भारत के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान और यूरोपीय संघ (ईयू) ज्वाइंट स्टेटमेंट पर कड़ा विरोध जाहिर किया है. इस बयान में जम्मू-कश्मीर का ज़िक्र किया गया था. विदेश मंत्रालय ने इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह भारत का आंतरिक मामला है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान और यूरोपीय संघ के साझा बयान को सिरे से खारिज कर दिया है.
रणधीर जायसवाल ने कहा, "जम्मू-कश्मीर के जिक्र के बारे में, हम यह कहना चाहेंगे कि हम भारत के अंदरूनी मामलों पर जॉइंट प्रेस बीफ्र में ऐसे बेवजह जिक्र को पूरी तरह से खारिज करते हैं. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं. जिन लोगों का ऐसे मामलों में कोई दखल नहीं है, उन्हें इन पर कोई भी कमेंट करने से बचना चाहिए."
पाकिस्तान-ईयू के साझा बयान में क्या कहा गया था?
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने सोमवार (1 जून 2026) को पाकिस्तान और ईयू का साझा प्रेस नोट जारी किया. इसमें जम्मू-कश्मीर का जिक्र था. बयान में कहा गया, "पाकिस्तानी पक्ष ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे के बारे में ब्रीफ किया. ईयू पक्ष ने यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध के बारे में ब्रीफ किया. दोनों ही पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के तहत, संघर्षों को बातचीत और कूटनीति से सुलझाने का समर्थन किया है."
भारत- बांग्लादेश नदियों की संधि को लेकर क्या बोला विदेश मंत्रालय?
बांग्लादेश के साथ नदी और जल के मुद्दों को लेकर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, "भारत और बांग्लादेश के बीच 54 नदियां मिलती हैं और हमारे पास एक जॉइंट रिवर कमीशन है, जो भारत और बांग्लादेश के बीच मिलने वाली सभी नदियों से जुड़े मामलों से निपटने के लिए एक स्ट्रक्चर्ड बाइलेटरल सिस्टम है. हम नदियों पर अपने स्ट्रक्चर्ड बाइलेटरल कोलैबोरेशन के हिस्से के तौर पर इन मामलों को भी देखेंगे."
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