Middle East Crisis: मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल की ईरान से जंग को भले ही तेल के लिए महायुद्ध बताया जा रहा हो, लेकिन खतरा बढ़ रहा है कि कहीं ये पानी के लिए युद्ध में तब्दील हो जाए. भले ही भारत, चीन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देश तेल की कीमतों में लगी आग से झुलस रहे हों मगर खुद खाड़ी देशों पर पानी में डूबने का खतरा मंडरा रहा है. दरअसल, ईरान में एक वाटर प्लांट पर हमला हुआ तो उसने बहरीन में ऐसे ही वाटर प्लांट पर ड्रोन हमला बोल दिया. खतरा है कि ईरान मध्य पूर्व में सऊदी अरब, कतर, यूएई, बहरीन, ओमान के वाटर प्लांट पर हमला कर सकता है, इससे बड़ा जल संकट खाड़ी देशों में खड़ा हो सकता है.
सैन्य ठिकाने ही नहीं, तेल के बाद समुद्री खारे पानी को शुद्ध पेयजल में बदलने के प्लांट भी निशाने पर हैं. ईरान ने दावा किया है कि उसके वाटर प्लांट को निशाना बनाया गया है. जिस प्लांट पर हमला हुआ, वो होर्मुज स्ट्रेट के करीब केशम द्वीप पर है. वाटर प्लांट पर हमले से बड़े इलाके में पानी की सप्लाई ठप हो गई. बहरीन के वाटर डिसेलिनेशन प्लांट पर ड्रोन हमला हुआ था, जो वहां की आबादी की प्यास बुझाने का काम करता है. मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) के रेगिस्तानी देशों में जीवन की सबसे बड़ी वजह तेल नहीं, बल्कि समुद्र का पानी है जिसे 'डिसैलिनेशन' (Desalination) तकनीक से पीने लायक बनाया जाता है.
डिसेलिनेशन प्लांट से समंदर के खारे पानी को पीने लायक बनाया जाता है.खाड़ी देशों में तेल तो बेहिसाब है, लेकिन शुद्ध पानी के लिए डिसेलिनेशन प्लांट पर ही निर्भर हैं. इसी वाटर प्लांट से पानी की सप्लाई होती है. दुनिया भर में डिसेलिनेशन क्षमता का 60% हिस्सा खाड़ी देशों का है. फारस की खाड़ी में 400 से ज्यादा वॉटर डीसेलिनेशन प्लांट हैं, जिन पर खतरा मंडरा रहा है. ईरान ने इन्हें निशाना बनाया तो मिडिल ईस्ट में सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, ओमान, यूएई की करोड़ों की आबादी बूंद-बूंद पानी को तरसेगी. ऐसे प्लांट पर हमले से कतर और बहरीन जैसे देश भी नहीं बचेंगे.
Desalination Plants Middle East Crisis
ड्रोन और मिसाइल हमले का खतरा
ईरान समर्थित हुती या अन्य विद्रोही गुटों ने पहले भी सऊदी अरब के तेल ठिकानों और बुनियादी ढांचों पर ड्रोन हमले किए हैं. ऐसे विशाल प्लांट को मिसाइल या रॉकेट हमलों को पूरी तरह रोक पाना कठिन है. समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगें (Naval Mines) पाइप को (जहां से समुद्र का पानी अंदर लिया जाता है) को ब्लॉक कर सकती हैं या विस्फोट से तबाह कर सकती हैं. आधुनिक प्लांट पूरी तरह कंप्यूटर और सेंसर (SCADA system) पर चलते हैं. दुश्मन देश हैकिंग के जरिए इन प्लांट को बंद कर सकते हैं या पानी में केमिकल बैलेंस बिगाड़ सकते हैं.
हमले के गंभीर परिणाम
खाड़ी देशों के किसी वाटर प्लांट पर हमला होता है, तो इसके नतीजे कुछ ही घंटों में दिखने लगेंगे. कतर, कुवैत और यूएई जैसे देशों में रणनीतिक जल भंडार (Water Reserves) केवल कुछ ही दिनों के लिए होते हैं. प्लांट रुकते ही शहरों में हाहाकार मच सकता है. मिडिल ईस्ट में कई प्लांट पानी के साथ बिजली भी पैदा करते हैं. यानी बिजली भी गुल हो जाएगी. बिना पानी के रियाद, दुबई या अबू धाबी जैसे महानगरों में रहना असंभव हो जाएगा.
जल युद्ध का खतरा
इराक का हमला (1991): खाड़ी युद्ध के दौरान इराक ने कुवैत के Water Plant को नुकसान पहुंचाया था, जिससे वहां पर्यावरण और संकट खड़ा हो गया था. सऊदी अरब और इजराइल के तटीय इलाकों के प्लांट हुती और अन्य मिलिशिया की 'टारगेट लिस्ट' में सबसे ऊपर हैं.
वाटर प्लांट की मिसाइलों से पहरेदारी
सऊदी अरब समेत कई देशों में वाटर डिसैलिनेशन प्लांट के चारों ओर पैट्रियट और आयरन डोम (Iron Dome) जैसे मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात हैं. सऊदी अरब जैसे देश अब विशाल भूमिगत जल भंडार (Strategic Reservoir) का निर्माण कर रहे हैं ताकि युद्ध के हालात में भी कई हफ्तों तक पानी की सप्लाई बनी रहे. एक बड़े वाटर प्लांट की बजाय अब छोटे-छोटे प्लांट लगाए जा रहे हैं ताकि एक पर हमला हो तो पूरी सप्लाई न रुके.














