- इंडिया AI इम्पैक्ट समिट का समापन नई दिल्ली घोषणा जारी होने के साथ हुआ, जिसे 88 देशों और संगठनों ने समर्थन दिया
- नई दिल्ली घोषणा का मूल संदेश AI के सुरक्षित और समान उपयोग को बढ़ावा देने वाला "AI for All" है
- घोषणा में AI के आर्थिक विकास, सामाजिक कल्याण, और मानव पूंजी विकास के लिए सात प्रमुख स्तंभ निर्धारित किए गए हैं
ग्लोबल साउथ में आयोजित अब तक के सबसे बड़े आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस इवेंट—इंडिया AI इम्पैक्ट समिट—का समापन शनिवार को “नई दिल्ली घोषणा (New Delhi Declaration)” जारी होने के साथ हुआ. यह घोषणा वैश्विक स्तर पर AI के सुरक्षित, समान और जिम्मेदार उपयोग को लेकर एक नए सहयोगी ढांचे की नींव रखती है, जिसे 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने समर्थन दिया है.
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के अनुसार, “नई दिल्ली घोषणा” का मूल संदेश “AI for All” और भारत के वैश्विक सिद्धांत “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” पर आधारित है. इसका उद्देश्य AI के लाभों को पूरी मानवता तक बराबरी से पहुँचाना है. घोषणा में कहा गया है कि AI सिर्फ तकनीकी विकास नहीं, बल्कि आर्थिक प्रगति और सामाजिक कल्याण का बड़ा माध्यम बन सकता है.
घोषणा पत्र में वैश्विक AI सहयोग के लिए 7 प्रमुख स्तंभ निर्धारित किए गए हैं:
- AI संसाधनों का लोकतंत्रीकरण
- आर्थिक विकास और सामाजिक भलाई
- सुरक्षित और भरोसेमंद AI
- विज्ञान के लिए AI
- सामाजिक सशक्तिकरण के लिए पहुँच
- मानव पूंजी विकास
- लचीली, कुशल और नवाचारी AI प्रणालियाँ
घोषणा में जोर दिया गया है कि AI का प्रभावी उपयोग तभी संभव है जब देशों को मजबूत डिजिटल अवसंरचना और सस्ती कनेक्टिविटी उपलब्ध हो. “वसुधैव कुटुम्बकम” की भावना से प्रेरित यह दस्तावेज़ बताता है कि AI संसाधनों की सुलभता वैश्विक समानता और विकास के लिए ज़रूरी है.
घोषणा में ओपन-सोर्स AI पर भी जोर
“नई दिल्ली घोषणा” में यह भी उल्लेख है कि ओपन-सोर्स AI एप्लिकेशन्स और AI यूज़-केसेज़ को बढ़ाने से विभिन्न क्षेत्रों में AI की स्केलेबिलिटी और एडॉप्टेबिलिटी में तेजी आएगी. इससे आर्थिक और सामाजिक विकास दोनों को गति मिलेगी.
कौन-कौन से देश बने भागीदार?
घोषणा का समर्थन करने वालों में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, जापान, चीन, सऊदी अरब, ब्राज़ील, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया सहित कुल 88 देश और अंतरराष्ट्रीय संगठन शामिल हैं. इनमें यूरोपीय संघ और IFAD भी शामिल हैं. इस दस्तावेज़ के साथ, दुनिया ने AI के सुरक्षित, समावेशी और साझा भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है.
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