वाले शौकत अहमद जरगर को नौकरी से हटा दिया गया है. वह जल शक्ति विभाग में डेली रेटेड वर्कर के रूप में काम कर रहे थे. उनके खिलाफ एफआईआर नंबर 53/2019 दर्ज है. यह केस आरपीसी की धारा 307, आर्म्स एक्ट की धारा 7/27 और यूएपीए की धारा 16 और 18 के तहत दर्ज किया गया था. उन पर आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने, साजिश रचने और आतंकियों को पनाह देने का आरोप है.
दूसरा किश्तवाड़ का मामला
दूसरा मामला किश्तवाड़ जिले का है. यहां हुल्लर के रहने वाले लियाकत अली भगवान को भी नौकरी से निकाल दिया गया है. वह विभाग में कैजुअल मजदूर थे और बेरवार क्षेत्र में तैनात थे. उनके खिलाफ एफआईआर नंबर 230/2019 दर्ज है। यह केस यूएपीए की धारा 13, 18, 19, 38 और 39 के तहत दर्ज किया गया है. उन पर भी आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने और आतंकियों का समर्थन करने के आरोप हैं.
तीसरा मामला भी किश्तवाड़ से जुड़ा है. कौसर हुसैन भगवान, जो हुल्लर पीएचई सब-डिवीजन में कैजुअल मजदूर थे, उन्हें भी सेवा से हटा दिया गया है. उनके खिलाफ भी एफआईआर नंबर 230/2019 दर्ज है. यह मामला यूएपीए की कई धाराओं के तहत दर्ज किया गया है. अधिकारियों के अनुसार इन मामलों की जांच पूरी हो चुकी है. फिलहाल केस अदालत में विचाराधीन हैं। जांच के आधार पर संबंधित धाराओं के तहत चार्जशीट भी दाखिल की जाएगी.
आपको बता दें कि इस साल में यह दूसरा मौका है कि जब उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आतंकियों के इको सिस्टम को पूरी तरह समाप्त करने के अभियान के तहत सरकारी विभागों में छिपे आतंकियों के मददगारों की सेवाएं समाप्त की हैं. इससे पहले 13 जनवरी को जम्मू कश्मीर सरकार ने आतंकियों के के मददगार पांच सरकारी कर्मियों की सेवाएं समाप्त कर दी थीं. पिछले साल 2025 में उपराज्यपाल ने 30 अक्टूबर को दो सरकारी शिक्षकों की सेवाएं समाप्त की थी. उससे पहले 22 अगस्त को दो , तीन जून को तीन और 15 फरवरी को आतंकियों के मददगार तीन सरकारी गर्मियों की सेवाएं समाप्त की गईं. वैसे पिछले पांच सालों में रियासत में प्रदेश सरकार अब तक आतंकी व अलगाववादी गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप में 93 सरकारी कर्मियों की सेवाएं समाप्त कर चुकी है.














