दुनिया में गहराता जा रहा है तेल संकट, इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने बताया तेल-गैस बचाने के 10 उपाय

ईरान-इजरायल और अमेरिका में जारी युद्ध की वजह से तेल का बाजार गर्म है. भारत समेत दुनिया के दूसरे देशों में तेल का संकट गहराता जा रहा है. इस बीच अंतरराष्ट्रीय एनर्जी एजेंसी तेल और गैस बचाने के कुछ उपाए बताएं है. आइए जानते हैं कि किन तरीकों को अपनाकर हम तेल और गैस बचा सकते हैं.

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नई दिल्ली:

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है. तेल की कीमतों का बढ़ना लगातार जारी है. युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर तक पहुंच गई हैं.साल  2022 के बाद ऐसा पहली बार हो रहा है कि कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर हो गई है. तेल की कीमतों में आए उछाल की सबसे बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की नाकेबंदी है. यह जलमार्ग फारस की खाड़ी को दुनिया के दूसरे समुद्र से जोड़ता है. लेकिन नाकेबंदी की वजह से बड़ी संख्या में जहाज समुद्र में फंसे हुए हैं. तेल कीमतें बढ़ने का असर कई और चीजों पर पड़ रहा है. इससे आने वाले दिनों में अर्थव्यवस्था पर और दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. इस बीच अंतरराष्ट्रीय उर्जा एजेंसी (आईईए)  ने तेल की मांग को कम करने के लिए कुछ उपाय बताए हैं. एजेंसी का कहना है कि इन उपायों को अपना कर तेल की मांग को कुछ हद तक कम किया जा सकता है.आइए जानतें हैं इस अंतरराष्ट्रीय एजेंसी ने कौन-कौन से उपाए सुझाए हैं. 

  • एजेंसी का कहना है कि जहां संभव हो वहां वर्क फ्राम होम को लागू किया जाए. इससे गाड़ियां कम चलेंगी  और तेल की बचत होगी. 
  • हाईवे पर गाड़ियों की अधिकतम रफ्तार को कम से कम 10 किमी प्रति घंटा घटाया जाए. एजेंसी का कहना है कि कम रफ्तार से गाड़ियों में तेल की खपत कम होगी. यह उपाय खासकर कारों, वैन और ट्रक के लिए अपनाए जा सकते हैं.
  • लोगों को अपनी कारों या बाइक से ऑफिस जाने की जगह सार्वजनिक परिवहन के साधनों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाए. बस, मेट्रो और ट्रेन के इस्तेमाल से तेल की खबत को तेजी से कम किया जा सकता है. 
  • बड़े शहरों में निजी कारों को चलाने के लिए दिन निर्धारित किए जा सकते हैं. यह ठीक वैसा ही है, जैसा की प्रदूषण बढ़ने पर दिल्ली में ऑड-इवन की व्यवस्था लागू की जाती है. इससे सड़क पर गाड़ियां कम होंगी तो तेल का इस्तेमाल कम होगा, जाम में गाड़ियां नहीं फसेंगी. 
  • कार पूलिंग या कार शेयरिंग को बढ़ावा दिया जाए.अच्छे तरीके से ड्राइविंग करने की सीख दी जाए. चार अकेले-अकेले चार अलग-अलग कारें ले जाने की जगह अगर चार लोग एक ही कार से जाएंगे तो तीन कारों का तेल बचेगा. यह पर्यावरण के भी अनुकूल होगा.
  • सड़क पर चलने वाले कॉमर्शियल वाहनों और माल ढुलाई में लगे वाहनों का कुशलता से संचालन किया जाए.गाड़ियों की ठीक मेंटेनेंस और गाड़ियों पर ओवर लोडिंग को कम करके भी तेल की खपत कम की जा सकती है. 
  • गाड़ियों में एलपीजी के इस्तेमाल पर रोक लगाई जाए. जिन गाड़ियों में तेल और एलपीजी दोनों से चलने की व्यवस्था है, उनमें तेल के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाए. इससे लोगों को खाना बनाने और कई अन्य जरूरी कार्यों के लिए अधिक एलपीजी मिलेगी.
  • जहां यातायात के दूसरे साधन उपलब्ध हों, वहां हवाई यात्रा से परहेज करें. इससे कॉमर्शियल उड़ानों पर जेट फ्यूल का दबाव कम होगा. 
  • जहां संभव हो, वहां बिजली से चलने वाले बर्तनों में खाना पकाया जाए. इसके अलावा ईंधन के दूसरे माध्यमों को अपना कर एलपीजी पर निर्भरता काफी हद तक कम कर सकते हैं. 
  • उद्योग जगत अपने उत्पादन प्रक्रिया में सुधार कर एलपीजी और तेल पर निर्भरता कम कर सकते है, इस तरह वह आम जनता के लिए सुलभ होगा. 

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