भोले बाबा के गांव की दो महिलाओं की भी भगदड़ में गई जान, परिजनों ने बताया-कैसा ढूंढा शव?

Hathras Case : हाथरस में सत्संग सुनने गए लोगों को मौत मिली. इनमें ज्यादातर महिलाएं थीं. कैसे मृतकों के परिजनों ने अपनों के शव ढूंढे...यहां पढ़ें...

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Hathras Case : रेवती देवी के बेटे घटना की जानकारी देते हुए.

Hathras Case : भोले बाबा नारायण साकार के गांव पैरमपुर एनडीटीवी की टीम पहुंची तो पता चला कि गांव की दो महिलाओं की भी जान उस भगदड़ में हो गई है. वहीं दो घायल हैं. इस गांव की 60 साल की निवासी रेवती देवी अपनी पड़ोसन सोमवती के साथ हाथरस में भोले बाबा का सत्संग सुनने गईं थीं. रेवती देवी के चार बच्चे हैं. उनके पति छोटेलाल तो इतने गम में हैं कि बोल भी नहीं पा रहे. घर पर गांव वालों का आना-जाना लगा है. सभी लोग सांत्वना देकर परिवार का ढांढस बंधा रहे हैं. 

ऐसे पता चला

रेवती देवी के एक बेटे से एनडीटीवी की बात हुई. हादसे का जिक्र सुनते ही वे फफक पड़े. बोले, मैंने तो मना किया था मां को सत्संग में जाने से लेकिन फिर भी वो चली गईं. हादसे के बाद सोमवती के लड़के के पास किसी का फोन आया. सोमवती के पर्स से शायद उसने नंबर निकालकर फोन किया था. फोन करने वाले ने कहा कि तुम्हारी मम्मी की डेथ हो गई है. गाड़ी में शव को भरकर एटा ले जा रहे हैं.

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भागे-भागे पहुंचे एटा

रोते हुए रेवती देवी के बेटे ने बताया कि इसके बाद उस लड़के का फोन मेरे पास आया. उसने बोला कि गाड़ी करवा दो. हमारी मम्मी खत्म हो गईं हैं. एटा के अस्पताल में जाना है. इस पर मुझे याद आया कि मेरी मम्मी भी तो उसकी मां के साथ ही सत्संग सुनने गईं थीं. मैंने अपनी मम्मी के बारे में पूछा तो उसने बोला कि इस बारे में तो पता नहीं है. उस समय मैं गांव से बहुत दूर था. किसी तरह भागे-भागे गांव पहुंचा और छोटे भाई के साथ एटा पहुंचे.

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शवों का लगा था अंबार

रेवती देवी के बेटे ने बताया कि एटा के अस्पताल हम पहुंचे तो हर जगह लाश ही लाश दिखाई दे रही थी. हमने अंदर घुसने की कोशिश की तो अस्पताल वाले घुसने नहीं दे रहे थे. बड़ी ही मुश्किल से हमें एक-एक कर अंदर जाने की इजाजत मिली. अंदर गए तो देखा कि मम्मी का शव पड़ा हुआ था. इतना कहते ही एक बार फिर रेवती देवी के बेटे के आंसुओं का सब्र टूट गया और वह रोने लगे.

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