अमेरिका ने रची ईरान को तोड़ने की साजिश... विरोध प्रदर्शनों पर खामेनेई के प्रतिनिधि का बड़ा आरोप

डॉ. हकीमोल्लाही ने अमेरिका पर भी निशाना साधते हुए कहा कि ईरान पर बेहद सख्त प्रतिबंध लगाए गए, जिनका मकसद देश को कमजोर करना था. उन्होंने माना कि इन प्रतिबंधों से आम लोगों को दिक्कतें हुईं, लेकिन उनका कहना है कि ये प्रतिबंध अपने मकसद में सफल नहीं हो पाए.

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ईरान में अशांति पर खामनेई के भारत प्रतिनिधि. (फाइल फोटो)
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  • ईरान के सुप्रीम नेता के भारत प्रतिनिधि ने अमेरिका पर देश को तोड़ने की साजिश रचने का आरोप लगाया
  • उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को पैसे, हथियार, ट्रेनिंग दी गई, ताकि धार्मिक भावनाओं को भड़काया जा सके
  • ईरान पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों का मकसद देश को कमजोर करना था लेकिन ये प्रतिबंध सफल नहीं हो पाए
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नई दिल्ली:

ईरान में हाल में जो प्रदर्शन हुए, वे आम लोगों के अपने आप उठे आंदोलन नहीं थे. इन्हें बाहर की ताकतों ने मिलकर प्रायोजित किया और चलाया, यह कहना है भारत में ईरान के सुप्रीम नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के प्रतिनिधि डॉ. ए. हकीमोल्लाही का. दिल्ली में बातचीत के दौरान डॉ.  हकीमोल्लाही ने ईरान में अस्थिरता के आरोपों को पूरी तरह गलत बताया. इसके साथ ही इन हालतों के लिए उन्होंने अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया. हकीमोल्लाही ने अमेरिका पर ईरान को अंदर से तोड़ने की साजिश रचने का आरोप लगाया.

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ईरान में बाहरी ताकतों ने बिगाड़े हालात

उन्होंने कहा कि 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुए प्रदर्शन ईरान को कमजोर करने की एक सोची-समझी विदेशी साजिश का हिस्सा थे. उनके मुताबिक ईरान की हजारों साल पुरानी सभ्यता और मजबूत राजनीतिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के लिए बाहर से अराजकता फैलाने की कोशिश की गई. डॉ. हकीमोल्लाही ने कहा कि ये प्रदर्शन किसी जनता की स्वाभाविक नाराज़गी का नतीजा नहीं थे. उनका दावा है कि विदेशी ताकतों ने लोगों को पैसे दिए, उन्हें ट्रेनिंग दी और हिंसा फैलाने के लिए इस्तेमाल किया. उन्होंने कहा कि देश के कई इलाकों में जानबूझकर हालात बिगाड़े गए.

हथियार बांटे, हिंसा के बदले पैसे दिए गए

उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों की धार्मिक भावनाएं भड़काने के लिए मस्जिदों में आग लगाई गई, कुरान की प्रतियां जलाई गईं और पुलिस पर हमले किए गए, ताकि दंगे जैसे हालात बन सकें. उनके अनुसार, यह वही तरीका है, जैसा पहले इराक में आईएसआईएस जैसी ताकतों ने अपनाया था. उन्होंने यह भी कहा कि हथियारों की ट्रेनिंग दी गई, हथियार बांटे गए और हिंसा के बदले पैसे दिए गए.

डॉ. हकीमोल्लाही ने अमेरिका पर भी निशाना साधते हुए कहा कि ईरान पर बेहद सख्त प्रतिबंध लगाए गए, जिनका मकसद देश को कमजोर करना था. उन्होंने माना कि इन प्रतिबंधों से आम लोगों को दिक्कतें हुईं, लेकिन उनका कहना है कि ये प्रतिबंध अपने मकसद में सफल नहीं हो पाए. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विदेशी खुफिया एजेंसियों ने आगजनी और धमाकों के लिए सामान उपलब्ध कराया और अशांति फैलाने के लिए भारी पैसा लगाया गया. उन्होंने इसे ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों से जुड़े पुराने मामलों से जोड़ा.

ईरान ने कभी किसी युद्ध की शुरुआत नहीं की

ईरान के इतिहास का जिक्र करते हुए डॉ. हकीमोल्लाही ने कहा कि ईरान ने कभी किसी युद्ध की शुरुआत नहीं की. उनके मुताबिक ईरान हमेशा एक शांतिप्रिय देश रहा है और उसने हर बार केवल अपना बचाव किया है. उन्होंने अमेरिका पर ईरान को अंदर से तोड़ने की साजिश रचने का आरोप लगाया. 

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उनका कहना था कि देश को कमजोर करने की कई कोशिशें हुईं, लेकिन ईरान की एकता और संस्थाएं मजबूत बनी रहीं. भारत और ईरान के रिश्तों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों का रिश्ता बहुत पुराना है. व्यापार, भाषा, संस्कृति और विचारों के आदान-प्रदान से दोनों देश सदियों से जुड़े रहे हैं. फारसी भाषा और संस्कृति का भारत पर गहरा असर रहा है, वहीं भारतीय दर्शन और सोच फारस तक पहुंची.

गिरफ्तारों ने कबूली पैसे लेकर अशांति फैलाने की बात

उन्होंने कहा कि खुद ईरान के सुप्रीम नेता अयातुल्ला अली खामेनेई भारत के इतिहास और संस्कृति में गहरी रुचि रखते हैं, जो दोनों देशों के मजबूत रिश्तों को दिखाता है. अंत में डॉ. हकीमोल्लाही ने कहा कि गिरफ्तार किए गए कई लोगों ने कबूल किया है कि उन्होंने अशांति फैलाने के बदले बड़ी रकम ली थी. उनके मुताबिक इससे साफ होता है कि ईरान की स्थिरता को खतरा अंदर से नहीं, बल्कि बाहर से पैदा किया गया था, और ऐसी कोशिशें आखिरकार नाकाम होंगी.
 

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