आपको याद है वो दौर, जब हर दूसरे हाथ में एक ही फोन हुआ करता था- Micromax. आज ये कंपनी कहां है. बाजार से पूरी तरह गायब. आखिर ऐसा क्या हुआ कि भारत की नंबर वन मोबाइल कंपनी, जिसने Samsung जैसी विदेशी दिग्गज की नींद उड़ा दी थी, वो खुद ताश के पत्तों की तरह बिखर गई.
कंपनी बनाने का आइडिया: बिहार के गांव में क्या हुआ था?
कहानी शुरू होती है साल 2000 से. दिल्ली के राहुल शर्मा और उनके तीन दोस्तों ने मिलकर एक IT कंपनी बनाई- Micromax Informatics. शुरुआत में ये मोबाइल नहीं बनाते थे. असली खेल शुरू हुआ 2007 में. राहुल बिहार के एक गांव से गुजर रहे थे. वहां बिजली नहीं थी, और एक आदमी ट्रक की भारी-भरकम बैटरी से फोन चार्ज करने के 25 रुपये ले रहा था. यहीं उनके दिमाग की बत्ती जली. भारत के गांवों को महंगे फीचर नहीं, बल्कि हफ्तों तक चलने वाली दमदार बैटरी चाहिए थी.
ड्युअल सिम का जादू, Nokia को परेशान कर दिया
2008 में आया Micromax X1i, जिसकी बैटरी पूरे 30 दिन चलती थी. शुरू में दुकानदारों ने इसे बेचने से मना कर दिया, उन्हें लगा कि कंपनी झूठ बोल रही है. लेकिन असली प्रोडक्ट ने अपना रास्ता खुद बनाया और माउथ पब्लिसिटी ने इसे सुपरहिट कर दिया. इसके बाद आया ड्युअल सिम फोन, जिसने Nokia के किले में सेंध लगा दी. लेकिन राहुल शर्मा को सिर्फ गांवों तक सीमित नहीं रहना था. 2010 में कंपनी ने 'Q55 Bling' फोन उतारा, जिसमें स्वारोवस्की क्रिस्टल्स जड़े थे. इसने रातों-रात Micromax को शहरों का कूल ब्रांड बना दिया.
हॉलीवुड से लेकर नंबर वन तक
2012 में कंपनी ने अपनी ब्रांडिंग बदली और मशहूर Punch लोगो अपनाया. फिर आई 'Canvas' सीरीज. जो 5 इंच की स्क्रीन वाले फीचर्स Samsung 40 हजार में दे रहा था, Micromax ने वो महज 10 हजार में आम आदमी के हाथ में रख दिए. सोने पे सुहागा, हॉलीवुड स्टार Hugh Jackman बन गए ब्रांड एंबेसडर. 2014 आते-आते Micromax ने भारतीय स्मार्टफोन बाजार में Samsung को पछाड़ दिया और नंबर वन बन गई. उनका रेवेन्यू 7,142 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था.
पतन की शुरुआत
कहते हैं ना, जब इंसान अर्श पर होता है, तो उसे फर्श नजर नहीं आता. 2015 में Alibaba, Softbank इसमें एक बिलियन डॉलर का भारी-भरकम निवेश करना चाहते थे. कंपनी की वैल्यूएशन 5 बिलियन डॉलर आंकी जा रही थी. लेकिन प्रमोटर्स को लगा कि उनकी कंपनी की कीमत इससे कहीं ज्यादा है. इसलिए ये ऐतिहासिक डील टूट गई. आज खुद राहुल शर्मा इसे सबसे बड़ी भूल मानते हैं.
चीनी फोन की एंट्री और 4G की आंधी में उड़ा माइक्रोमैक्स
इसी बीच Xiaomi, Oppo, Vivo ने भारत में सीधे एंट्री मारी. Flipkart पर 'फ्लैश सेल' शुरू हुई, और चंद सेकंड में 15,000 फोन बिकने लगे. ऑनलाइन मॉडल से बीच का कमीशन खत्म हो गया और चीनी कंपनियां ग्राहकों को सीधे सस्ते और बेहतरीन फोन देने लगीं.
तभी 2016 में Jio आया. पूरा देश 4G इंटरनेट की तरफ भागने लगा, लेकिन Micromax के गोदाम पुराने 3G फोन से भरे पड़े थे. जब तक वो 4G की तरफ मुड़ते, बाजार हाथ से निकल चुका था. ऊपर से फोन का हैंग होना, घटिया सॉफ्टवेयर, और खराब सर्विस सेंटर के अनुभवों ने ताबूत में आखिरी कील ठोक दी. 2018 आते-आते कंपनी 1% मार्केट शेयर पर सिमट गई.
कहानी में आया सबसे बड़ा ट्विस्ट
2020 में गलवान घाटी की घटना के बाद 'IN' सीरीज से वापसी की देशभक्ति वाली कोशिश भी नाकाम रही. लेकिन ठहरिए, जो कंपनी मोबाइल ब्रांड के तौर पर जंग हार गई, वो आज पर्दे के पीछे रहकर हजारों करोड़ का कारोबार कर रही है.
कैसे? Micromax की एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है 'भगवती प्रोडक्ट्स लिमिटेड'. भारत सरकार की PLI स्कीम के तहत आज ये कंपनी उन्हीं चीनी कंपनियों (Oppo, Vivo, Xiaomi) के स्मार्टफोन अपनी फैक्ट्री में असेंबल कर रही है, जिन्होंने कभी Micromax को बाजार से बाहर निकाला था. 2025 तक इस यूनिट का रेवेन्यू 17,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया.
राहुल शर्मा कौन हैं?
राहुल शर्मा भारतीय टेक और ऑटोमोबाइल जगत के एक बेहद प्रतिभाशाली और साहसी बिजनेसमैन हैं, जो भारत की मशहूर मोबाइल कंपनी Micromax और इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कंपनी Revolt Motors के को-फाउंडर हैं. दिल्ली के एक साधारण मिडिल क्लास परिवार में जन्मे राहुल के पिता स्कूल प्रिंसिपल थे, जिन्होंने उन्हें कड़ी मेहनत का पाठ पढ़ाया था. नागपुर यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग और कनाडा से कॉमर्स की पढ़ाई करने वाले राहुल ने करीब 13 साल कॉर्पोरेट सेक्टर में बिताने के बाद अपने दोस्तों के साथ मिलकर Micromax की नींव रखी और एक समय पर Samsung जैसी ग्लोबल कंपनी को पछाड़कर भारतीय स्मार्टफोन मार्केट के बेताज बादशाह बने. भले ही मोबाइल ब्रांड के तौर पर विफल रहे, लेकिन अपनी कमाल की कारोबारी सूझबूझ और हालातों के साथ ढलने की काबिलियत के दम पर आज वे 1300 करोड़ रुपये से अधिक की नेटवर्थ के साथ देश के सबसे सफल और सम्मानित उद्यमियों में गिने जाते हैं.