सिर्फ अमेरिका-चीन के पास थी जो तकनीक, अब वो जादू करने जा रहा है भारत; आंध्र में बन रहा सबसे बड़ा डिफेंस हब

आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी में देश के सबसे बड़े रक्षा हब की नींव रखी जा रही है, जहां भारत के पहले स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान (AMCA) का निर्माण होगा.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins

भारत द्वारा विकसित किए जा रहे पांचवीं पीढ़ी के ‘एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट' (एमका) के निर्माण में तेजी लाने की तैयारी की जा रही है. एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) इस फाइटर जेट के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. शुक्रवार को इसी एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी के विमान एकीकरण और उड़ान परीक्षण केंद्र की आधारशिला रखी जाएगी. यह पहल आंध्र प्रदेश में की जा रही है.यह सिर्फ एक इमारत का शिलान्यास नहीं है, बल्कि यह बीजिंग से लेकर इस्लामाबाद तक के सैन्य रणनीतिकारों की नींद उड़ाने वाला भारत का एक महाशक्तिशाली कदम है. यह वही ऐतिहासिक केंद्र बनने जा रहा है जहां भारत का सबसे खतरनाक, अदृश्य और अत्याधुनिक पांचवीं पीढ़ी का स्वदेशी स्टील्थ लड़ाकू विमान AMCA आकार लेगा. एक्सपर्ट्स इसे 'गेम-चेंजर' कह रहे हैं. आइए बताते हैं कि यह प्रोजेक्ट भारत के डिफेंस सेक्टर के लिए क्यों इतना खास है.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू 15 मई को आंध्र प्रदेश के श्रीसत्य साईं जिले के पुट्टपर्थी में कई एयरोस्पेस और रक्षा परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे. इन परियोजनाओं को भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता, स्वदेशी सैन्य तकनीक और आत्मनिर्भर रक्षा विनिर्माण को नई गति देने वाला माना जा रहा है. इस दौरान एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी के विमान एकीकरण और उड़ान परीक्षण केंद्र की आधारशिला भी रखी जाएगी.

यहां होगा विमान का सिस्टम इंटीग्रेशन

इस केंद्र में सिस्टम इंटीग्रेशन, परीक्षण, सत्यापन और प्रमाणन से जुड़े कार्य किए जाएंगे. इससे भारतीय फाइटर जेट एमका परियोजना के विकास और परीक्षण प्रक्रिया में तेजी आएगी. यह प्रक्रिया विमान के अलग-अलग जटिल हिस्सों और सिस्टम को एक साथ मिलाकर एक फंक्शनल यूनिट बनाने का काम करती है. लड़ाकू विमान के कंप्यूटर, अत्याधुनिक सेंसर, अस्त्र मिसाइल वेपन सिस्टम और रडार को एक सेंट्रल सिस्टम से जोड़ा जाता है.पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फीचर्स और मिशन सिमुलेशन को विमान के इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ इंटीग्रेट किया जाता है.

कैसे होगी फ्लाइट टेस्टिंग?

यह इस प्रोजेक्ट का सबसे अहम और अंतिम चरण है, जहां विमान की वास्तविक क्षमताओं को परखा जाता है. इसके लिए डेडीकेटेड रनवे और एयरस्पेस बनाया जा रहा है. पुट्टपर्थी में रनवे की लंबाई को बढ़ाकर 10,000 फीट किया जा रहा है और एक खास 'लोकल फ्लाइंग जोन' बनाया जा रहा है. विमान सुरक्षित रूप से उड़ सकता है या नहीं और उसकी स्टील्थ क्षमता सही काम कर रही है या नहीं? इसका कड़ा परीक्षण भी यहीं होगा. इस सेंटर की मदद से AMCA का पहला प्रोटोटाइप 2027 तक रोलआउट करने और 2028 में पहली उड़ान का परीक्षण करने का लक्ष्य तेजी से पूरा किया जा सकेगा.

Advertisement

रक्षा क्षेत्र के लिए क्यों है यह खास?

  • इस सेंटर से एयरोस्पेस इकोसिस्टम का विस्तार होगा.
  • यह भारत को बाहरी देशों के टेस्टिंग इकोसिस्टम पर निर्भर रहने से बचाएगा.
  • इसके सफल होने से भारत अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों के उस चुनिंदा क्लब में शामिल हो जाएगा, जिनके पास खुद की पांचवी पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट तकनीक है.
  • अकेले इस प्रोजेक्ट से 7,500 से ज्यादा रोजगार पैदा होंगे और रायलसीमा क्षेत्र एक राष्ट्रीय डिफेंस हब बनेगा.

यह भी पढ़ें: ब्रह्मोस पर डील, रणनीतिक साझेदारी.. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के वियतनाम दौरे के लिए खास प्लान

Featured Video Of The Day
Mamata in Lawyer Robes: पहले घर बुलाई इमरजेंसी मीटिंग, फिर काले कोट में हाईकोर्ट पहुंची ममता, फिर आखिर क्या हुआ