- दिल्ली के स्टेडियम में IPL मैचों के दौरान फ्री पासों की कालाबाज़ारी का संगठित नेटवर्क सक्रिय था
- डीडीसीए का एक वरिष्ठ अधिकारी, पेट्रोल पंप कर्मचारी और कई युवक इस सिंडिकेट के मुख्य सदस्य
- विराट कोहली के मैच में कॉम्प्लिमेंट्री पास 80 हजार रुपये तक बिके, सामान्य मैचों में कीमत 8 हजार तक होती है
Delhi IPL Pass Scam: दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेले जा रहे आईपीएल मैचों के दौरान कॉम्प्लिमेंट्री पासों की कालाबाज़ारी का ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने क्रिकेट प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था दोनों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आया है कि स्टेडियम के अंदर से ही एक संगठित नेटवर्क चल रहा था, जो हर मैच में मिलने वाले फ्री पासों को ब्लैक में बेचकर लाखों रुपये कमा रहा था. इस रैकेट में डीडीसीए (DDCA) का एक बड़ा अधिकारी, स्टेडियम के बगल में मौजूद पेट्रोल पंप का कर्मचारी और दर्जनों युवक शामिल बताए जा रहे हैं.
ऐसे खेला जा रहा IPL के पासों की कालाबाज़ारी का खेल
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह कोई सड़क किनारे टिकट बेचने वाला छोटा गैंग नहीं था, बल्कि पूरी प्लानिंग और नेटवर्क के साथ चलाया जा रहा वीआईपी पास सिंडिकेट था. आरोप है कि हर मैच से पहले टिकटों की डिमांड का आकलन किया जाता था और उसी हिसाब से रेट तय होते थे. जिस मैच में बड़े खिलाड़ी होते थे, खासकर विराट कोहली जैसे स्टार, वहां टिकटों की कीमत आसमान छू जाती थी.
विराट कोहली के मैच में सबसे ज्यादा कमाई
दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आया है कि रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और दिल्ली कैपिटल्स के मुकाबले के दौरान सबसे ज्यादा कालाबाज़ारी हुई. विराट कोहली को देखने के लिए भारी भीड़ और जबरदस्त डिमांड का फायदा उठाकर एक-एक कॉम्प्लिमेंट्री पास 80 हजार रुपये तक में बेचा गया. पुलिस सूत्रों का कहना है कि सामान्य मैचों में भी टिकट 8 हजार से 20 हजार रुपये तक बिकते थे, जबकि हाई-प्रोफाइल मैचों में कीमत कई गुना बढ़ा दी जाती थी. सूत्रों के मुताबिक, मैच शुरू होने से ठीक पहले रेट और बढ़ जाते थे, क्योंकि उस समय कई लोग किसी भी कीमत पर स्टेडियम के अंदर जाने को तैयार रहते थे. इसी मजबूरी का फायदा यह गिरोह उठाता था.
कैसे पकड़ में आया पास की कालाबाजारी का खेल?
8 मई को दिल्ली पुलिस को सूचना मिली थी कि अरुण जेटली स्टेडियम के बाहर कुछ लोग IPL के फ्री पास ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं. इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन लोगों मुकीम, गुफरान और मोहम्मद फैसल को गिरफ्तार किया. इनके पास से कई कॉम्प्लिमेंट्री पास बरामद हुए. पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कई बड़े खुलासे किए. इनके बयान के आधार पर पुलिस पेट्रोल पंप कर्मचारी पंकज यादव तक पहुंची. जांच में पता चला कि पंकज यादव इस नेटवर्क में डिस्ट्रीब्यूशन इंचार्ज की भूमिका निभा रहा था.
पेट्रोल पंप से ऑपरेट हो रहा था पूरा नेटवर्क!
पुलिस जांच में बेहद चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि स्टेडियम के बगल में मौजूद पेट्रोल पंप को टिकट बांटने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था. आरोप है कि DDCA से जुड़े व्यक्ति वहां पास पहुंचाते थे और फिर पंकज यादव उन्हें अलग-अलग लड़कों में बांट देता था. इसके बाद ये युवक स्टेडियम के अलग-अलग गेटों के बाहर खड़े होकर जरूरतमंद लोगों को पास बेचते थे. कई बार ग्राहक पहले से तय होते थे और फोन या मैसेज के जरिए डील की जाती थी. मैच शुरू होने से पहले आखिरी समय में रेट बढ़ाकर मोटी कमाई की जाती थी.
कौन है पूरे खेल का मास्टरमाइंड?
दिल्ली पुलिस की जांच का सबसे बड़ा हिस्सा अब उस DDCA अधिकारी पर केंद्रित है, जिसे इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड माना जा रहा है. सूत्रों का दावा है कि वही अधिकारी बचे हुए कॉम्प्लिमेंट्री पास इस नेटवर्क को उपलब्ध कराता था. BCCI नियमों के मुताबिक, मैच होस्ट करने वाली एसोसिएशन को स्टेडियम क्षमता का करीब 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा कॉम्प्लिमेंट्री पास के रूप में मिलता है. दिल्ली में हर IPL मैच के लिए DDCA को लगभग 6 हजार पास मिलते हैं. इनमें से करीब 4 हजार पास DDCA सदस्यों और अधिकारियों में बांटे जाते हैं. जांच एजेंसियों को शक है कि बाकी बचे पासों को ब्लैक मार्केट में बेचा जा रहा था. इसी मामले में पुलिस ने DDCA के चार अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाया, जिनमें दो वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे. सभी से करीब पांच घंटे तक पूछताछ हुई
कहीं ऑनलाइन सट्टेबाजी तो नहीं...
जांच में अब एक और गंभीर एंगल सामने आया है. पुलिस को शक है कि यह नेटवर्क सिर्फ ब्लैक में टिकट बेचने तक सीमित नहीं था. आरोपियों के संबंध ऑनलाइन सट्टेबाजी गिरोहों से भी जुड़े हो सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक, कुछ प्रीमियम पास उन लोगों को दिए जाते थे जो स्टेडियम के अंदर बैठकर लाइव बेटिंग ऑपरेट करते थे. इसके अलावा जेबकतरे और दूसरे आपराधिक तत्व भी इस नेटवर्क के जरिए स्टेडियम में एंट्री लेते थे. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या दूसरे IPL वेन्यू पर भी इसी तरह का नेटवर्क सक्रिय है?
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं. शुरुआती जांच में पता चला कि कई चैट, कॉल रिकॉर्ड और ऐप डिलीट किए गए थे. अब मोबाइल फोन फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं ताकि डिलीट डेटा रिकवर किया जा सके. जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि फोन डेटा से इस रैकेट में शामिल बाकी लोगों, पैसों के लेनदेन और दूसरे शहरों से जुड़े नेटवर्क का भी खुलासा हो सकता है.













