दिल्ली में वायु प्रदूषण से करीब 10 साल छोटी हो रही जिंदगी, लखनऊ में 9.5 वर्ष : रिपोर्ट

पीएम 2.5 जहरीले पदार्थों से बना एक अत्यंत सूक्ष्म कण है, जो फेफड़ों और अन्य अंगों में गहराई तक जमा हो जाता है, शरीर की सुरक्षा तंत्र को पछाड़ देता है.

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दिल्ली में पीएम 2.5 का स्तर 107.6 मापा गया, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से दस गुना अधिक है.
नई दिल्ली:

शिकागो यूनिवर्सिटी के ऊर्जा नीति संस्थान (EPIC) द्वारा जारी नवीनतम वायु गुणवत्ता जीवन सूचकांक के अनुसार, दिल्ली दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर है, जहां वायु प्रदूषण की वजह से जिंदगी करीब 10 साल कम हो रही है, जबकि लखनऊ में  9.5 साल जिंदगी छोटी हो रही है. यह एक प्रदूषण सूचकांक है जो वायु प्रदूषण का जीवन प्रत्याशा पर पड़ते प्रभाव के बारे में बताता है.

रिपोर्ट में भारत में सिंधु-गंगा का मैदान  (नीचे चित्र देखें) दुनिया का सबसे प्रदूषित क्षेत्र बताया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, यदि वर्तमान प्रदूषण का स्तर बना रहता है, तो पंजाब से लेकर पश्चिम बंगाल तक 50 करोड़ से ज्यादा लोगों की जिंदगी औसतन 7.6 साल छोटी हो सकती है.

धूम्रपान जिससे जीवन प्रत्याशा 1.5 वर्ष घटती है और बाल कुपोषण एवं मातृ कुपोषण में 1.8 वर्ष उम्र कम हो जाती है, उसकी तुलना में वायु प्रदूषण अधिक घातक है.

भारत बांग्लादेश के बाद दूसरा सबसे प्रदूषित देश है. 2020 में पीएम 2.5 के स्तर के साथ विशाल सिंधु-गंगा का मैदान 76.2 माइक्रोग्राम / क्यूबिक मीटर बनाम 75.8 यूजी / एम 3 के साथ सबसे अधिक प्रदूषित पाया गया है. भारत का औसत पीएम 2.5 के स्तर का प्रदूषण 56.8 से बहुत कम है लेकिन उत्तर भारत में प्रदूषण इससे ज्यादा है, जबकि शेष भारत का पीएम 2.5 स्तर और भी कम होकर 40 माइक्रोग्राम/घन मीटर से कम है.

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देश की राजधानी दिल्ली में पीएम 2.5 का स्तर 107.6 मापा गया, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से दस गुना अधिक है. पीएम 2.5 जहरीले पदार्थों से बना एक अत्यंत सूक्ष्म कण है, जो फेफड़ों और अन्य अंगों में गहराई तक जमा हो जाता है, शरीर की सुरक्षा तंत्र को पछाड़ देता है.

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