- उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड हाईवे गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे पर नया अपडेट है.
- एक्सप्रेसवे को लेकर शामली-गोरखपुर के एलाइनमेंट NHAI की तरफ से मंजूरी मिल गई है.
- इसके बनने के बाद गोरखपुर की दिल्ली और पानीपत तक की दूरी 8 घंटे में पूरी होगी.
गोरखपुर-पानीपत ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के अलाइनमेंट के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की मंजूरी मिल गई है. जहां शामली-गोरखपुर के एलाइनमेंट का काम पूरा किया जाएगा. 750 किलोमीटर लंबा यह हाईवे उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे हैं जो यूपी के 18 जिलों से गुजरेगा, यह हरियाणा के पानीपत से होते हुए यूपी के शामली तक जाएगा. उत्तराखंड के हरिद्वार को भी यह कवर करेगा. उत्तर प्रदेश में 2 चरणों में इसका निर्माण किया जाना है. खास बात यह है कि गोरखपुर से दिल्ली की दूरी 14 घंटे से घटकर 8 घंटे तक रह जाएगी. करीब 35000 करोड़ की अनुमानित लागत से बनने वाला यह कॉरिडोर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे और प्रस्तावित गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के साथ सीधे कनेक्ट होगा.
यूपी-हरियाणा के इन जिलों से गुजरेगा
- गोरखपुर से शुरू होकर यह संत कबीर नगर, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी और सीतापुर तक जाएगा.
- पश्चिमी यूपी को कवर करते हुए यह शाहजहांपुर, बदायूं, पीलीभीत, रामपुर, मुरादाबाद, बिजनौर, मेरठ, मुजफ्फरनगर और शामली को कवर करेगा.
- यूपी के शामली की सीमा पार करते हुए यह यमुना नदी पर बनने वाले नए पुल के जरिए सीधे हरियाणा के पानीपत जो समोली गांव के पास एक्सप्रेसवे नेटवर्क से मिल जाएगा.
गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे का पहला चरण
पहले चरण में 348.039 किलोमीटर की दूरी पूरी की जाएगी. जिसमें पश्चिमी यूपी के जिलों के कवर किया जाएगा. यह शामली से शुरू होकर सहारनपुर तक इसका काम किया जाएगा. इस दौरान मुजफ्फरनगर, हरिद्वार, बिजनौर, रामपुर, मुरादाबाद, बरेली और पीलीभीत जिले कवर होगे. पहले चरण में 125 छोटे और 25 बड़े पुल बनेंगे. जबकि कुल 18 अंडरपास और 12 आरओबी का निर्माण होगा. इस दौरान आठ स्थानों को जनसुविधा केंद्र के तौर पर भी विकसित किया जाएगा. फिलहाल पहले चरण की जानकारी NHAI की तरफ से आई है. आगे के 2 चरणों की प्रक्रिया तैयार की जा रही है.
8 घंटे में पहुंचेंगे गोरखपुर से दिल्ली
दरअसल, यह एक्सप्रेसवे न केवल यूपी-हरियाणा की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा, बल्कि यह दिल्ली की यूपी के कई जिलों से दूरी को भी घटा देगा. गोरखपुर से पानीपत की दूरी घटकर महज 745 से 750 किलोमीटर हो जाएगी. वर्तमान में पानीपत या दिल्ली-एनसीआर से गोरखपुर जाने के लिए दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे या फिर यमुना एक्सप्रेसवे से होकर जाना पड़ता है. जिसमें 12 से 14 घंटे तक का समय लग जाता है. लेकिन गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे का निर्माण होने से यह दूरी 7 से 8 घंटे में पूरी हो जाएगी. इसके अलावा दिल्ली से बरेली, मुरादाबाद, बिजनौर की दूरी भी कम हो जाएगी. जबकि गोरखपुर और सिद्धार्थनगर की हरियाणा के बीच की दूरी भी आधी हो जाएगी. दिल्ली से बरेली, मुरादाबाद, बिजनौर की दूरी भी कम हो जाएगी. जबकि गोरखपुर और सिद्धार्थनगर की हरियाणा के बीच की दूरी भी आधी हो जाएगी.
क्यों खास है यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे
पानीपत से गोरखपुर के बीच बनने जा रहा यह ग्रीनफील्ड हाईवे दूसरे कई मायनों में भी खास माना जा रहा है. क्योंकि यह एक्सप्रेसवे नेटवर्क का इंटरचेंज बनेगा. यह कॉरिडोर भारत के कई बड़े एक्सप्रेसवे को आपस में कनेक्ट करेगा. यह गंगा एक्सप्रेसवे, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और प्रस्तावित गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे को इंटरचेंज पॉइंट्स के माध्यम से आपस में जोड़ेगा, जिससे देशव्यापी कनेक्टिविटी मजबूत होगी. NHAI के मुताबिक 2029 से 2030 के बीच यह एक्सप्रेसवे पूरा करने की तैयारी चल रही है.
6-लेन पर 120 से दौड़ेगी गाड़ियां
इस एक्सप्रेसवे को 6 लेन में बनाया जा रहा है. जबकि भविष्य में इसे 8 लेन तक प्रस्तावित करने की तैयारी है. इस हाईवे पर 100 से 120 की रफ्तार से गाड़ियां दौड़ेगी. यह रफ्तार आने से इस कॉरिडोर से पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच का फासला बेहद सिमट जाएगा.
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