- गुजरात के शख्स ने घरेलू हिंसा के झूठे आरोपों से परेशान होकर कोंकणकड़ा पहाड़ी से कूदकर आत्महत्या की
- उन्होंने 13 मिनट के वीडियो में पत्नी और उसके परिवार पर झूठे आरोप लगाने, कानून के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया
- विश्वराजसिंह ने घरेलू हिंसा से जुड़े कानूनों के तहत दर्ज मामलों का दुरुपयोग और उन पर दबाव बनाने की बात कही
गुजरात से एक दिल दहलादेने वाला मामाला सामने आया है. भावनगर के रहने वाले विश्वराजसिंह ने महाराष्ट्र जाकर आत्महत्या कर ली. उन्होंने 12 अक्टूबर को हरिश्चंद्रगढ़ की कोंकणकड़ा पहाड़ी से कूदकर जान दे दी. सुसाइड से पहले उन्होंने 13 मिनट का एक वीडियो बनाया, जिसमें आत्महत्या की वजह बताई है. टिम्बा पोस्ट ऑफिस में काम करने वाले विश्वराजसिंह का आरोप था कि उनकी पत्नी की तरफ से दर्ज कराए गए घरेलू हिंसा के केस की वजह से वह और उनका परिवार बहुत ही परेशान है. इसी वजह से वह जान देने के लिए मजबूर हैं. इन आरोपों के बाद वह 1,700 फुट गहरी खाई में कूद गए.
वीडियो में उन्होंने अपनी पत्नी और उसके परिवार वालों पर कई आरोप लगाए हैं. दोनों की शादी 8 फरवरी, 2026 को हुई थी. महज आठ महीने बाद ही उनकी शादी टूट गई. 12 सितंबर को पुलिस के पास घरेलू हिंसा की एक शिकायत दर्ज कराई गई थी. 9 अक्टूबर को कोर्ट में पेशी के बाद विश्वराजसिंह घर से निकले और हरिश्चंद्रगढ़ स्थित कोंकणकडा पहाड़ से कूट गए.पुलिस मामले की जांच कर रही है.
पत्नी के घरेलू हिंसा के आरोपों को बताया झूठा
13 मिनट के वीडियो में विश्वराजसिंह ने और भी कई बातें कहीं. उन्होंने पत्नी द्वारा लगाए गए घरेलू हिंसा और वैवाहिक विवादों से जुड़े कानूनों के तहत शिकायतों को संभालने वाले तरीके पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि उन पर और उनके परिवार पर लगाए गए सभी आरोप झूठे थे. इसके साथ ही उन्होंने कानून में बदलाव की अपील की. अपने वीडियो की शुरुआत में उन्होंने कहा, मैं घाटी में कूदकर अपनी जान देने जा रहा हूं." इसके साथ ही उन्होंने वैवाहिक विवाद की वजह से झेल रहे मानसिक और भावनात्मक परेशानी भी बयां की.
महिला सुरक्षा के कानून का गलत इस्तेमाल
उन्होंने कहा कि जब जीवन में कोई उम्मीद नहीं दिखती तो इंसान अंदर से टूट जाता है. शादी को एक पवित्र रिश्ता कहा जाता है, जिसे कई जन्मों तक निभाना होता है. ये सब पढ़ने और सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन आज के दौर में, जब दो लोगों के विचार, स्वभाव और आदतें आपस में नहीं मिलतीं और उनके बीच टकराव होता है, तो वे तलाक ले लेते हैं. लेकिन ये तरीका हमेशा काम नहीं करता. उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानूनों का गलत इस्तेमाल हो रहा है.
वीडियो में उन्होंने दावा किया कि घरेलू हिंसा से जुड़े धारा 498 के तहत 90 फीसदी मामले झूठे होते हैं, जिनका कोई आधार नहीं होता, न कोई सबूत नहीं होता है. बस आरोप लगाए जाते हैं जिससे पति और उसके परिवार पर मानसिक, शारीरिक और आर्थिक दबाव डाला जा सके. यह हथियार जब से महिलाओं और उनके परिवारों के पास आया है तब से इसका गलत इस्तेमाल हो रहा है. बेटी के पति पर मानसिक, शारीरिक और आर्थिक दबाव में डालकर उनको जान देने के लिए मजबूर किया जाता है.
