भारतीय थलसेना प्रमुख का अल्जीरिया दौरा: रक्षा साझेदारी की दिशा में नई कदम

सेना प्रमुख की यह यात्रा राष्ट्रपति और चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ की हालिया यात्राओं के तुरंत बाद हो रही है, जो भारत-अल्जीरिया के मजबूत संबंधों का प्रतीक है.

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नई दिल्ली:

भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी अल्जीरिया की आधिकारिक यात्रा पर पहुंचे हैं. ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद यह उनकी पहली विदेशी यात्रा होगी, जो भारत की बढ़ती रणनीतिक सक्रियता और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को पेश करती है. उनकी यह यात्रा 28 अगस्त तक चलेगी. सेना प्रमुख की यह यात्रा राष्ट्रपति और चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ की हालिया यात्राओं के तुरंत बाद हो रही है, जो भारत-अल्जीरिया के मजबूत संबंधों का प्रतीक है.

इस यात्रा का मुख्य केंद्र रक्षा सहयोग है. जनरल द्विवेदी थलसेना-से-थलसेना संबंधों को मज़बूत बनाने, संयुक्त प्रशिक्षण व क्षमता निर्माण को बढ़ाने और रक्षा प्रौद्योगिकियों में सहयोग पर चर्चा करेंगे. चूंकि अल्जीरिया के पास भारत के उपकरण बड़ी संख्या में हैं, भारत परिचालन अनुभव, रखरखाव और प्रशिक्षण में अहम सहयोग प्रदान कर सकता है. साथ ही, दोनों देशों के बीच रक्षा उद्योग भागीदारी, विशेषकर आधुनिकीकरण और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों में अवसर तलाशे जाएंगे. यात्रा के दौरान भारतीय थलसेना प्रमुख आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता नीति साझा करेंगे और क्षेत्रीय व वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर विचार-विमर्श करेंगे. यह संवाद आपसी विश्वास, सामंजस्य और व्यावहारिक सहयोग को नई मजबूती देगा.

इस यात्रा के दौरान, जनरल द्विवेदी अल्जीरिया के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ उच्च-स्तरीय बैठकें करेंगे. इनमें रक्षा मंत्री के प्रतिनिधि मंत्री और पीपुल्स नेशनल आर्मी के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल सईद चानेग्रिहा, थल सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मुस्तफा स्माली और अल्जीरिया में भारतीय राजदूत डॉ. स्वाति कुलकर्णी शामिल हैं। वे स्कूल ऑफ कमांड एंड मेजर स्टाफ, टैमेंटफॉस्ट; चेरशेल मिलिट्री अकादमी जैसे प्रमुख सैन्य संस्थानों का भी दौरा करेंगे और शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

भारत अफ्रीका और भूमध्यसागर क्षेत्र तक अपनी पहुंच में अल्जीरिया को स्वाभाविक साझेदार मानता है. साहेल क्षेत्र की सुरक्षा, ऊर्जा संसाधनों और आधुनिक सैन्य क्षमता के कारण अल्जीरिया क्षेत्रीय शांति व स्थिरता का अहम स्तंभ है. जनरल द्विवेदी की यह यात्रा भारत–अल्जीरिया संबंधों को नई गति प्रदान करेगी और संप्रभुता, गुटनिरपेक्षता व दक्षिण–दक्षिण सहयोग जैसे साझा मूल्यों को और मजबूत करेगी.

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