भारत को अमेरिका के साथ win-win trade deal की उम्मीद: मुख्य वार्ताकार

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने अमेरिका जाने से पहले पत्रकारों से कहा कि हमारी वार्ता टीम पहले से ही अमेरिका में है. हमें एक  विन-विन डील की उम्मीद है.

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नई दिल्ली:

भारत के मुख्य वार्ताकार और वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील पर अमेरिकी अधिकारियों के साथ बातचीत के लिए आज अमेरिका पहुंच रहे हैं. भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील पर बातचीत निर्णायक दौर में है, और भारतीय वार्ताकारों की एक टीम बातचीत के लिए अमेरिका पहले ही वाशिंगटन पहुंच चुकी है. वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, भारत और अमेरिका के वार्ताकारों के बीच बातचीत दोनों देशों के लीडरशिप द्वारा तय किये गए टर्म्स ऑफ़ रिफरेन्स के आधार पर आगे बढ़ रही है.

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने अमेरिका जाने से पहले पत्रकारों से कहा कि हमारी वार्ता टीम पहले से ही अमेरिका में है. हमें एक  विन-विन डील की उम्मीद है. जब आप आमने-सामने बात करते हैं, तो हमेशा एक अच्छे समझौते की सकारात्मक उम्मीद होती है. अमेरिका और भारत के बीच कृषि, डेयरी और कई दूसरे मामलों पर मतभेद पर भारत के मुख्य वार्ताकार ने कहा कि हवा में काफ़ी शोर है. एक अच्छी बात यह है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है. अमेरिकी राजदूत ने भी महत्वपूर्ण हितधारकों से मुलाकात की है.

उधर, वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी ताज़ा आकड़ों के मुताबिक अमेरिका भारतीय एक्सपोर्टरों के लिए टॉप डेस्टिनेशन बना हुआ है. वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 के पहले छह महीने (अप्रैल-सितम्बर) के दौरान भारत से अमेरिका होने वाला एक्सपोर्ट बढ़ गया.भारत से अमेरिका होने वाला एक्सपोर्ट वित्त वर्ष 2024-25 के पहले छह महीने में 40.42 अरब अमेरिकी डॉलर था, जो इस साल के पहले छह महीने में बढ़कर 45.82 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है.

दोनों देशों के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत इस साल मार्च के आखिरी हफ्ते में शुरू हुई थी और अब तक भारत और अमेरिका के negotiators के बीच छह से ज़्यादा दौर की बातचीत हो चुकी है. 13 फरवरी, 2025 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच अक्टूबर-नवंबर, 2025 तक बाइलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट (BTA) के पहले tranche को तैयार करने को लेकर समझौता हुआ था. भारत और अमेरिका प्रस्तावित बिलैटरल ट्रेड एग्रीमेंट के जरिए जो द्विपक्षीय व्यापार को मौजूद १९० बिलियन डॉलर से बढ़ाकर 2030 तक 500 बिलीयन डॉलर तक बढ़ाना चाहते हैं. 

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