- उन्होंने गोपनीयता बनाए रखते हुए पांच दिनों में पूरी इकाई को मिशन के लिए तैयार किया और साहसिक कार्रवाई की
- पहलगाम आतंकी हमले का जवाब देते हुए सेना ने आतंकवादी ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर कई आतंकवादियों को मार गिराया
- पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई का सामना करते हुए भारतीय सेना ने अपने जवानों और उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित की
ऑपेरशन सिंदूर के दौरान अपने अदम्य साहस और बहादुरी के लिये भारतीय सेना के तीसरे सबसे बड़े सम्मान वीर चक्र से सम्मानित कर्नल कोशांक लांबा से NDTV ने खास बातचीत की. इस बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि आखिर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आतंकियों में भारतीय सेना का कितना खौफ था. कर्नल कोशांक लांबा ने उत्कृष्ट नेतृत्व का प्रदर्शन करते हुए बहुत कम समय में विशेष उपकरणों की एक बैटरी की तैनाती सुनिश्चित की, वो भी बहुत गोपनीय अंदाज में. साथ ही उन्होंने काफी कठिन लक्ष्य की पहचान करने, उसकी जानकारी जुटाने और विश्लेषण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
उपकरणों की तकनीकी समझ और उनकी रणनीतिक दक्षता के कारण उनकी उप-इकाई मात्र पांच दिनों में ही पूरी तरह मिशन के लिए तैयार हो गई. जब उनकी इकाई को उत्तरी कमांड क्षेत्र में आतंकवादियों के सबसे महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमला करने का कार्य सौंपा गया, तो कर्नल कोशांक लांबा ने असाधारण साहस का परिचय देते हुए दुश्मन पर ताबड़तोड़ गोलीबारी और बमबारी का नेतृत्व किया. उनके दृढ़ नेतृत्व और अदम्य साहस के चलते कई आतंकवादी शिविर नष्ट हुए और बड़ी संख्या में आतंकवादियों को मार गिराया गया. दुश्मन की गोलीबारी के बीच असाधारण वीरता, पराक्रम और साहस का प्रदर्शन करने के लिए कर्नल कोशांक लांबा को “वीर चक्र” से सम्मानित किया गया है. कर्नल कोशांक लांबा ने इस खास बातचीत में NDTV के सवालों पर कई बड़े खुलासे किए हैं.
सवाल - लड़ाई के दौरान मिलने वाले सेवा के तीसरे सबसे बड़े अवार्ड वीर चक्र से आपको सम्मानित किया गया है.आपके लिए क्या मायने है इस अवार्ड के.
जवाब - मेरे लिए वीर चक्र का अवार्ड मिलना गर्व का विषय था . एक सैनिक के लिए बड़ी गर्व की बात है कि उसे देश के लिए लड़ने का मौका मिले .अपने देश के लिए एक ऑपरेशन में हिस्सा लेने का मौका मिला .देश के दुश्मनों के दांत खट्टे करने के मौके मिले .मैं अपने आप को बहुत भाग्यशाली समझता हूं कि मुझे यह मौका मिला. ऐसे ही मौके के दौरान मेरी यूनिट और उसके जवानों ने जिस तरह से अपने साहस,परिश्रम और कौशल से काम किया,उसी के कारण मुझे वीर चक्र से सम्मानित किया गया. यह बहुत ही सम्मान की बात है.
सवाल - आपको एक और बड़ा अवॉर्ड मिला है . एनडीटीवी इंडियन ऑफ द ईयर अवार्ड . क्या कहना चाहेंगे ?
जवाब - एनडीटीवी ने इंडियन ऑफ द ईयर अवार्ड जो मुझे दिया, वो बहुत गर्व की बात है. एक नेशनल मंच के ऊपर एनडीटीवी ने मुझे सम्मानित किया . एक फोरम दिया जिससे मैं अपनी बात आगे बता सकूं और आर्मी की सोच को शब्दों में डाल सकूं . सिर्फ मेरे लिए ही नहीं बल्कि मेरी पूरी यूनिट के लिए भी यह बहुत गर्व की बात है. मेरे परिवार के लिए भी यह बहुत ही गर्व की बात है .
सवाल - जब 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकी हमला हुआ तो उस समय आपके दिमाग में दिल में किस तरह के ख्याल आए क्योंकि आप उस समय लाइन ऑफ कंट्रोल पर तैनात थे.
जवाब - 22 अप्रैल को जिस तरह से अटैक हुआ, हमारे बेगुनाह नागरिकों को मारा गया तो हमारी ट्रेनिंग के मुताबिक हम इमीडिएट तैयार होना शुरू हो गए थे . इसके लिए आदेश की जरूरत नहीं होती है. यह हमारी ट्रेनिंग का हिस्सा है. ऐसा कुछ भी होने से अपने रेडीनेस के लेवल को एक ऊपर अप ले जाया जाए . एक प्रक्रिया शुरू हो जाती है कि अगर जंग के हालात पैदा होते हैं तो आप उसमें शामिल हो जाते हैं.
सवाल -पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई में कैसे आपने अपने जवानों और गन को सुरक्षित बचाया ?
जवाब - देखिए जब भी किसी मिलिट्री ऑपरेशन की प्लानिंग होती है तो दो मुद्दे खास होते हैं जो मशीन मुझे दी जा रही है वह हंड्रेड परसेंट सक्सेज होना चाहिए . यह भी तय किया जाता है कि हमारे क्रिटिकल इक्विपमेंट और जवान को कोई हानि नहीं पहुंचे . हमने उसी के मुताबिक अपनी तैयारी की चाहे केमोफलाज लगाना हो या फिर दूसरे तरीके अपनाने हो. ड्रोन का जवाब देना हो.
