- नोएडा सेक्टर 150 में युवराज मेहता की कार भारी कोहरे में नियंत्रण खोकर पानी से भरे बेसमेंट में गिर गई थी
- Yangwang U8 SUV में फ्लोटिंग मोड है जो पानी में गिरने पर कार को तैरने और चलने में सक्षम बनाता है
- Yangwang U8 की तकनीक में थर्मोग्राफिक नाइट विजन कैमरा होता है जो कोहरे या अंधेरे में भी विजन देता है
Greater Noida Accident Case: नोएडा सेक्टर 150 में हाल ही में हुई सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया. एक तरफ जहां यह घटना सिस्टम की लापरवाही को उजागर कर रही है, वहीं दूसरी तरफ मॉर्डन ऑटोमोबाइल टेक्नोलॉजी पर सोचने के लिए मजूबर कर रही है. अगर युवराज की कार की जगह Yangwang U8 जैसी तकनीक से लैस गाड़ी होती, तो शायद आज वो हमारे बीच होते. आइए समझते हैं कि कैसे एक कार की तकनीक जिंदगी और मौत के बीच का अंतर बन सकती है.
नोएडा सेक्टर 150 की रात क्या हुआ?
शुक्रवार की आधी रात को युवराज मेहता गुरुग्राम से अपने घर लौट रहे थे. भारी कोहरे और सड़क पर रिफ्लेक्टर और बैरिकेडिंग ना होने की वजह से उनकी कार कंट्रोल खोकर सेक्टर 150 के एक मॉल के पानी से भरे बेसमेंट में जा गिरी. अगले दो घंटों तक युवराज मदद के लिए चिल्लाते रहे, अपने पिता को फोन किया और टॉर्च से सिग्नल दिया. पर रेस्क्यू टीमें उन्हें बचाने में सफल नहीं हो पाईं.
Photo Credit: James Arbuckle
एक कार जो तैर सकती है
यहीं पर Yangwang U8 का जिक्र करना जरूरी हो जाता है. BYD कंपनी की इस प्रीमियम SUV में कुछ ऐसे फीचर्स हैं जो पानी से भरे एरिया में लाइफसेवर साबित हो सकते हैं.
इमरजेंसी फ्लोटिंग मोड
Yangwang U8 के पास फ्लोटिंग मोड है. अगर यह कार गहरे पानी में गिरती है, तो इसके सेंसर्स फौरन एक्टिव हो जाते हैं और कार अपने सस्पेंशन को ऊपर उठा लेती है. इंजन बंद हो जाते हैं और खिड़कियां सील हो जाती हैं. यह कार पानी की सतह पर 30 मिनट तक तैर सकती है और पहियों को घुमाकर 3 किमी/घंटा की रफ्तार से पानी में चल भी सकती है.
नाइट विजन कैमरा
नोएडा की उस रात घना कोहरा था, जिसकी वजह से युवराज आगे का रास्ता नहीं देख पाए. Yangwang U8 में थर्मोग्राफिक नाइट विजन कैमरा होता है, जो अंधेरे या भारी कोहरे में भी उन चीजों को देख सकता है जिन्हें नॉर्मल आखों से देखना पॉसिबल नहीं है.
ई4 प्लेटफॉर्म
यह कार चार मोटरों पर चलती है. अगर गड्ढे में गिरते समय एक या दो टायर जमीन से टच नहीं हों, तब भी इसकी टॉर्क कंट्रोलिंग कार को वापस खींचने में मदद करती है.
नोएडा की यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हमें ऐसी कारों की जरूरत है जो सिर्फ चलने के लिए नहीं बल्कि इमरजेंसी में नाव की तरह तैर कर हमें बचाने में भी सक्षम हों. आज गाड़ियों में एयरबैग्स से लकेर ABS आ रहे हैं, जो बहुत जरूरी हैं. पर हमें अब उन कंडीशन पर भी सोचना होगा, जहां कार पानी में डूब रही होती है और उसके दरवाजे खुल नहीं पाते.
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