मेरी मां और भाई पर झूठा आरोप
जब यह हथियार लड़की और उसके परिवार के हाथ में आता है, तो इसका जमकर दुरुपयोग होता है. प्री-लिटिगेशन या समझौते के प्रयास तो होते हैं, लेकिन उनका पूरा लाभ नहीं मिलता. आज मेरे साथ, भावनगर जैसे संस्कारी शहर में, एक क्षत्रिय परिवार के दामाद होने के बावजूद ऐसा बर्ताव हुआ कि मानसिक, आर्थिक और सामाजिक दबाव बनाकर मुझे मरने पर मजबूर कर दिया गया. मेरे घर में ऐसी कोई घटना नहीं घटी, फिर भी केस में लिखवाया गया कि मैंने, मेरी मां ने और मेरे भाई ने मेरी पत्नी के साथ मारपीट. यह पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत है. पुलिस एफआईआर दर्ज करते समय कोई सबूत या मेडिकल रिपोर्ट तक नहीं मांगती.
वे दावा करते हैं कि उनका सोना हमारे पास है, जबकि सच्चाई यह है कि जब उनके माता-पिता उसे जबरन खींचकर ले जा रहे थे, तब वह खुद कह रही थी कि उसे नहीं जाना है. हमारी सोसाइटी के लोग इसके गवाह हैं. वह हमारा सोना पहनकर गई है, लेकिन जब हम अपनी चीजें वापस मांगते हैं, तो कोई सुनवाई या दबाव उन पर नहीं होता. सारा दबाव सिर्फ लड़के वालों पर बनाया जाता है.
मेरे परिवार को न्याय मिलना चाहिए
मेरे ससुर (अजय सिंह) मुझसे कहते थे कि 'मैं तुम्हारे पिता समान हूं'. क्या कोई पिता अपने बच्चे को लूटता है, उसकी मानसिक स्थिति खराब करता है और उस पर झूठे केस करता है? पिता तो माफ करता है और मौका देता है। आज जब मैं मर रहा हूँ, तो मेरे माता-पिता और 16 साल के छोटे भाई पर क्या बीतेगी, जिस पर भी घरेलू हिंसा का केस लगा दिया गया है. मैं सभी अधिकारियों और भावनगर के लोगों से अपील करता हूँ कि कानून में बदलाव और सुधार लाएं, ताकि झूठे 498A के मामलों से निर्दोष युवाओं की जिंदगियां बर्बाद न हों. मैं चुनौती देता हूx कि वे अपने आरोप साबित करके दिखाएं, मुझे और मेरे परिवार को न्याय मिलना चाहिए.
लड़कों पर डरने का दबाब बनाया जाता है
विश्वराजसिंह ने वैवाहिक विवादों पर पुलिस और प्रशासन के रवैये पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि पुलिस क्या करती है? कहती है कि लड़कों के लिए कानून कमजोर है, और लोगों को शादी जैसी चीजों से डरना पड़ता है. उन्होंने पत्नी के लगाए गए उन आरोपों को खारिज किया कि उनकी मां और भाई ने पत्नी के साथ मारपीट की थी. उनका दावा था कि रोजमर्रा की मामूली अनबन को शिकायत में गंभीर शारीरिक हिंसा बताया गया. पुलिस ने उससे सबूत तक नहीं मांगा. कानून पूरी तरह से लड़की के पक्ष में झुका हुआ है.
उन्होंने कहा कि वह बहुत ही दर्दनाक अनुभव से गुजर रहे हैं. उन्होंने अपने माता-पिता और अपने दोस्तों को बहुत निराश किया है. वह भविष्य को लेकर चिंता में हैं. उनको ये डर है कि यह तूफान उनके और उनके परिवार की लाइफ को पता नहीं कैसे प्रभावित करेगा.वे सभी कैसे ही जिंदा रह पाएंगे. ऐसी स्थिति जब भी पैदा होती है तो क्या कदम उठाए जाते हैं, इस बारे में उनको पता है.
'मैं अब और सहन नहीं कर सकता'
वह अब और सहन नहीं कर सकते. दूर चले जाना ही एक मात्र रास्ता बचा है. विश्वनाथ ने कहा कि अपने इस वीडियो के जरिए वह लोगों को ह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि कानूनों में बदलाव लाने की जरूरत है. हमें अपने दोस्तों और परिवार को शिकार होने से बचने के लिए शिक्षित करना चाहिए, ताकि वे भी सुरक्षित रह सकें.
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