Gujarat News: मासूम बच्ची के साथ निर्भया जैसी दरिंदगी, FIR के 41 वे दिन आरोपी को फांसी की सजा

गुजरात के राजकोट में एक बच्ची के साथ दरिंदगी करने वाले शख्स को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है. शख्स ने बच्ची के साथ निर्भया जैसी दरिंदगी की थी.

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पुलिस के साथ सजायफ्ता
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  • गुजरात में एक कोर्ट ने बच्ची के साथ दरिंदगी करने वाले को सुनाई फांसी की सजा
  • एफआईआर के 41वें दिन कोर्ट ने रेमसिंह डुडवा को सुना दी सजा
  • डुडवा ने एक सा 7 साल की बच्ची के साथ की थी क्रूर हरकत
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राजकोट:

गुजरात के राजकोट जिले के आटकोट के पास कानपर गांव की सीमा में 4 दिसंबर, 2025 को दिल्ली के निर्भया कांड जैसी ही एक अत्यंत क्रूर और जघन्य घटना सामने आई थी. खेत में खेल रही 7 साल की मासूम बच्ची को पास की झाड़ियों में खींचकर ले गए. तीन बच्चों के पिता रेमसिंह डुडवा ने बच्ची के प्राइवेट पार्ट में लोहे की रॉड डालकर उसे लहूलुहान कर दिया था. बच्ची दर्द से कराह रही थी, फिर भी आरोपी उसे वहीं छोड़कर फरार हो गया था.

11 दिन में दाखिल की चार्जशीट

पुलिस ने 8 दिसंबर को आरोपी को गिरफ्तार किया और मात्र 11 दिनों में चार्जशीट दाखिल कर दी. 12 जनवरी को, यानी घटना के 35 दिनों के भीतर कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए आरोपी को दोषी करार दिया. इसके बाद राजकोट की स्पेशल कोर्ट को 15 जनवरी को सजा का ऐलान करना था, लेकिन तारीख 17 जनवरी तय हुई. स्पेशल कोर्ट के जज वी.ए. राणा ने 30 साल के आरोपी रेमसिंह तेरसिंह डुडवा के खिलाफ अंतिम फैसला सुनाते हुए उसे फांसी की सजा सुनाई है.

मासूम ने खिलौनों के बीच पहचाना अपना गुनहगार 

राजकोट जिला पुलिस प्रमुख विजयसिंह गुर्जर ने बताया कि मेडिकल, तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के अलावा, जब कोर्ट में बच्ची ने आरोपी को पहचाना, तो वह पल बेहद महत्वपूर्ण था. एएसपी (ASP) सिमरन भारद्वाज और अन्य अधिकारियों ने पहचान परेड के दौरान आरोपी और अन्य लोगों के हाथों में अलग-अलग खिलौने दिए थे. हर बार अलग व्यक्ति को अलग खिलौना दिया गया, लेकिन हर बार बच्ची ने बिना किसी चूक के आरोपी को ही पहचाना.

'बच्ची ने दर्द में आरोपी के बाल तक नोच लिए थे'

जिला सरकारी वकील एस. के. वोरा ने बताया कि आरोपी ने इस हद तक जघन्य कृत्य किया कि जब उसने लोहे की रॉड का इस्तेमाल किया, तो बच्ची इतनी चिल्लाई कि उसने दर्द में आरोपी के बाल खींचकर उखाड़ दिए. यह इस बात का प्रमाण है कि मासूम को कितनी पीड़ा हुई होगी. आरोपी को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है. उसके परिवार ने भी उसे छोड़ दिया है. कोर्ट में जज के पूछने पर भी वह बिना किसी ग्लानि के खुद को निर्दोष बताता रहा.

जानिए कब क्या हुआ 

4 दिसंबर: दोपहर 12 बजे मासूम अपने भाई-बहनों के साथ खेल रही थी, तभी रेमसिंह मोटर साइकिल से आया और उसे उठाकर ले गया. उसने बच्ची के साथ रेप किया और उसके प्राइवेट पार्ट में लोहे की रॉड डाल दी. बच्ची की चीखें सुनकर उसकी मामी दौड़ीं, तो आरोपी भाग निकला.

इलाज: बच्ची की हालत इतनी गंभीर थी कि उसे राजकोट के जनाना अस्पताल रेफर किया गया. अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उसकी जान पर बन आई थी. रेडियोलॉजिस्ट और गायनेकोलॉजिस्ट की देखरेख में जटिल ऑपरेशन के बाद उसकी जान बचाई जा सकी.

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गिरफ्तारी और सबूत: पुलिस ने 8 दिसंबर को रेमसिंह को पकड़ा. उसकी निशानदेही पर खून से सनी लोहे की रॉड बरामद हुई. घटनास्थल से मिले बालों का DNA टेस्ट आरोपी से मैच हुआ.

पुलिस पर हमला: जांच के दौरान जब पुलिस घटना स्थल और उसे उसके घर ले गई, तो उसने पुलिस टीम पर हमला कर दिया, जिसमें कांस्टेबल धर्मेश बावलिया घायल हो गए. आत्मरक्षा में पुलिस ने फायरिंग की, जिससे आरोपी के पैर में गोली लगी थी.

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11 दिन में जांच पूरी, फांसी की सजा 

पुलिस ने केवल 11 दिनों में जांच पूरी कर चार्जशीट पेश की. बच्ची के पिता ने कोर्ट को पत्र लिखकर त्वरित न्याय की मांग की थी. मामले की गंभीरता देखते हुए कोर्ट ने रोजाना सुनवाई का आदेश दिया. महज 6 दिनों में गवाहों और सबूतों का काम पूरा किया गया और शनिवार 17 जनवरी को आरोपी को मौत की सजा सुनाई गई. सरकारी वकील ने बताया की अब आरोपी इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट, फिर सुप्रीम कोर्ट जा सकता है और अंत में राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर कर सकता है.

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