- भारतीय वायुसेना ने फ्रांस के डसॉल्ट एविएशन से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की योजना बनाई है.
- रक्षा खरीद बोर्ड ने राफेल सौदे को मंजूरी दी है, अंतिम स्वीकृति रक्षा अधिग्रहण परिषद और कैबिनेट कमेटी से होगी.
- राफेल डील पर स्वदेशी लड़ाकू विमानों को लेकर रिटायर अधिकारियों की राय बंटी हुई है. जानिए अधिकारियों ने क्या कहा
India Rafale Deal: भारतीय वायुसेना अब फ्रांस के डसॉल्ट एविएशन से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी में हैं. इस सौदे को रक्षा खरीद बोर्ड ने मंजूरी दे ही हैं. कह सकते हैं कि मीडियम मल्टी रोल कॉम्बेट एयरकॉफ्ट प्रोगाम की रेस में राफेल ने शुरुआती बाजी मार ली हैं. हालांकि इसके बाद यह प्रस्ताव रक्षा अधिग्रहण परिषद और कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्युरिटी से अगर पास जाएगा, तब इस डील पर अंतिम मुहर लगेगी. ऐसे में अब यह सवाल उठने लगा है कि इस सौदे का असर देसी लाइट कॉम्बेट एयरकॉफ्ट और पांचवीं पीढ़ी के बनने वाले एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्रॉफ्ट पर क्या पड़ेगा? इस पर NDTV ने वायु सेना के रिटायर अधिकारियों से बात की. अधिकारियों की राय बंटी हुई मिली. कुछ अधिकारियों ने कहा कि इससे भारत के स्वदेशी तेजस और एमका पर कोई असर नहीं पड़ेगा. लेकिन कुछ एक्सपर्ट ने कहा कि रफाल की डील के बाद अब स्वदेशी लड़ाकू विमानों में देरी होगी.
पूर्व डीजी अनिल चोपड़ा बोले- रफाल डील से हमारे स्वदेशी प्रोग्राम पर नहीं पड़ेगा असर
सेंटर फॉर एयर पॉवर स्टडीज के पूर्व डीजी एयर मार्शल अनिल चोपड़ा (रिटा.) कहते हैं इसका हमारे एलसीए और एमका प्रोगाम पर कोई असर नहीं पड़ेगा. यह एक स्वतंत्र कार्यक्रम है, जिसका एमएमआरसीए डील से कोई लेना-देना नही हैं. फिलहाल वायुसेना के पास 13 स्क्वाड्रन की कमी है, जिसकी भरपाई करने के लिए अंतरिम तौर पर राफेल खरीदा जा रहा हैं. इसके बावजूद हमें अपने देसी लड़ाकू विमान कार्यक्रम को काफी तेजी से बढ़ाना होगा ताकि वायुसेना को जल्द से जल्द एलसीए मार्क 1 ए और एमका मिल पाए.
रिटायर ग्रुप कैप्टन अजय अहलावत बोले- हमारे प्रोग्राम पर असर पड़ेगा
वहीं ग्रुप कैप्टन अजय अहलावत (रिटा.) के मुताबिक 114 राफेल डील का निश्चित तौर पर हमारे एलसीए और एमका प्रोगाम पर असर पड़ेगा. सरकार शायद अभी इस प्रोगाम को उतना फंडिंग ना दे पाए, जितना उसने पहले देने का मन बनाया था. अगर समय पर वायुसेना को एलसीए मार्क 1 ए और एलसीए मार्क 2 मिल जाता तो 114 राफेल डील खरीदने की नौबत ही नहीं आती. याद कीजिए वायुसेना ने साल 2000 में कहा था कि हमें 126 लड़ाकू विमान चाहिए और 2016 में जाकर केवल 36 लड़ाकू विमान ही मिले. इस वजह से अपने देसी लड़ाकू विमान प्रोगाम में कुछ डिले होना तो स्वभाविक हैं.
