IAF का ‘वायु बाण’ दुश्मन पर करेगा दूर से सटीक वार, हेलीकॉप्टर से लॉन्च होंगे ड्रोन

ड्रोन से मिलने वाला वीडियो सीधे ऑपरेटर तक पहुंचेगा.इसे जमीन और हवा, दोनों जगह से कंट्रोल किया जा सकेगा. इसमें 500 से 1000 ग्राम तक पेलोड ले जाने की क्षमता होगी. इसमें तीन तरह के पेलोड लगाए जा सकेंगे. निगरानी और लक्ष्य के पहचान, हमले के लिये और रॉकेट से जोड़ने की सुविधा भी होगी . 

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नई दिल्ली:

भारतीय वायुसेना ने एक नया और आधुनिक प्रोजेक्ट शुरू किया है. इसका नाम वायु बाण रखा गया है. यह प्रोजेक्ट युद्ध के तरीके को बदलने वाला माना जा रहा है. इसमें हेलीकॉप्टर से ड्रोन छोड़कर हमला किया जाएगा.अब हेलीकॉप्टर को दुश्मन के पास जाने की जरूरत कम होगी. इससे एयरक्रू की सुरक्षा बढ़ेगी. वायुसेना ने इसके लिए आरएफपी जारी किया है. इसमें भारतीय कंपनियों को डिजाइन और डेवलपमेंट के लिए बुलाया गया है. यह पूरा प्रोजेक्ट स्वदेशी है. इसमें सिर्फ देश की कंपनियां ही हिस्सा लेंगी.

आजकल युद्ध का तरीका बदल गया है. अब दूर से ही निशाना साधा जाता है. इसे बियॉन्ड विजुअल रेंज यानी BVR कहा जाता है. इसमें ड्रोन की भूमिका बहुत अहम हो गई है.इस सिस्टम में ड्रोन को हेलीकॉप्टर से नीचे गिराया जाएगा. इसके बाद ड्रोन खुद उड़ान भर लेगा. फिर यह अपने टारगेट की ओर बढ़ेगा. ड्रोन पूरी तरह ऑटोमैटिक होगा. यह ऑपरेटर को लगातार जानकारी भेजेगा.

यह सिर्फ निगरानी ही नहीं करेगा. जरूरत पड़ने पर हमला भी कर सकेगा. इसे आप एयर लांच लोइटरिंग म्युनिशन और सर्विलांस ड्रोन कह सकते हैं. इस ड्रोन की रेंज 80 किलोमीटर से ज्यादा होगी. यह करीब 30 मिनट तक हवा में रह सकेगा. यह 150 फीट से 8000 फीट की ऊंचाई पर काम कर सकता हैं. इसमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इंफ्रारेड सेंसर होंगे. इससे यह दिन-रात काम कर सकेगा. ड्रोन में एंटी-जीपीएस जैमिंग सिस्टम भी होगा. यानी सिग्नल बंद होने पर भी मिशन पूरा करेगा.

ड्रोन से मिलने वाला वीडियो सीधे ऑपरेटर तक पहुंचेगा.इसे जमीन और हवा, दोनों जगह से कंट्रोल किया जा सकेगा. इसमें 500 से 1000 ग्राम तक पेलोड ले जाने की क्षमता होगी. इसमें तीन तरह के पेलोड लगाए जा सकेंगे. निगरानी और लक्ष्य के पहचान, हमले के लिये और रॉकेट से जोड़ने की सुविधा भी होगी . 

आरएफपी के मुताबिक वायुसेना को  कुल 10 ड्रोन यूनिट की जरूरत हैं. इसके साथ 2 एयर बोर्न कंट्रोल स्टेशन, 2 ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और जरूरी उपकरण भी होंगे. यह आरएफपी वायुसेना की रीजनल एरो स्पेस इनोवेशन डिवीजन गांधीनगर ने जारी किया हैं.  इस प्रोजेक्ट को कॉन्ट्रैक्ट साइन होने पर 12 महीने के अंदर पूरा करना होगा. भारत का वायु बाण प्रोजेक्ट इस दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. यह सिस्टम खतरनाक इलाकों में काम आएगा. ड्रोन पहले जाकर जानकारी जुटाएगा. फिर टारगेट पहचान करेगा. जरूरत पड़ने पर सटीक हमला भी करेगा.इससे मिशन की सफलता बढ़ेगी और जोखिम कम होगा.वायु बाण प्रोजेक्ट आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है.  इससे हेलीकॉप्टर की ताकत में खासा इजाफा होगा .

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