व्यापार समझौते के बाद ट्रंप से हो सकती है H-1B वीजा पर डील, NDTV से बोले पूर्व अमेरिकी राजदूत

पूर्व अमेरिकी राजदूत टिम रोमर ने कहा कि भारतीयों को H-1B वीजा की अनुमति देना अमेरिका के भी हित में है, क्योंकि जो छात्र अपनी PhD, नौकरियां और वीजा प्राप्त करते हैं, वे नौकरी मल्टीप्लायर बन जाते हैं, इससे "हजारों अमेरिकी नौकरियां" पैदा होती हैं.

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  • अमेरिका ने H-1B वीजा की फीस को बढ़ाकर लगभग 88 लाख रुपए कर दिया है जिससे भारतीय पेशेवरों में चिंता बढ़ी है
  • पूर्व अमेरिकी राजदूत टिम रोमर ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद इस वीजा नीति पर पुनर्विचार संभव है
  • व्हाइट हाउस प्रवक्ता के अनुसार डॉक्टरों को राष्ट्रीय हित में इस नई H-1B वीजा फीस से छूट मिल सकती है
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अमेरिका में काम करने के लिए दूसरे देशों आने वाले लोगों के लिए जरूरी H-1B वीजा पर लगने वाली फीस को बढ़ाकर 100,000 डॉलर (लगभग 88 लाख रुपए) कर दिया गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसल ने घबराहट और भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है, खासकर अमेरिका में काम करने का सपना देखने वाले भारतीय इंजीनियर्स और डॉक्टरों के बीच. वजह है कि इस वीजा का उपयोग सबसे अधिक भारतीय ही करते हैं. अब नई दिल्ली में पूर्व अमेरिकी राजदूत टिम रोमर ने एनडीटीवी से बात करते हुए बताया कि ट्रंप की नई H-1B वीजा पॉलिसी एक ऐसा मुद्दा हो सकता है जिसपर अमेरिका और भारत व्यापार समझौता पूरा करने के बाद चर्चा कर सकते हैं.

इस बीच सोमवार, 22 सितंबर को छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टरों को नई H-1B वीजा फीस से छूट दी जा सकती है. ब्लूमबर्ग न्यूज रिपोर्टर ने व्हाइट हाउस के प्रवक्ता टेलर रोजर्स का हवाला देते हुए एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि "राष्ट्रीय हित में मामले-दर-मामला छूट" पाने वालों में डॉक्टर भी शामिल हो सकते हैं.

पूर्व अमेरिकी राजदूत टिम रोमर ने क्या बताया?

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने H-1B वीजा प्रोग्राम में आमूल-चूल बदलाव उस समय किया है जब वो लगातार अमेरिका की इमिग्रेशन पॉलिसी को कठोर करते जा रहे हैं. इसका असर भारतीय टेक कंपनियों और कुशल पेशेवरों पर पड़ने वाला है. अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ के अलावा, नई $100,000 वीजा फीस से न केवल भारतीय छात्रों के अमेरिकी सपने बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों पर भी असर पड़ने की उम्मीद है. अभी के लिए, भारत सरकार ने कहा है कि  H-1B वीजा प्रोग्राम में हुए बदलाव का क्या असर होगा, वह उसका अध्ययन कर रही है. 

NDTV के शो में अमेरिकी राजदूत टिम रोमर ने स्वीकार किया कि ट्रंप प्रशासन का यह कदम "संबंधों में अड़चन पैदा करता है" लेकिन उन्होंने कहा, "उम्मीद है कि एक बार जब हम इन व्यापार वार्ताओं को पूरा कर लेंगे, जो शायद आशाजनक होंगी... तो इस H-1B वीजा मुद्दे पर फिर से विचार किया जा सकता है".

यह पूछे जाने पर कि क्या यह वीजी फीस बातचीत का एक बिंदु हो सकता है, टिम रोमर ने कहा कि उनका मानना ​​​​है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने जो 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगाया है (रूस से तेल की खरीद के कारण) पहले वो बातचीत का बिंदू होगा ताकि बातचीत को पटरी पर लाया जा सके, एक व्यापार समझौते पर प्रगति की जा सके.

भारत ने यूके, इजरायल और ऑस्ट्रेलिया के साथ सफल व्यापार समझौते किए हैं. उन्होंने कहा, "निश्चित रूप से अमेरिका, व्यापार और हितों और टेक्नोलॉजी, चिप निर्माण, स्वच्छ ऊर्जा में हमारे पास है, यह कुछ ऐसा है जिसे हम (व्यापार समझौते से) प्राप्त कर सकते हैं. तब राष्ट्रपति शायद इस H-1B वीजा पर फिर से विचार करेंगे."

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 उन्होंने समझाया कि यदि ऐसा नहीं हुआ, तो दो चीजें हो सकती हैं.

उन्होंने कहा, "अमेरिका की अदालतें इस पर विचार कर सकती हैं अदालतें कह सकती हैं कि राष्ट्रपति ने इस H-1B वीजा पर जरूरत से ज्यादा कर दिया है. और दूसरी बात यह है कि कांग्रेस इस पर विचार कर सकती है और कह सकती है, यह हमारा दायरा है. हम (कांग्रेस) ही हैं जो H-1B वीजा की संख्या निर्धारित करते हैं... हम अपनी शक्ति वापस लेना चाहते हैं, और हमें अमेरिका-भारत संबंधों के बारे में कुछ कहना होगा."

टिम रोमर ने कहा कि भारतीयों को H-1B वीजा की अनुमति देना अमेरिका के भी हित में है, क्योंकि जो छात्र अपनी पीएचडी और नौकरियां और वीजा प्राप्त करते हैं, वे नौकरी मल्टीप्लायर बन जाते हैं, जिससे "सैकड़ों, नहीं तो हजारों अमेरिकी नौकरियां" पैदा होती हैं.

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