रिटायर एयर मार्शल दीप्तेंदु चौधरी बोले- तेजस मार्क-2 और एमका प्रोग्राम पर बहुत असर पड़ेगा
वहीं एयर मार्शल दीप्तेंदु चौधरी (रिटा.) ने कहा कि राफेल डील से तेजस और एमका को लॉन्ग रन में बहुत ही फायदा होगा. इससे नई तकनीक भारत आएगी और देश के एविएशन इंडस्ट्री को बूस्ट मिलेगा. खासकर तेजस मार्क 2 और एमका प्रोग्राम पर बहुत फर्क पड़ेगा. राफेल लेने की जरूरत इसलिए पड़ी कि वायुसेना को जरूरत के मुताबिक लड़ाकू विमान समय पर नहीं मिले. उन्होंने यह भी कहा कि हम 10 से 15 साल पीछे चल रहे हैं. इस गैप को भरने के लिए विमान चाहिए ताकि हमारी सुरक्षा से कोई समझौता न हो. अब एचएएल को चाहिए कि भारतीय वायुसेना ने उसे जो तेजस का आर्डर दिया है उसे पूरा करें.
लड़ाकू विमानों की कमी के दौर से गुजर रही भारतीय वायुसेना
यहां यह भी सच है कि भारतीय वायुसेना लड़ाकू विमानों की भारी कमी से गुजर रही है. फिलहाल वायुसेना के पास केवल 29 स्क्वाड्रन ही है. वह भी तब जबकि भारतीय वायुसेना को चीन और पाकिस्तान से लगातार चुनौती मिल रही हैं. वायुसेना के पास मिग-29 और जगुवार जैसे पुराने विमान हैं. नये लड़ाकू विमान उनकी जगह लेने के लिए नहीं आ रहे हैं. देसी एलसीए मार्क 1 ए कब तक वायुसेना के मिल पाएगा, इसका जवाब विमान को बनाने वाली कंपनी हिन्दुस्तान एरोनेटिक्स कंपनी (HAL) के पास भी नहीं है.
2040 तक भी मिल जाए एमका तो बड़ी बात होगीः अनिल चोपड़ा
वैसे एचएएल ने पहले दावा किया था कि कम से कम 12 एलसीए मार्क 1 इस साल मार्च 31 से पहले वायुसेना में शामिल हो जाएंगे, पर इसके आसार अब कम ही लग रहे हैं. देसी पांचवीं पीढ़ी का एयरकॉफ्ट एमका का हाल तो और भी बुरा है. पहले यह कहा गया था कि एमका की पहली उड़ान 2028 तक होगी. वहीं सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो 2034 में यह लड़ाकू विमान वायुसेना में शामिल हो जाएगा. सेंटर फॉर एयर पॉवर स्टडीज के पूर्व डीजी एयर मार्शल अनिल चोपड़ा ( रिटा. ) ने एनडीटीवी से कहा कि अगर एमका 2040 तक भी वायुसेना में शामिल हो जाए तो बहुत बड़ी बात होगी.
चीन-पाकिस्तान की चुनौती के लिए जल्द चाहिए अत्याधुनिक विमान
इस हालात में भारतीय वायुसेना को चीन और पाकिस्तान से मिलने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए जल्द से जल्द लड़ाकू विमानों की सख्त जरूरत है. इसलिए वायुसेना ने राफेल को लेने का मन बनाया हैं. जब अपना देसी लड़ाकू विमान कब तक वायुसेना को मिलेगा, इसका पता नहीं है. राफेल जैसे लड़ाकू विामन लेना जरूरी हो जाता है क्योंकि यही विमान वायुसेना उड़ा रही है.
ऑपरेशन सिंदूर में राफेल विमान ने दिखाया था दम
ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान इसी विमान ने पाकिस्तान को घुटने में लाने में अहम भूमिका निभाई. लिहाजा यह विमान और उसके निर्माता ट्रायल एंड टेस्टेड है, जिस वजह से वायुसेना यह विमान जल्द लेना चाह रही है. यहां चिंता वाली बात यह भी है पाकिस्तान को जल्द चीन से पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान मिलने वाला है. इस हालात में जरूरी हो जाता है कि भारत के पास प्रतिद्वंदी के मुकाबले बेहतर एयर पावर हो. स्वदेशी फाइटर जेट की कमी को लेकर समय-समय पर एयरफोर्स के अधिकारी भी चिंता जाहिर कर चुके हैं.
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