- गोधरा के वार्ड नंबर सात में 100 प्रतिशत मुस्लिम वोटरों के बीच हिंदू महिला ने चुनाव जीत हासिल की
- यह जीत सामाजिक सद्भाव और स्थानीय मुद्दों पर आधारित वोटिंग पैटर्न के बदलाव का प्रतीक मानी जा रही है
- मुस्लिम वोटरों ने पारंपरिक धार्मिक और जाति आधारित वोटिंग से हटकर काबिल उम्मीदवार को चुनने का निर्णय लिया है
एक ऐसे शहर में जिसे अक्सर अपने सांप्रदायिक इतिहास के लिए जाना जाता है, इसी गोधरा ने 2026 के स्थानीय निकाय चुनावों में सामाजिक सद्भाव का बड़ा संदेश दिया है. गोधरा म्युनिसिपैलिटी में निर्दलीय उम्मीदवार अपेक्षाबेन नैनेशभाई सोनी ने वार्ड नंबर 7 से शानदार जीत हासिल की है. यह एक ऐसा इलाका है जहां 100% वोटर मुस्लिम हैं. यानी जिस सीट पर सभी वोट मुस्लिम हैं वहां से एक हिंदू महिला चुनाव जीती हैं.
100% मुस्लिम वोटर वाली सीट पर जीती हिंदू महिला
अपेक्षाबेन सोनी की जीत ने इलाके की पॉलिटिकल कहानी को पूरी तरह से बदल दिया है. खुद वार्ड 7 में रजिस्टर्ड वोटर न होने के बावजूद, वह स्थानीय लोगों का गहरा भरोसा जीतने में कामयाब रहीं. राजनीतिक जानकार बताते हैं कि उनकी जीत मुस्लिम वोटरों के पक्के सपोर्ट से मुमकिन हुई, जिन्होंने स्थानीय मुद्दों के लिए सही माने जाने वाले उम्मीदवार को चुनने के लिए पारंपरिक धार्मिक और जाति-आधारित वोटिंग पैटर्न से आगे बढ़ने का फैसला किया.
गोधरा के राजनीतिक इतिहास में नया अध्याय
इस नतीजे को गोधरा के राजनीतिक इतिहास में एक मील का पत्थर माना जा रहा है, जो सामाजिक भाईचारे और मेलजोल का एक अनोखा उदाहरण है. पूरी तरह से मुस्लिम आबादी वाले वार्ड में एक हिंदू महिला को बड़ी बहुमत से चुनकर, गोधरा के वोटरों ने एक ऐसा जनादेश दिया है जो समाज में बंटवारे के बजाय काबिलियत और भरोसे को प्राथमिकता देता है. जानकारों का कहना है कि वोटिंग का यह 'गोधरा मॉडल' भविष्य में ग्रामीण और छोटे शहरों वाले गुजरात में लोकल बॉडी चुनावों को लेकर बड़े बदलाव का संकेत दे सकता है.
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