- किश्तवाड़ में सुरक्षा बलों ने 12000 फीट ऊंचाई पर जैश-ए-मोहम्मद का एक मजबूत और गुप्त बंकर ध्वस्त कर दिया
- बंकर में पाकिस्तानी कमांडर सैफुल्लाह और सहयोगी आदिल महीनों तक छिपकर रहता था
- आतंकी ठिकाने से बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री और कुकिंग गैस मिली है
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ के दुर्गम और बर्फीले पहाड़ों में सुरक्षा बलों ने जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों का एक बेहद मजबूत और गुप्त कारगिल‑स्टाइल फोर्टिफाइड बंकर ध्वस्त कर दिया है. 12,000 फीट की ऊंचाई पर बने इस ठिकाने में जैश के पाकिस्तानी मूल के कमांडर सैफुल्लाह और उसके सहयोगी आदिल महीनों तक छिपकर रहते रहे. अंदर से जो सामान मिला है, उसने आतंकियों की लंबी योजना का खुलासा किया है.
सुरक्षा बलों को यहां से 50 मैगी पैकेट, 20 किलो उच्च गुणवत्ता वाला बासमती चावल, टमाटर‑आलू जैसे ताज़ा सब्ज़ियां, 15 तरह के मसाले, अनाज, कुकिंग गैस सिलेंडर, और सूखी लकड़ी मिली है. जो स्पष्ट संकेत देती है कि आतंकी कई महीनों तक बिना बाहर निकले आराम से जीवित रह सकते थे. यह बंकर बड़े पत्थरों से बनी मजबूत दीवारों वाला एक मिनी‑किले जैसा था, जिसमें कई छिपे हुए प्रवेश‑द्वार थे.
रविवार दोपहर जब सुरक्षा बलों ने बंकर को घेर लिया, तो आतंकियों ने ग्रेनेड फेंककर जवाब दिया, जिसमें सात जवान घायल हो गए. बाद में हवलदार गजेंद्र सिंह ने चोटों के कारण दम तोड़ दिया. हमले के बाद सैफुल्लाह और आदिल अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे.
जैसे ही बंकर का खुलासा हुआ, सुरक्षा एजेंसियों को अंदेशा हुआ कि इतनी ऊंचाई और दुर्गम इलाके में इतने बड़े पैमाने पर राशन, मसाले और ईंधन पहुंचाना स्थानीय समर्थन के बिना संभव नहीं था. जांच एजेंसियों ने अब उन स्थानीय लोगों की पहचान शुरू कर दी है, जिन्होंने इस बंकर को बनाने, सामान पहुंचाने और आतंकियों को सुरक्षित रखने में मदद की. अब तक चार संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है, जिनसे पूछताछ जारी है.
अधिकारियों के मुताबिक, यह साफ है कि सैफुल्लाह लगभग एक साल से अधिक समय से इसी इलाके में सक्रिय था और उसे स्थानीय समर्थन मिल रहा था. सुरक्षा बलों ने बताया कि बंकर इतनी चालाकी से बनाया गया था कि ऊपर से देखने पर कोई अंदाजा नहीं लग सकता था कि नीचे आराम से रहने की पूरी जगह बनी है. बंकर की मजबूती और व्यवस्था देख यह भी स्पष्ट है कि आतंकी इस क्षेत्र को लंबे समय तक अपना ठिकाना बनाए रखने की योजना में थे. फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां ओवरग्राउंड नेटवर्क को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने के लिए अभियान चला रही हैं, ताकि आगे ऐसे ठिकाने दोबारा तैयार न हो सकें.
ये भी पढ़ें-: यूपी सरकार की इस चिट्ठी पर ध्यान देती नोएडा अथॉरिटी तो इंजीनियर युवराज की जान बच जाती