सवाल - अगर पाकिस्तान की बात करें तो कितने पोस्ट का नुकसान पहुंचा और उनके कितने सैनिक हताहत हुए ?
जवाब - एग्जैक्ट फिगर देना तो आसान नहीं होगा पर दूसरे चरण में उनके ऊपर हमने जब कार्रवाई शुरू की तो लगातार इनपुट आ रहे थे कि उनके बहुत सारे सैनिक मारे जा रहे हैं बहुत सारे घायल हो रहे हैं हम इसको गिन भी नहीं पा रहे थे. आपने देखा किस तरह से पाकिस्तान ने यह सब कहना गलत नहीं होगा कि उसने घुटने टेक दिए. उनका मनोबल टूट गया था.
सवाल - आपको क्या लगता है पाकिस्तान सुधर जाएगा
जवाब - यह मेरे कहने की बात नहीं है. एक सैनिक के तौर पर मुझे इतना कहना है कि हमारा काम है हमेशा तैयार रहना और अपनी ट्रेनिंग को इंप्रूव करते रहना . जो इक्विपमेंट या हथियार हमें दिए जा रहे हैं उसे पर ट्रेनिंग करके उसे पर पूरी तरह से सक्षमता हासिल करना . आने वाले किसी ऑपरेशन के लिए निरंतर तैयार रहना.
सवाल - दुश्मन ने जिस तरह से हमला किया उससे करवाई में जोश और उबाल तो आता ही है.
जवाब - बहुत जोश आता है. यह जोश ही है जो हमे लगातार हमें प्रेरित करता है. अपने देश के लिए लड़ना...एक कार्रवाई में हिस्सा लेना. देश के नागरिकों को बचाना. उनके साथ जो अन्याय हुआ है उन्हें उन्हें न्याय दिलाना यह एक छोटी बात नहीं है यह एक बहुत बड़ी बात है . नहीं नहीं मेरे परिवार के सब लोग बहुत गर्व से फील करते हैं कि हमें जो मौका मिला इसी से सारा जोश निरंतर रहता है .
सवाल - इसकी तैयारी तो आप काफी दिनों से कर रहे होंगे पहली बार मौका मिला 19 साल के सर्विस में और अपने कर दिखाया .
जवाब - मुझे लगता है यह मौके की बात है मेरी जगह कोई और भी होता तो इंडियन आर्मी के कमांडिंग ऑफिसर होने के नाते वह भी ऐसा ही करता . ये सिर्फ मौके की बात है. हमारे लोग निरंतर तैयारी में ही रहते हैं कि किस दिन ऐसा मौका मिलेगा .चर्चिल ने एक दफा कहा था कि आपको जिंदगी में एक दफा ऐसा मौका जरूर मिलता है जिससे वह अपने फील्ड में एक ऐसा यूनिक काम कर सकता है जिससे उसे हमेशा गर्व का फील हो सके. और अगर हम उसे दिन के लिए तैयार नहीं है तो मौका जाया हो जाएगा .
सवाल - अगर फिर से देश को जरूरत पड़े तो क्या पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए तैयार हैं?
जवाब - हम जिस तरह की ट्रेनिंग करते हैं हमारा सिंपल सा फंडा है कि हम हमेशा तैयार हैं. कोई भी ऑपरेशन हो या कोई अप्रत्याशित घटना आ जाए हम सबके लिए तैयार रहते हैं . जब कभी मौका मिलता है देश के लिए लड़ने का या फिर मरने का, मुझे नहीं लगता है कोई भी पीछे हटेगा हम सब तैयार है
सवाल - पाकिस्तान को इस बार कितना दंड मिला है ? पाकिस्तान के पंजाब के बहावलपुर तक अपना हमला कर दिया.
जवाब - पाकिस्तान को जो सबक मिला है बहुत ही अच्छा मिला है. टेरर के ठिकाने हो, उसे पूरी तरह से बर्बाद किया. मिलिट्री टारगेट को अगर देखें एयर फील्ड कितनी तबाह हुए. उनके सेवा की फॉरवर्ड पोस्ट हो या फिर आतंकियों के लॉन्चिंग पैड सबको पूरी तरह से बर्बाद कर दिए . पाकिस्तान को एक बहुत अच्छा सबक सिखाने में हम कामयाब रहे . वैसे भी सेना हमेशा से ही तैयार रही है चाहे बाढ़ हो भूकंप हो या फिर टेररिस्ट अटैक चाहे जंग हो या फिर स्पोर्ट्स ही क्यों ना ? भारतीय सेना देश का नाम ऊंचा करने में हमेशा तैयार रहती है .
सवाल - अंतिम सवाल कि देश की युवाओं से क्या कहना चाहेंगे.
जवाब - मैं देश के युवाओं से कहना चाहूंगा कि यह मत पूछिए कि देश आपके लिए क्या कर रहा है पहले यह पूछिए कि आप देश के लिए क्या कर रहे हैं ? आज दिन में ऐसा क्या काम किया कि आप एक अच्छा नागरिक कहला पाए. युवाओं के हाथ में ही देश का भविष्य है . अपने आप को समर्पित करें चाहे जिस किसी प्रोफेशन में हो चाहे इंजीनियरिंग में हो या मेडीकल प्रोफेशन में हो .
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