दुनिया देखेगी भारत के 'विक्रांत' की ताकत, 18 फरवरी से विशाखापट्टनम में जुटेंगी 60 देशों की नौसेनाएं

INS विक्रांत 18 फरवरी से विशाखापट्टनम में होने वाले इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू का मुख्य आकर्षण होगा. 60 से अधिक मित्र देशों की नौसेनाएं भारतीय स्वदेशी विमानवाहक पोत को नजदीक से देखने पहुंचेंगी. IFR और मिलन‑26 के जरिए भारत समुद्री क्षमता, साझेदारी और इंडो‑पैसिफ़िक सहयोग का प्रदर्शन करेगा.

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  • स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत आगामी इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में मुख्य आकर्षण के रूप में भाग लेगा.
  • ऑपरेशन सिंदूर में INS विक्रांत ने उत्तरी अरब सागर में आक्रामक समुद्री मौजूदगी से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
  • IFR में 60 से अधिक देशों की नौसेनाएं भाग लेंगी और भारतीय नौसेना अपनी समुद्री ताकत का प्रदर्शन करेगी.
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ऑपरेशन सिंदूर के नौसैनिक चरण का नायक रहा स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत आगामी इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) में मुख्य आकर्षण बनने जा रहा है. 18 फरवरी से विशाखापट्टनम में शुरू होने वाले इस वैश्विक नौसैनिक आयोजन में 60 से ज्यादा मित्र देशों की नौसेनाएं शामिल होंगी, जो भारत की इस अत्याधुनिक क्षमता का नजदीक से अवलोकन करना चाहती हैं.

भारतीय नौसेना के एक अधिकारी ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उत्तरी अरब सागर में तैनात विक्रांत कैरियर बैटल ग्रुप ने भारत की 'ऑफेंसिव डिटरेंस' रणनीति में अहम भूमिका निभाई थी. उसकी आक्रामक समुद्री मौजूदगी ने पाकिस्तान नौसेना को रक्षात्मक मुद्रा अपनाने और तुरंत युद्धविराम की मांग करने पर विवश कर दिया था. IFR के लिए विक्रांत अब बंगाल की खाड़ी में शक्ति प्रदर्शन करेगा.

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भारत की समुद्री ताकत का प्रतीक विक्रांत

INS विक्रांत का डिजाइन और क्षमता इसे देश की नौसैनिक शक्ति का प्रतीक बनाते हैं.

लंबाई: 262.5 मीटर

चौड़ाई: 61.6 मीटर

वजन: लगभग 45,000 टन

स्पीड: अधिकतम 28 नॉट

क्रू: लगभग 1,600 कर्मी, जिनमें महिला अधिकारी भी शामिल

एयर विंग: 30 तक विमानों की क्षमता, जिनमें MiG‑29K, MiG‑29KUB, Chetak, Kamov‑31, MH‑60R और ALH हेलिकॉप्टर शामिल

INS विक्रांत का नाम भारत के पहले विमानवाहक पोत INS Vikrant (R11) से प्रेरित है, जिसने 1961 के गोवा मुक्ति अभियान और 1971 के युद्ध में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी.

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क्या है इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू?

IFR एक औपचारिक नौसैनिक समारोह है, जिसमें दुनियाभर की नौसेनाओं के जहाज, पनडुब्बियां और विमान भाग लेते हैं. इस दौरान सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर, राष्ट्रपति पूरे बेड़े की औपचारिक समीक्षा करते हैं. भारत ने इससे पहले IFR का आयोजन 2001 (मुंबई) और 2016 (विशाखापट्टनम) में किया था.

2001: 20 देशों के 97 युद्धपोत शामिल

2016: 50 देशों के लगभग 100 जहाज, भारतीय जलक्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा युद्धपोत समागम

18 फरवरी से शुरू होगा मिलन‑26

  • इसी अवधि में विशाखापट्टनम मिलन‑26 की मेजबानी भी करेगा, जो भारतीय नौसेना का बहुपक्षीय युद्धाभ्यास है.
  • 135 से अधिक देशों को आमंत्रण
  • बड़े पैमाने पर सहयोगी समुद्री अभियानों का अभ्यास.
  • सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान‑प्रदान और पेशेवर साझेदारी को बढ़ावा.

भारतीय नौसेना ने वर्ष 2001 से मित्र देशों के साथ साझेदारी बढ़ाने के लिए अपनी बंदरगाह सुविधाओं को अंतरराष्ट्रीय बेड़ों के लिए खोला. तब से भारतीय जलक्षेत्र में विदेशी नौसैनिक मौजूदगी लगातार बढ़ रही है.

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IFR में इस बार क्या खास?

60 से अधिक देशों की भागीदारी.

कई देशों के युद्धपोत भारतीय तट पर पहुंचेंगे.

विक्रांत पहली बार IFR में मुख्य आकर्षण के रूप में शामिल.

बंगाल की खाड़ी में विशाल समुद्री शक्ति प्रदर्शन.

भारत के इस मेगा नौसैनिक आयोजन को रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह 'सुरक्षित, स्थिर और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक' के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत संदेश देता है.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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